Acharya Dharmendra : कौन थे आचार्य धर्मेंद्र जिनके निधन पर पीएम मोदी भी हो गए भावुक
Acharya Dharmendra : कौन थे आचार्य धर्मेंद्र जिनके निधन पर पीएम मोदी भी हो गए भावुक
जयपुर, 19 सितम्बर। श्रीराम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले संत आचार्य धर्मेंद्र का निधन हो गया। वे 80 साल के थे। 19 सितम्बर 2022 की सुबह राजस्थान की राजधानी जयपुर स्थित सवाई मानसिंह अस्पताल में आचार्य धर्मेंद्र ने आखिरी सांस ली। इनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक भावुक हो गए।

पीएम नरेंद्र मोदी ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली
बताया जा रहा है कि आचार्य धर्मेंद्र पिछले एक माह से बीमार चल रहे थे। पीएम नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समेत कई बड़े नेताओं ने कुछ दिन पहले ही उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली थी। सोमवार सुबह सवाई मानसिंह अस्पताल में आचार्य धर्मेंद्र ने अंतिम सांस ली।

20 दिन से जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती थे
बता दें कि बीमारी के कारण आचार्य करीब 20 दिन से जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती थे। सवाई मानसिंह अस्पताल के मेडिकल आईसीयू में इलाज चल रहा था। साल 1966 के गोरक्षा आंदोलन में, श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन में और कई जनजागरण यात्राओं में आचार्य का अहम योगदान रहा है।

तट पर मैड गांव में अपना जीवन व्यतीत किया
आचार्य धर्मेंद्र का जन्म 9 जनवरी 1942 को गुजरात के मालवाडा में हुआ था। इन्होंने जयपुर दिल्ली रोड पर कोटपुतली के विराटनगर के पार्श्व पवित्र वाणगंगा के तट पर मैड गांव में अपना जीवन व्यतीत किया। गृहस्थ होते हुए भी उन्हें साधू संतों के समान आदर और सम्मान प्राप्त था।

13 साल की उम्र में वज्रांग नाम से एक समाचारपत्र निकाला
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिता के आदर्शो और व्यक्तित्व का इनपर ऐसा प्रभाव पड़ा कि इन्होंने 13 साल की उम्र में वज्रांग नाम से एक समाचारपत्र निकाला। गांधीवाद का विरोध करते हुए इन्होंने 16 वर्ष की उम्र में 'भारत के दो महात्मा' नामक लेख निकाला। इन्होंने सन 1959 में हरिवंश राय बच्चन की 'मधुशाला' के जवाब में 'गोशाला (काव्य)' नामक पुस्तक लिखी।
1 महीने से उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट
मीडिया से बातचीत में आचार्य स्वामी धर्मेंद्र की पुत्रवधू और समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष अर्चना शर्मा ने बताया था कि पिछले 1 महीने से उनके स्वास्थ्य में लगातार गिरावट देखने को मिल रही थी। जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ राजीव बगरहट्टा के निर्देश में उनका इलाज किया जा रहा था। सोमवार को उनका निधन हो गया।












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