MPPSC: 2019 की अप्रैल में होने वाली परीक्षा में नया झमेला, 20 अप्रैल को ही पटवारी चयन परीक्षा, कैंडिडेट परेशान
मध्य प्रदेश में पीएससी परीक्षा की फिर पंचायत शुरू हो गई हैं। व्यापम ने अप्रैल की जिस तारीख को पटवारी चयन परीक्षा रखी है, उसी दिन लोक सेवा आयोग के एग्जाम शैड्यूल में निबंध लेखन का पर्चा रख दिया गया है।

MPPSC 2019 exam: मध्य प्रदेश में विवादों में घिरे रहे MPPSC 2019 के अप्रैल में होने वाले अतिरिक्त एग्जाम पर फिर अड़ंगा लग सकता है। 20 अप्रैल को भी एक पर्चा हैं और इसी दिन पटवारी चयन परीक्षा भी आयोजित की गई हैं। कुछ अभ्यर्थी ऐसे हैं, जो दोनों परीक्षाओं में शामिल हो रहे हैं। उनके सामने संकट खड़ा हो गया कि वे दोनों में किस परीक्षा को छोड़े। एग्जाम में शामिल हो रहे कैंडिडेट्स विरोध जता रहे हैं। कुछ कोचिंग संस्थानों ने भी लोक सेवा आयोग से मांग की है कि पीएससी की 20 अप्रैल को होने वाली परीक्षा की तारीख में बदलाव किया जाए।

कभी रिजल्ट को लेकर तो कभी किसी अन्य वजह से विवादों में घिरे रहे एमपी पीएससी-2019 के एग्जाम पर फिर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। मप्र लोकसेवा आयोग ने अतिरिक्त मुख्य परीक्षा की तारीखों का ऐलान कर दिया हैं। ये परीक्षा 15 अप्रैल से 20 अप्रैल तक आयोजित की गई है। जिसमें कई विषयों की अलग-अलग दिन परीक्षा हैं। लेकिन इसी बीच 20 अप्रैल को होने वाली परीक्षा की तारीख को लेकर टकराव सामने आया है। बताया जा रहा है कि इसी दिन पटवारी चयन परीक्षा भी रखी गई हैं। दोनों ही परीक्षा में फॉर्म भरने कैंडिडेट्स के सामने संकट खड़ा हो गया है कि वे किस परीक्षा को छोड़े। जबकि तैयारी दोनों ही परीक्षाओं की हैं।

इंदौर मप्र लोक सेवा आयोग कार्यालय अपनी मांग लेकर पहुंचे जबलपुर के आशीष राजपूत का कहना है कि व्यापम पटवारी चयन परीक्षा की तारीख पहले घोषित कर चुका था। लिहाजा आयोग को मंथन करना चाहिए था कि 20 अप्रैल की परीक्षा बाद में ली जाए। परीक्षा में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों के भविष्य को नजर अंदाज किया जा रहा हैं। दूसरी ओर गौतम आईएएस एकेडमी के संचालक अनिल गौतम ने भी आयोग से मांग की है कि पीएससी परीक्षा की तारीख बाद में घोषित हुई, इसलिए निबंध लेखन की परीक्षा या तो आगे बढ़ाई जाए, या फिर 15 अप्रैल के पूर्व आयोजित की जाए। आपको बता दें कि 2019 की पीएससी परीक्षा एक बार होने के बाद इंटरव्यू लेबल तक पहुंच गई थी। बाद में तकनीकी खामियों और रिजल्ट की गड़बड़ी के कारण मामला कोर्ट पहुंचा और अतिरिक्त मुख्य परीक्षा आयोजित करने का फैसला लिया गया।












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