Bageshwar Dham Dhirendra Shastri मामले में शंकराचार्यों के बयानों में दरार ! सदानंद सरस्वती का समर्थन
बागेश्वर धाम के पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के कथित चमत्कार की बहस पर शंकराचार्यों के बयान ही आपस में मेल नहीं खा रहे। अविमुक्तेश्वरानंद और सदानंद सरस्वती दोनों के बयान आलग-अलग है। एक समर्थन कर रहे है दूसरे चुनौती दे रहे है
Bageshwar Dham Pandit Dhirendra Shastri miracle:एमपी के छतरपुर बागेश्वर धाम वाले धीरेन्द्र शास्त्री को लेकर मचे बवाल के बीच शंकराचार्यों के बयानों ने भी नई बहस छेड़ दी हैं। शास्त्री के कथित चमत्कार और फिर विरोधियों के द्वारा एक दूसरे को चुनौतियां दी जा रही हैं। अब द्वारका पीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती की भी इस मामले में एंट्री हो गई है। कटनी में वह धीरेन्द्र शास्त्री का समर्थन करते नजर आए। बोले- कि बागेश्वर महाराज आपको आने के लिए पीले चावल तो भेजे नहीं, तो फिर वहां क्यों पहुंचे? ये आपकी श्रद्धा और विश्वास है।
बागेश्वर धाम बाला जी सरकार के नाम पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के कथित चमत्कार और दावों को लेकर छिड़ी बहस थम नहीं रही। राजनेताओं से लेकर धर्मगुरु अपने अपने तर्क दे रहे है। स्थिति यह है कि शंकराचार्यों के बयान तक आपस में मेल नहीं खा रहे। आपस में उनके बयानों में ही दरार पड़ती नजर आने लगी हैं। द्वारका पीठ के शंकारचार्य सदानंद सरस्वती भी इस बहस में शामिल हो गए। कटनी में उन्होंने कहा कि -
जो लोग धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पर प्रश्न उठा रहे हैं, क्या वो कभी बागेश्वर धाम गए? क्या उन्होंने लोगों का भला करने के लिए दक्षिणा ली है, पैसा लिया? कोई ऐसा व्यक्ति, जिसको उन्होंने ठीक करने का वादा किया। कोई एग्रीमेंट किया? वो ठीक नहीं हुआ हो? ऐसा कुछ नहीं है। पहले विश्वास और अंधविश्वास में अंतर समझना पड़ेगा। अगर किसी देवी-देवता का आश्रय लेकर लोग ठीक हो रहे हैं, तो क्या गलत है? ये तो हमारी परंपरा है। क्या बागेश्वर महाराज ने पीला चावल भेजा क्या, फिर क्यों आए? ये आपकी श्रद्धा और विश्वास है।
अविमुक्तेश्वरानंद ने ये कहा था
दरअसल सदानंद सरस्वती के इस बयान के पहले ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि यदि चमत्कार जैसी कोई सिद्धि मनमानी नहीं होना चाहिए हैं। उसे मान्यता मिलनी चाहिए हैं। उन्होंने चुनौती दी कि जोशीमठ में हो रहे भू-धंसाव से दरारें आ रही, उसे रोककर बताया जाए हैं। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि जो चमत्कार जनता की भलाई में हो हम उसे नमस्कार करेंगे, लेकिन धर्मगुरुओं के शास्त्र की कसौटी पर खरा उतरना चाहिए हैं।