Analysis: IMF से फंड मिलने पर क्या श्रीलंकी की अर्थव्यवस्था पटरी पर आ पाएगी?

श्रीलंका सेंट्रल बैंक के पूर्व गवर्नर इंद्रजीत कुमारस्वामी ने जुलाई में भारतीय समाचार पोर्टल द वायर को बताया था, कि "आंकड़ों से लगता है कि साल के अंत तक आधी आबादी नई गरीबी रेखा से नीचे खिसक सकती है।"

कोलंबो, सितंबर 02: "हमने अपने भोजन अभियान में लोगों को भोजन के लिए लड़ते देखा है, यह देखना बहुत मुश्किल है" अल-जजीरा से बात करते हुए एक चैरिटी संगठन के सह-संस्थापक, जो देश में गरीबों को नियमित भोजन प्रदान कर रहा है, वो काफी उदास हो गये। वहीं, कम्युनिटी मील शेयर ट्रस्ट की नदीका जयसिंघे कहती हैं, "जिन स्कूलों के माता-पिता को हम भोजन उपलब्ध कराते हैं, उन्होंने हमें सप्ताह के दौरान प्रदान किए जाने वाले भोजन की संख्या बढ़ाने के लिए कहा है, क्योंकि बच्चों को उचित भोजन नहीं मिलता है।" श्रीलंका पिछले कई महीनों से भीषण आर्थिक संकट से गुजर रहा है और अब आईएमएफ से श्रीलंका को लोन मिलने की हरी झंडी दे दी गई है। ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या आर्थिक संकट में फंसी श्रीलंका की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट पाएगी?

आईएमएफ से मिलेगा श्रीलंका को लोन

आईएमएफ से मिलेगा श्रीलंका को लोन

गुरुवार को श्रीलंका और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने 48-महीने के लिए 2.9 अरब डॉलर के विस्तारित फंड सुविधा पर एक कर्मचारी-स्तरीय समझौता किया गया है, जो अन्य दाताओं से अल्पकालिक धन को सुरक्षित करने में भी मदद करेगा। लेकिन, भले ही देश ने आईएमएफ से वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए पहला कदम उठाया है, लेकिन, श्रीलंका के लोग एक बार फिर से सामान्य जीवन जी सकें, इस बात की संभावना काफी मुश्किल नजर आ रही है। विश्व खाद्य कार्यक्रम ने श्रीलंका के एक हालिया आकलन में पाया है, कि देश की 2 करोड़ 20 लाख की आबादीमें से लगभग 30 प्रतिशत लोगों को भोजन मिलना काफी मुश्किल हो गया है। हर चार में से एक व्यक्ति खाने का खर्च उठाने में नाकाम होता दिख रहा है और जो लोग गरीब थे, उनकी स्थिति तो काफी खराब हुई ही है, इसके साथ ही श्रीलंका में नये गरीबों की संख्या में भारी उछाल आया है और उच्च महंगाई, सामानों की कमी और नौकरी के नुकसान ने लोगों के जीवन में दुर्दशा को और बढ़ा दिया है।

भारी संख्या में और लोग होंगे गरीब

भारी संख्या में और लोग होंगे गरीब

श्रीलंका सेंट्रल बैंक के पूर्व गवर्नर इंद्रजीत कुमारस्वामी ने जुलाई में भारतीय समाचार पोर्टल द वायर को बताया था, कि "आंकड़ों से लगता है कि साल के अंत तक आधी आबादी नई गरीबी रेखा से नीचे खिसक सकती है।" जुलाई के अंत में देश में मुद्रास्फीति 66.7 प्रतिशत पर आ चुका था, जबकि इसी अवधि में राष्ट्रीय खाद्य मुद्रास्फीति 82.5 प्रतिशत पर पहुंच गई थी। सरकार ने हाल ही में बिजली दरों में बढ़ोतरी को मंजूरी दे दी है, क्योंकि राज्य के स्वामित्व वाले सीलोन बिजली बोर्ड को गंभीर ऋण स्तरों के बीच बिजली उत्पादन की बढ़ी हुई लागत का सामना करना पड़ रहा है।

ऊर्जा क्षेत्र में गंभीर संकट

ऊर्जा क्षेत्र में गंभीर संकट

श्रीलंका में मिट्टी के तेल की कीमतें, जो इस साल की शुरुआत में अन्य ईंधनों के अनुरूप नहीं बढ़ाई गई थीं, हाल ही में 87 श्रीलंकाई रुपये ($0.24) से बढ़ाकर 340 श्रीलंकाई रुपये ($0.93) प्रति लीटर कर दी गई हैं। ईंधन की ऊंची कीमतों के कारण वितरण की बढ़ी हुई लागत को कवर करने के लिए सितंबर के लिए वाटर टैरिफ शुल्क वृद्धि की घोषणा की गई है। जयसिंघे ने इस साल मार्च में अपना चैरिटी संगठन शुरू किया था, यह देखते हुए कि कई शहरी समुदाय बढ़ती कीमतों और रसोई गैस की कमी के कारण अपनी खाद्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे थे। जबकि, ट्रस्ट ने उदार अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय दाताओं की बदौलत अपने कवरेज का विस्तार करने में कामयाबी हासिल की है, भोजन की आपूर्ति और परिवहन की लागत बढ़ती जा रही है और प्रति भोजन की लागत 250 श्रीलंकाई रुपये ($ 0.68) से बढ़कर 350 श्रीलंकाई रुपये हो गई है।

