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Saudi vs UAE: आखिर क्यों आपस में ही भिड़ गईं सऊदी और यूएई की सेनाएं? जानें वो 4 बड़ी वजहें

Saudi Arabia vs UAE: यमन का गृहयुद्ध अब एक ऐसे मोड़ पर है जिसने पूरी दुनिया, खासकर मुस्लिम जगत की चिंता बढ़ा दी है। कल तक जोसऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) कंधे से कंधा मिलाकर हूतियों के खिलाफ लड़ रहे थे, आज उनके हित आपस में टकरा रहे हैं। दक्षिणी यमन के नियंत्रण को लेकर तनाव इस कदर बढ़ गया है कि सऊदी अरब ने मुकल्ला पोर् के पास UAE समर्थित 'सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल' (STC) के ठिकानों और जहाजों पर सीधी एयरस्ट्राइक कर दी है।

इस हमले में 20 से ज्यादा लड़ाकों की मौत और हदरमौत जैसे महत्वपूर्ण तेल क्षेत्रों पर कब्जे की जंग ने यह साफ कर दिया है कि यमन अब दो क्षेत्रीय महाशक्तियों के बीच वर्चस्व का अखाड़ा बन चुका है। इस रिपोर्ट में जानतें हैं वो बड़ी वजह जिस वजह से सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जंग के मैदान में आमने सामने हैं।

Saudi Arabia vs UAE
(AI Image)

यमन का विभाजन बनाम अखंडता

सऊदी अरब और UAE के बीच तनाव का सबसे बड़ा कारण यमन (Yemen Civil War) का भविष्य है। सऊदी अरब चाहता है कि यमन एक 'एकजुट' देश रहे और वहां उसकी पसंद की सरकार चले। इसके विपरीत, UAE दक्षिणी यमन के अलगाववादियों (STC) को समर्थन दे रहा है, जो यमन को तोड़कर एक स्वतंत्र 'दक्षिण अरब' देश बनाना चाहते हैं। सऊदी के लिए यमन का टूटना उसकी अपनी सुरक्षा और दक्षिणी सीमा के लिए एक गंभीर खतरा है, जिसे वह किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं कर सकता।

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तेल और गैस के खजानों पर अधिकार

हालिया हिंसा की मुख्य वजह हदरमौत और अल-महरा जैसे रणनीतिक प्रांत हैं। ये इलाके यमन के आर्थिक केंद्र हैं, जहां देश का सबसे बड़ा तेल और गैस भंडार मौजूद है। पिछले महीने जब UAE समर्थित STC ने इन क्षेत्रों और तेल प्रतिष्ठानों पर कब्जा कर लिया, तो सऊदी अरब का धैर्य जवाब दे गया। रियाद इन संसाधनों को अलगाववादियों के हाथ में नहीं जाने देना चाहता, क्योंकि इससे न केवल उसकी आर्थिक योजनाएं बल्कि क्षेत्रीय नेतृत्व भी प्रभावित होगा।

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'हथियारों की खेप' पर खूनी विवाद

दोनों देशों के बीच का कूटनीतिक भरोसा तब पूरी तरह खत्म हो गया (Saudi UAE Conflict Hindi) जब सऊदी अरब ने मुकल्ला पोर्ट पर UAE से आई एक खेप पर बमबारी कर दी। सऊदी का आरोप था कि UAE वहां हथियार और बख्तरबंद गाड़ियां भेजकर विद्रोह भड़का रहा है। हालांकि UAE ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वह केवल मानवीय सहायता के वाहन थे। इस घटना के बाद UAE ने गुस्से में यमन से अपनी सेनाएं वापस बुला लीं, जिससे गठबंधन टूट गया।

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समुद्री मार्ग और व्यापारिक वर्चस्व

यमन केवल एक देश नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार का द्वार है। UAE यमन के बंदरगाहों और रणनीतिक द्वीपों (जैसे सोकोट्रा) पर अपना प्रभाव जमाकर 'मैरीटाइम गेटकीपर' बनना चाहता है। सऊदी अरब को डर है कि अगर UAE इन समुद्री रास्तों और बंदरगाहों पर हावी हो गया, तो वह भविष्य में सऊदी के तेल निर्यात और व्यापारिक हितों को नियंत्रित कर सकता है। यही कारण है कि सऊदी अब हवाई हमलों के जरिए UAE समर्थित ताकतों को पीछे धकेल रहा है।

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