Local Election: कमल के कुछ खिल गए तो कुछ के मुरझा गए चेहरे, जानिए टिकट मिलने के बाद क्या कर रहे प्रत्याशी
टॉस की तरह इस बार मप्र में नगरीय निकाय चुनाव के लिए BJP महापौर प्रत्याशियों के टिकट का फैसला हुआ। लंबी बैठके फिर घंटों मंथन के बाद चर्चा के समुद्र से प्रदेश के 13 नगर-निगम महापौर प्रत्याशियों के नामों का ऐलान हो गया।
जबलपुर, 14 जून: एमपी में नगरीय निकाय चुनाव के लिए भाजपा की ओर से भी उम्मीदवारों के टिकट का पिटारा खुल चुका है। इंदौर, ग्वालियर और रतलाम को छोड़कर प्रदेश की 13 नगर-निगम के महापौर प्रत्याशी, घोषणा होते ही जश्न में डूब गए। उम्मीदवारों के घर से लेकर बीजेपी दफ्तरों में ढोल-नगाड़ों के साथ झंडे लहराने लगे है। प्रतिद्वंदी दावेदार मुरझाए ही सही, पर अपनी पार्टी के प्रत्याशी को भरोसा दिलाने में जुटे है कि वह उनको नगर-सत्ता की कुर्सी पर विराजमान कराने कोई कसर नहीं छोड़ेगे।

मंगलवार को मंगल टिकटों पर मुहर
किसी खेल के मैच में टीम में शामिल होने के साथ मैच का टॉस बड़ी अहमियत रखता है। टॉस कप्तान ही करता है। वैसे ही टॉस की तरह इस बार मप्र में नगरीय निकाय चुनाव के लिए BJP महापौर प्रत्याशियों के टिकट का फैसला हुआ। लंबी बैठके फिर घंटों मंथन के बाद चर्चा के समुद्र से प्रदेश के 13 नगर-निगम महापौर प्रत्याशियों के नामों का ऐलान हो गया। जबलपुर से डॉ जितेन्द्र जामदार, भोपाल से मालती राय, उज्जैन से मुकेश टटवाल, देवास से गीता अग्रवाल, बुरहानपुर से माधुरी पटेल, खंडवा से अमृता यादव, छिंदवाड़ा से अनंत ध्रुवे, कटनी से ज्योति दीक्षित, सिंगरौली से चन्द्रप्रताप विश्वकर्मा, सतना से योगेश ताम्रकार, रीवा से प्रबोध व्यास, सागर से संगीता तिवारी, मुरैना से मीना जाटव के नामों पर पार्टी ने अपनी अंतिम मुहर लगाईं। इंदौर, ग्वालियर और रतलाम अभी वेटिंग में है, जिनकी टिकट बुधवार को क्लीयर होने की संभावना है।

टिकट मिलते ही की पूजा-पाठ, पहुंचे पार्टी दफ्तर
सैकड़ों दावेदारों की फ़ौज में से 16 नगर-निगम के महापौर टिकट की छटनी पार्टी के लिए टेड़ी खीर से कम साबित नहीं हो रही थी। किसी तरह भोपाल के बाद दिल्ली दरबार में दिग्गजों की हाजिरी ने टिकट के सस्पेंस को खत्म किया। नामांकन दाखिले फिर चुनाव प्रचार के लिए सीमित वक्त है, तो मंगल टिकटों का फैसला मंगलवार को लेना जरुरी हो गया था। पार्टी की तरफ से अधिकृत घोषणा होते ही उम्मीदवार और उनके समर्थक ख़ुशी से झूम उठे। मठ-मंदिरों के दरबार में मत्था टेककर सीधे पार्टी दफ्तर पहुंचे। जहाँ ढोल-नगाड़ों और लहराते झंडो के बीच बधाइयों का ताँता लग गया। जिन क्षेत्रों में बीजेपी का झंडा बुलंद है, वहां पार्टी रिकॉर्ड बनाने आतुर है। चुनावी मैदान में जहाँ अच्छी टसल है, वहां के प्रत्याशी पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच कोई भी ऐसी गलती नहीं करना चाहेंगे, जिससे उनके नतीजों पर विपरीत असर पड़े। चुनाव है तो प्रतिद्वंदी दावेदारों से मन-मुटाव और उनका असहयोग चुनावों की परंपरा का एक हिस्सा है। इस बार उससे निपटना बीजेपी के लिए लोहे के चने चबाने से कम नहीं।

प्रतिद्वंदी दावेदारों के मुरझा गए चेहरे
BJP में टिकट को लेकर मचे पिछले चार दिन के घमासान के बाद जिन दावेदारों की टिकट कट गई, उनमे मायूसी छा गई। तमाम तरह के जेक, ज्योतिष गणनाओ, पूजा-पाठ, लंबे-चौड़े बायोडाटा सब धरे रह गए। 'अभी नहीं तो कभी नहीं' की तर्ज पर टिकट के लिए जोर लगाया जा रहा था। लेकिन पार्टी का सिक्का पार्टी की रणनीति फिर आने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए ही उछला। 13 में से आधा दर्जन नगर-निगम में सिंगल नाम थे, लेकिन बाकी हर एक नगर निगम क्षेत्र में आधा दर्जन से भी ज्यादा नेता टिकट के लिए ललायित थे। जिन्हें टिकट नहीं मिली, उनकी अपने प्रत्याशी के साथ खड़ा होना मज़बूरी भी है। ताकि संगठन और पार्टी को सकारात्मक संदेश जा सके। लेकिन कई जगहों की मुरझाए चेहरों और बनावटी हंसीभरी तस्वीरें बहुत कुछ बयां कर रही है।

शिवराज-वीडी के मास्टर प्लान पर होगा प्रचार
बीजेपी की ओर से घोषित हुए महापौर प्रत्याशी अब नामांकन पत्र दाखिल करने पंडितों से मुहूर्त निकलवा रहे है। ग्रह नक्षत्रों के हिसाब से उनके लिए शुभ घड़ी देखी जा रही है। नामांकन दाखिले के साथ प्रत्याशी अपना चुनाव प्रचार तेज कर देंगे। उससे पहले पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ चुनाव प्रचार की रणनीति बनाई जा रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पार्टी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा की संयुक्त प्रचार रणनीति पर भी अमल किया जा रहा है। एक तरह से हर उम्मीदवार के लिए करो या मरो जैसी स्थिति है।












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