MP के बिजली उपभोक्ताओं के लिए खुशखबरी, सब कुछ ठीक रहा तो कम हो सकते है बिजली के दाम
एमपी में बिजली उपभोक्ताओं को आने वाले दिनों में खुशखबरी मिल सकती है। बिजली कंपनियों के उत्पादन और लागत का हिसाब किताब ठीक रहा तो बिजली दरों में कमी हो सकती हैं।

Good news for MP's electricity consumers: मध्य प्रदेश में चुनावी साल में बिजली दरों में बढ़ोत्तरी के महीने भर बाद अच्छी खबर है कि यदि सब कुछ ठीक रहा तो बिजली दरों में कमी हो सकती हैं। यह दावा ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव ने जबलपुर में किया। वह मंथन कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
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एमपी में अप्रैल से लगभग डेढ़ फीसदी बिजली दरों में इजाफा हुआ है। बिजली कंपनियों के प्रस्ताव पर सुनवाई करते हुए विधुत नियामक आयोग ने नए टैरिफ को मंजूरी दी थी। दलील दी गई थी कि बिजली उत्पादन में लागत बढ़ने के कारण फैसला लिया गया।

अब महीने भर बाद प्रदेश की बिजली कंपनियों के जबलपुर स्थित मुख्यालय में जब समीक्षा हुई तो उसके बाद ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव संजय दुबे ने बिजली दरों में कमी के संकेत दिए है। उन्होंने यह भी कहा है कि हो सकता है कि नए शैड्यूल के हिसाब से दरों को बढ़ाना न पड़े।
ऊर्जा सचिव ने बताया कि कंपनियों को घाटे से उबारने कई तरह के कदम उठाये जा रहे है। लेकिन महाराष्ट्र गुजरात जैसे राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश की स्थिति बेहतर है। किसी भी सीजन में बिजली उत्पादन में कोई कमी नहीं है।
संजय दुबे बोले कि महाराष्ट्र में 15 फीसदी तो गुजरात में ८ फीसदी बिजली दरों में इजाफा हुआ। उसके मुकाबले मध्य प्रदेश को सिर्फ 1.5 फीसदी दर बढ़ाने की जरुरत पड़ी। फ्यूल कास्ट एडजेस्टमेंट की तरह हर तीन महीने में रेट रिवाइज होगा।
वर्तमान में की स्थितियों को देखते हुए हो सकता है कि बिजली दर स्थिर रहे या फिर कम भी हो सकती है। ऊर्जा सचिव ने ट्रांसमिशन एंड लाईन लॉस में और कमी लाने की बात कही है। इससे सबसे ज्यादा लाभ बिजली दामों पर पड़ेगा।
वहीं चुनावी साल में बिजली कंपनियों की यदि यह रणनीति कारगर सिद्ध हुई और बिजली के दाम कम हुए तो सीधा एडवांटेज मौजूदा सरकार को होगा। महंगी बिजली के मुद्दे पर कांग्रेस को सियासत करने का मुद्दा भी नहीं बचेगा।












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