बीजापुर का सिलगेर आंदोलन फिर चर्चा में, राज्यपाल से मिलने जा रहे 10 आदिवासी गिरफ्तार

जगदलपुर, 22 जनवरी। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले का गांव सिलगेर अपने आंदोलन को लेकर एक बार फिर चर्चा में है। दरअसल ग्रामीण 8 महीने से सिलगेर गांव में पुलिस कैम्प शुरू किए जाने का विरोध कर रहे हैं। इधर शुक्रवार को राज्यपाल अनुसुइया उइके से रायपुर मुलाकात करने जा रहे 10 आदिवासियों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।

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पूरे मामले में एक बयान जारी करते हुए माकपा राज्य सचिव संजय पराते ने सरकार से सीधा सवाल पूछा है कि क्या किसी आदिवासी प्रतिनिधिमंडल का राज्यपाल से मिलना गुनाह है कि उन्हें रास्ते में ही हिरासत में ले लिया गया है? पार्टी ने कहा है कि इन अवैध गिरफ्तारियों ने बस्तर और आदिवासियों के संबंध में संवेदनशील होने के सरकार के दावे की पोल खोल दी है।

राज्यपाल को संज्ञान लेना चाहिए:माकपा

माकपा नेता ने आदिवासी कार्यकर्ताओं को अज्ञात स्थान में ले जाने और उनकी स्थिति के बारे में सही जानकारी न दिए जाने पर भी पार्टी का विरोध जताया है और मांग की है कि उन्हें तुरंत कोर्ट में पेश किया जाए, जो कि किसी भी हिरासती बंदी का मौलिक अधिकार है।माकपा ने कहा है कि राज्यपाल महोदया और उच्च न्यायालय को स्वतः इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और आदिवासी कार्यकर्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए उचित हस्तक्षेप करना चाहिए।

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क्यों भड़के सिलगेर के ग्रामीण?

दरअसल छत्तीसगढ़ के सुकमा और बीजापुर जिले के बॉर्डर पर सिलगेर नाम का गांव स्थित है। जहां पुलिस कैंप लगाए जाने के विरोध में बीते 8 महीने से ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं। ग्रामीणों को जैसे ही उनके बीच के 10 आंदोलनकारियों को पुलिस की तरफ से हिरासत में लेने की बात पता चली, तो ग्रामीणों ने तीर-धनुष के साथ पारंपरिक हथियार लेकर पुलिस कैंप के सामने जमकर नारेबाजी की है। आंदोलन करने वाले आदिवासियों कहना है कि पुलिस कैम्प के लिए सरकार को जमीन हड़पने नहीं देंगे, हमें इलाके में पुलिस कैंप और पक्की सड़कें नहीं चाहिए। सिलगेर आंदोलन के दौरान पुलिस की गोली से मारे गए 4 मृतकों को 1-1 करोड़ रुपए का मुआवजा राशि देने की मांग ग्रामीणों ने की है। ग्रामीणों ने कहा कि पुलिस की गोलियों से 3 लोग और भगदड़ में एक गर्भवती महिला की मौत हुई थी। कई ग्रामीण घायल भी हुए थे।आंदोलनकारी भूपेश सरकार से मृतकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए और घायलों को 50-50 लाख रुपए का मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।

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गौरतलब है कि मई 2021 में बीजपुर के घोर नक्सल प्रभावित इलाके सिलगेर में एक नया पुलिस कैंप खोला गया था। कैंप खुलने के साथ ही इलाके के हजारों ग्रामीण कैम्प का विरोध करते हुए धरने पर बैठ गए थे। पुलिस और आन्दोलनकारियों के बीच तनाव फैलने से पुलिस की गोली से कुछ ग्रामीणों की मौत हो गई थी।

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