Jabalpur News: आयुष्मान योजना स्कैम में अब होगी टेक्निकल जांच, पुलिस को मिले अहम सबूत
(Jabalpur News) आयुष्मान योजना फर्जीवाड़े में बेनकाब मप्र जबलपुर के बहुचर्चित सेंट्रल इंडिया किडनी हॉस्पिटल संचालक पाठक दंपति जेल में है, लेकिन बाहर मामले की चल रही जांच का दायरा अब और बढ़ने वाला है। स्वास्थ्य महकमे के टेक्निकल सपोर्ट सिस्टम से भी पड़ताल होगी। दरअसल ऐसा इसलिए हो रहा है क्योकि इस अस्पताल की आड़ में अस्पतालनुमा होटल में जो फर्जी पेशेंट भर्ती होते थे, उन्हें गंभीर बीमारियां होना बताई जाती थी। पुलिस द्वारा की गई अब तक की जांच में कई और गड़बड़ियां सामने आई है।

होटल में अस्पताल का भंडाफोड़ होने के बाद सेंट्रल इंडिया किडनी हॉस्पिटल पर लगे आरोपों की सच्चाई के कई सबूत पुलिस के हाथ लगे है। सरकार की बेहद महत्त्वकांक्षी आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना के नाम पाठक दंपति सरकार को करोड़ों का चूना लगाती रही। छापे के वक्त मौके पर जो फर्जी मरीज भर्ती मिले थे, उनकी फाइलें भी जब्त की गई थी। जिसके बाद गहराई से हुई पड़ताल में पता चला कि मरीज के ट्रीटमेंट में ड्रिप चढ़ना, कई गंभीर बीमारियों की जांच और दवाओं का जिक्र तो था, लेकिन हकीकत में ऐसा हुआ ही नहीं। क्योकि भर्ती होने वाले अधिकांश फर्जी मरीज दलालों के जरिए सिर्फ आराम फरमाने आते थे। उसके एवज में उन्हें भर्ती होने की एक निश्चित रकम मिलती थी।
जबलपुर के वेगा होटल में पकड़े गए इस बड़े स्केम में स्वास्थ्य महकमे की मिलीभगत भी सामने आई, जिसके बाद अब टेक्निकल आधार पर जांच आगे बढेंगी। प्रभारी सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा का कहना है कि जांच से संबंधित तकनीकी जानकारी पुलिस को मुहैया कराई जाएगी ताकि इस बड़े स्केम की तह तक पहुंचा जा सकें। आपको बता दें इस मामले में पाठक दंपति के अलावा हॉस्पिटल के मैनेजर को अरेस्ट किया गया था। साथ ही पुलिस को इस गिरोह में शामिल दलालों की भी तलाश है जो फर्जी मरीजों के रूप में आयुष्मान कार्डधारी लोगों को भर्ती कराने लाते थे। सूत्रों के मुताबिक कोरोनाकाल के बाद से अब तक लगभग 4 हजार फर्जी मरीजों के नाम आयुष्मान योजना का भुगतान लिया गया।












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