year ender : दुनिया की परमाणु शक्ति वाले दो ताकतवर देश, भारत और चीन, कैसे 'शांति समझौता' के लिए तैयार हुए?

year ender : जुलाई 2020 में भारत और चीन के बीच सैन्य संघर्ष के बाद रिश्ते खराब हो गए थे, जिसमें कम से कम 20 भारतीय सैनिक और चार चीनी सैनिक मारे गए थे। इस संघर्ष के बाद यह बीहड़, पहाड़ी क्षेत्र में लंबे समय तक चलने वाले गतिरोध में बदल गया, जहां दोनों पक्षों ने तोपखाने, टैंक और लड़ाकू विमानों के साथ दसियों हजार सैन्य कर्मियों को तैनात कर दिया।

और यह पहली बार नहीं था जब दो पड़ोसी परमाणु राष्ट्रों के बीच सीमा विवाद हुआ था। एक वक्त तो ऐसा लग रहा था, कि परमाणु बमों से सुसज्जित ये दोनों देश, कहीं एक विनाशकारी युद्ध में ना फंस जाएं।

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डोकलाम: 2017 चीन-भारत सीमा गतिरोध (Doklam: 2017 China-India border standoff)

जून 2017 में, चीनी सेना (PLA) ने डोकलाम पठार के माध्यम से एक सड़क का निर्माण शुरू किया था और ये एक ऐसा क्षेत्र है, जिसे भारत और भूटान, भूटानी क्षेत्र के रूप में मान्यता देते हैं। नई दिल्ली ने चीनी निर्माण पर गहरी आपत्ति जताई और भारतीय सैनिकों ने इसे रोकने के लिए क्षेत्र में प्रवेश किया। 16 जून से 28 अगस्त, 2017 तक 73 दिनों तक गतिरोध चला, उसके बाद दोनों देश बातचीत पर लौट आए। भारत और चीन अपने सैनिकों को उनकी मूल स्थिति में वापस बुलाने पर सहमत हुए।

बाद में 2019 में, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत का दौरा किया, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका भव्य स्वागत किया। दोनों नेताओं के मुस्कुराते चेहरे ज्यादातर वैश्विक मीडिया की सुर्खियों में छाए रहे।

गलवान घाटी संघर्ष 2020 (Galwan Valley clash 2020)

साल 2020 में, दो सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों की सेनाओं के बीच फिर से आमना-सामना हुआ, जिसमें 20 भारतीय सैनिकों की जान चली गई। हालांकि चीन ने सार्वजनिक रूप से अपनी तरफ से मरने वालों की संख्या की घोषणा नहीं की, लेकिन वैश्विक मीडिया में दावे किए गये, चीन के भी कई सैनिक मारे गये। इस घटना के बाद प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठकें बंद हो गईं, हालांकि दोनों नेताओं ने विश्व सम्मेलनों के दौरान संक्षिप्त मुलाकातें जरूर की। राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत में हुए जी-20 शिखर सम्मेलन में भाग नहीं लिया।

बातचीत की टेबल पर लौटे मोदी-शी जिनपिंग

एक वक्त लग रहा था, कि भारत और चीन के बीच के संबंध लगातार तनावपूर्ण ही होते जाएंगे, लेकिन अचानक दोनों देशों की तरफ से 'शांति समझौते' की रिपोर्ट आ जाती है। दरअसल, अक्टूबर 2024 में रूस ने महत्वपूर्ण ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन किया था और इस सम्मेलन से ठीक एक दिन पहले भारत और चीन की तरफ से सीमा विवाद को लेकर मौजूदा विवाद पर एक समझौते पर पहुंचने की घोषणा की गई। इस घोषणा में कहा गया, कि पूर्वी लद्दाख में संघर्ष वाले बिंदुओं से दोनों ही देशों की सेनाएं पीछे लौटने को तैयार हो गई हैं।

इसके बाद पीएम मोदी और शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक 23 अक्टूबर को प्रसारित ज्यादातर प्राइम टाइम के लिए एक ब्लॉकबस्टर हिट रही।

दोनों नेता वार्ता की मेज पर लौट आए। शी जिनपिंग और पीएम मोदी ने अपने राष्ट्रीय झंडों के बैकग्राउंड के सामने हाथ मिलाया और दोनों ने अपने विवादों को संभालने के महत्व पर जोर दिया। चीनी नेता ने कहा, कि दोनों देश विकास के एक महत्वपूर्ण चरण में हैं और "उन्हें मतभेदों और असहमति को सावधानीपूर्वक संभालना चाहिए और एक-दूसरे की विकास आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने में मदद करनी चाहिए।"

वहीं, इस बैठक के बाद भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने संवाददाताओं को बताया, "दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया है, कि दो पड़ोसी और पृथ्वी पर दो सबसे बड़े राष्ट्रों के रूप में भारत और चीन के बीच स्थिर, पूर्वानुमानित और सौहार्दपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों का क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और समृद्धि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।"

भारत-चीन सीमा समझौता (India-China border pact)

पीएम मोदी की महत्वपूर्ण रूस यात्रा से पहले, भारत ने घोषणा की, कि दोनों देश 2020 में एक घातक झड़प के साथ शुरू हुए गतिरोध के बाद हिमालय में अपनी विवादित सीमा पर सैन्य गश्त फिर से शुरू करने पर एक समझौते पर सहमत हुए हैं। चीन ने एक दिन बाद समझौते की पुष्टि करते हुए कहा, कि दोनों पक्ष अपनी सीमा से संबंधित प्रस्तावों पर पहुंच गए हैं।

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