MP में अब हर महीने तय हो सकते है बिजली के दाम, कंपनियों ने आयोग से मांगी मंजूरी
एमपी में पेट्रोलियम पदार्थों की तर्ज पर हर महीने बिजली के रेट तय करने की तैयारी हो रही हैं। इसके लिए बिजली कंपनियों ने विधुत नियामक आयोग से मंजूरी माँगी हैं।

Electricity prices: मध्य प्रदेश में एक तरफ जहां अप्रैल से नई बिजली दरों को बढ़ाने का प्रस्ताव है तो वहीं बिजली कंपनियों ने पेट्रोलियम पदार्थों की तर्ज पर हर महीने रेट रिवाइज करने का प्लान बनाया हैं। इस सिलसिले में कंपनियों की ओर से विधुत नियामक आयोग में याचिका दायर कर मंजूरी मांगी हैं। यानि आयोग ने इस मामले में हरी झंडी दी तो एमपी में हर महीने बिजली के दाम तय होंगे।

एमपी में बिजली कंपनियां रेट नियंत्रण का हक़ अपने पास रखना चाहती हैं। हाल ही में विधुत नियामक आयोग में बिजली कंपनियों की ओर से प्रस्तुत नई याचिका से तो यही लगता हैं। याचिका में कंपनियों ने की ओर से मांग की गई है कि हर महीने दाम तय हो। यह ठीक उसी तर्ज पर होगा, जैसा पेट्रोलियम कंपनियां हर रोज दाम तय कर रही है। फर्क सिर्फ इतना है कि बिजली के मामले में हर महीने ऐसा होगा। नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों की याचिका पर 24 फरवरी तक आपत्ति और सुझाव आमंत्रित किए हैं।
इससे पहले हर तिमाही में फ्यूल कॉस्ट एडजस्टमेंट के जरिए दाम तय होते हैं । इसके लिए भी आयोग से मंजूरी मांगी जाती है। यदि इस पर मंजूरी मिलती है तो महंगी बिजली का असर उपभोक्ताओं पर ज्यादा पड़ने के आसार हैं। टैरिफ ऑर्डर से कोयले और बिजली का वास्तविक रेट ज्यादा होगा, बाकी राशि का अंतर सरचार्ज के रूप में वसूलने कंपनियां स्वतंत्र होगी। दूसरी तरफ मार्च के आखिरी हफ़्ते में 3.6 फीसदी तक बढ़ोत्तरी का भी प्रस्ताव है। बिजली कंपनियों के अधिकारियों की दलील है कि बिजली उत्पादन में लगने वाले कोयले या ईधन की खपत के हिसाब FCA का निर्धारण होता हैं। हर तीन माह में ईधन की कीमत में जो बदलाव होता है, उसके हिसाब से बढ़ोत्तरी का प्रस्ताव आयोग को भेजा जाता है। बिजली विभाग के जानकर भी बताते है कि मौजूदा वक्त में मध्य प्रदेश में बिजली उत्पादन कई ईकाइयों में कोयले की डिमांड की पूर्ति विदेश से भी हो रही हैं।












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