गरीब बच्चों की हालत और खराब

गरीब बच्चों की हालत और खराब

सरकार ने हालांकि, छात्रों के लिए भोजन के लिए अपने आवंटन को दोगुना कर 60 श्रीलंकाई रुपये कर दिया है, लेकिन, जयसिंघे का कहना है, कि "उस कीमत पर भी पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना असंभव है। अकेले एक अंडे की कीमत 50-60 रुपये हो चुकी है।" उन्होंने कहा कि, केवल स्कूल ही संघर्ष नहीं कर रहे हैं, बल्कि अस्पतालों का हाल भी बेहाल है और प्रसूति क्लीनिकों से भी अनुरोध मिलता है कि वे रोगियों को अंडे और दही जैसे प्रोटीन युक्त भोजन प्रदान करें।

आयात प्रतिबंध, प्राइस कैप और कोटा

आयात प्रतिबंध, प्राइस कैप और कोटा

सरकार ने राशन, आयात प्रतिबंध और मूल्य कैप सहित देश में वस्तुओं की कीमतों और कमी को प्रबंधित करने के लिए नए उपायों की शुरुआत की है। वर्तमान में श्रीलंका में ईंधन के लिए एक कोटा-आधारित राशन प्रणाली है, जहां प्रत्येक रजिस्टर्ड वाहन को, वाहन के प्रकार के आधार पर साप्ताहिक ईंधन आवंटित किया जाता है। हालांकि, इससे कई लोगों को नुकसान हुआ है, जो अपने व्यवसाय के लिए ईंधन की निरंतर आपूर्ति पर निर्भर हैं। उदाहरण के लिए, हाल ही में अल जजीरा से बात करने वाले एक कैब ड्राइवर ने कहा कि, उनकी साप्ताहिक आय 30,000 रुपये ($82) से गिरकर 5,000 रुपये ($14) हो गई है, क्योंकि ईंधन कोटा की वजह से उन्हें इंधन नहीं मिल पाता है। अपना नाम नहीं बताने वाले कैब ड्राइवर का कहना था कि, अब उनका परिवार खर्च चलाने के लिए दिन में सिर्फ दो वक्त का खाना खाता है। पिछले हफ्ते विदेशी मुद्रा को देश से बाहर जाने से रोकने क लिए सरकार ने डेयरी उत्पादों और इलेक्ट्रॉनिक सर्वर उपकरणों सहित 300 वस्तुओं के आयात पर अनिश्चित काल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है।

श्रीलंका के लिए क्या है आगे का रास्ता?

श्रीलंका के लिए क्या है आगे का रास्ता?

आईएमएफ ने श्रीलंका में आर्थिक सुधारों के लिए रूपरेखा तैयार की है, जो श्रीलंका को अपने बारहमासी राजकोषीय और चालू खाता घाटे को ठीक करने के लिए करने की आवश्यकता है। कुछ कदमों में टैक्स बढ़ाकर राजस्व बढ़ाना, ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी करना शामिल है, ताकि लागत को कवर किया जा सके और सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क का विस्तार किया जा सके। यह भ्रष्टाचार को आमंत्रित करने वाली नीतिगत खामियों को दूर करने में भी सहायता प्रदान कर रहा है। हालांकि, 2.9 अरब डॉलर की फंडिंग, जो किश्तों में वितरित की जाएगी, उसे मिलने में अभी भी कम से कम 4 से 6महीने का वक्त और लगेगा और तब तक देश की स्थिति और भी ज्यादा खराब ही होगी। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि आईएमएफ से श्रीलंका को जो फंड मिलेगा, वो ऊंट के मुंह में जीरा के समान है, जिससे थोड़ी सी राहत ही मिल सकती है।

कई और रास्तों से मिल रही है मदद

कई और रास्तों से मिल रही है मदद

कई बहुपक्षीय संगठन भी पहले ही श्रीलंका की मदद के लिए कदम बढ़ा चुके हैं। उदाहरण के लिए, एशियाई विकास बैंक ने इस सप्ताह की शुरुआत में घोषणा की है, कि वह अगले तीन महीनों के लिए नकद अनुदान और खाद्य वाउचर प्रदान करने के लिए 200 मिलियन डॉलर के वित्तपोषण का पुनर्व्यवस्थित करेगा। कोलंबो में आईएमएफ मिशन के प्रमुख पीटर ब्रेउर ने गुरुवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि, "मानवीय संकट को टालने के लिए अल्पावधि में समर्थन बहुत जरूरी है।" लेकिन अभी तक, वे अभी भी मामूली मात्रा में हैं और एक कोविड संकट से पहले की स्थिति में आने के लिए अभी लंबा सफर तय करना पड़ेगा।

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