बदलाव, बगावत और बाजी ! जानिए कहाँ बदल गए टिकट और किसने छोड़ दी भाजपा
BJP पार्षद उम्मीदवारों की सूची जारी की गई। जारी लिस्ट को जनता ठीक ढंग से पढ़कर समझ भी नहीं पाई थी कि 5 घंटे के अंदर वार्ड नंबर 35 के घोषित प्रत्याशी को प्रदेश संगठन ने बदल दिया।
जबलपुर,

महापौर की न सही, पार्षद की ले लो टिकट !
जबलपुर नगर निगम के 79 वार्डों के लिए शुक्रवार की दोपहर पार्षद उम्मीदवारों की सूची जारी की गई। जारी लिस्ट को जनता ठीक ढंग से पढ़कर समझ भी नहीं पाई थी कि 5 घंटे के अंदर वार्ड नंबर 35 के घोषित प्रत्याशी को प्रदेश संगठन ने बदल दिया। इस वार्ड से भाजपा ने समर्थ तिवारी को प्रत्याशी बनाया था। पिछले बार इनकी पत्नी पार्षद थी। लेकिन लिस्ट जारी होने के बाद अचानक BJP प्रदेश कार्यालय से जारी चिट्ठी ने तिवारी के सारे अरमानों पर पानी फेर दिया। समर्थ की जगह बीजेपी ने पूर्व पार्षद एमआईसी सदस्य और महापौर प्रत्याशी के प्रबल दावेदार रहे कमलेश अग्रवाल को टिकट दिया। अचानक हुए इस बदलाव से स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं में हडकंप मच गया। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक यह कदम एडजेस्टमेंट के लिए उठाया माना जा सकता है।

2 बार पार्षद रहे कल्लू ने छोड़ी भाजपा
टिकट की मारामारी के बीच सेठ गोविन्ददास वार्ड से दो बार पार्षद रहे राजकुमार कल्लू बाबा की जब इस बार टिकट कटी तो उन्होंने पार्टी को अलविदा कह दिया है। अब उन्होंने चुनाव मैदान में निर्दलीय उतरने का फैसला लिया है। राजकुमार ने बताया कि 35 साल से वह भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय सदस्य रहे हैं। इसी तरह दादा ठनठनपाल वार्ड क्रमांक 72 से अपनी जनसेवा और पार्टी में बतौर कार्यकर्ता सक्रिय भूमिका निभाने वाले दो स्थानीय नेता दीपक ठाकुर और पंडित आरएन गर्ग में भी बगावती तेवर नजर आ रहे है। आरएन गर्ग ने तो निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया है। दूसरी तरफ इसी वार्ड से भाजपा से जुड़े दीपक ठाकुर अपनी पत्नी मंजू ठाकुर को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतार रहे है।

भाजपा के फैसलों पर गहराया असंतोष
इस बार के टिकट वितरण में अधिकांश वार्डों में असंतोष गहराता नजर आ रहा है। पार्टी के झंडे तले आधी जिंदगी गुजारने वाले जिन दावेदारों को टिकट से इस बार भी महरूम रहना पड़ा, उनके समर्थक भी पार्टी के फैसलों से खफा है। अपना नाम न उजागर करने की शर्त पर पार्टी के एक नेता ने बताया कि ऐसे कई नए चेहरे भी है, जिनकी चुनाव वाले वार्ड में ज्यादा अच्छी छवि नहीं है। न तो उनके साथ ज्यादा समर्थन है और न ही अपने पक्ष में बेहतर परिणाम लाने की काबिलियत। नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि दो दावेदार लंबे वक्त से इस भरोसे अपने वार्ड में पार्टी के पक्ष में सक्रिय थे कि संगठन आने वाले वक्त में उनके काम का आंकलन करेगा। पार्टी उन्हें पार्षद का चुनाव लड़ने मौका देगी। लेकिन जब प्रत्याशियों की सूची जारी हुई तो निराशा ही हाथ लगी।

कांग्रेस में भी यही हाल
ऐसा नहीं है कि यह स्थिति सिर्फ भाजपा में है। कांग्रेस की ओर से भी शुक्रवार रात पार्षद प्रत्याशियों की जारी हुई सूची ने लंबी बहस को जन्म दे दिया है। कई वार्डों में कांग्रेसी दावेदार जिन्हें टिकट नहीं मिला, वह निर्दलीय चुनाव लड़ने जा रहे है। शनिवार को प्रत्याशियों के नाम निर्देशन पत्र भरने का आखिरी दिन है। बाकी और तस्वीरें निर्वाचन कार्यालय में नजर आएगी, जब बगावती चेहरे या तो खुद निर्दलीय चुनाव लड़ने नामांकन दाखिल करेंगे, या फिर अपनी पार्टी छोड़ किसी दूसरी पार्टी का दामन थाम लेंगे।












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