सऊदी अरब, UAE और चीन.. अरबों डॉलर का निवेश कर पाकिस्तान को आर्थिक दुर्दशा से बचा पाएंगे ये देश?

Pakistan Economic Crisis: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पिछले तीन महीनों से लगातार विदेशी यात्राओं में व्यस्त हैं और कर्ज में डूबे अपने देश को बचाने के लिए लगातार अपने सहयोगियों से बात कर रहे हैं।

शहबाज शरीफ को उम्मीदें तीन देशों से है, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और चीन। अपनी यात्रा के दौरान शहबाज शरीफ ने बार बार इन देशों के नेताओं को पाकिस्तान में निवेश करने के लिए मनाने की कोशिश की है, जिसका मकसद पाकिस्तान में डॉलर लाना है।

Pakistan Economic Crisis

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को पता है, कि देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का एकमात्र उपाय ये है, कि ये देश पाकिस्तान में भारी-भरकम निवेश करें और निवेश से ही खस्ताहाल हो चुके देश की अर्थव्यवस्था में ईंधन डाली जा सकती है।

निवेश के लिए हाथ-पैर मारते शहबाज शरीफ

पिछले साल जून में पहली बार प्रधानमंत्री बने शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान में निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टमेंट फैसिलेशन काउंसिल (SIFC) का गठन किया था, जिसमें पाकिस्तान के कुछ नेता और कुछ सैन्य अधिकारियों को शामिल किया गया है। SIFC को पाकिस्तान सरकार का उच्चस्तरीय संस्था बताया गया है।

शहबाज शरीफ ने पिछले तीन महीनों में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और चीन के साथ कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें पाकिस्तान में भारी-भरकम निवेश करने की बात कही गई है।

लेकिन, क्या वाकई ये निवेश होने वाला है?

पाकिस्तान एक आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है, कि फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) को लेकर सरकार जो कोशिशें कर रही है, वो तभी कामयाब हो पाएंगे, जब पाकिस्तान सरकार देश में स्थिर राजनीतिक व्यवस्था और सुरक्षा का वादा कर सके। इसके अलावा, सरकार को विदेशी निवेशकों को ये भी विश्वास दिलाना होगा, कि सरकार देश की अर्थव्यवस्था में सुधार करने के लिए संरचनात्मक सुधार लाने के लिए प्रतिबद्ध है।

लिहाजा, आकलन इस बात को लेकर हो रहा है, कि शहबाज शरीफ को विदेशी यात्राओं से क्या हासिल हुआ है? और 1958 के बाद से पाकिस्तान अभी तक 23 बार अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) प्रोग्राम में जा चुका है और अब 24वें प्रोग्राम में जाने की तैयारी कर रहा है, तो फिर IMF को आकर्षित करने के लिए उसके पास क्या प्लान है?

सऊदी अरब से आएंगे 5 अरब डॉलर?

इस साल मार्च में प्रधानमंत्री बनने के बाद शहबाद शरीफ दो बार सऊदी अरब की यात्रा कर चुके हैं। प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री और विदेश मंत्र भी कई बार सऊदी अरब की यात्रा कर चुके हैं, जिसके बाद पिछले महीने सऊदी अरब ने पाकिस्तान में कारोबार की संभावनाओं को तलाशने के लिए 50 सदस्यों वाले एक प्रतिनिधिमंडल को भेजा था।

अप्रैल महीने में सऊदी अरब के प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ बैठक के दौरान शहबाज शरीफ ने 5 अरब डॉलर के निवेश के लिए उन्हें मनाने की कोशिश की। शहबाज शरीफ ने सऊदी अरब में अल-अरबिया चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, कि "हमने गवर्नमेंट से गवर्नमेंट और बिजनेस से बिजनेस, दोनों स्तरों पर सहयोग के लिए संभावनाओं को तलाशने की कोशिश की है और अब हमारे सामने एक स्पष्ट रास्ता है।"

शहबाज शरीफ से पहले कार्यवाहक प्रधानमंत्री अनवार-उल-हक काकर ने भी दावा किया था, कि सऊदी अरब पाकिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में 25 अरब डॉलर का निवेश करने के लिए सहमत हो गया है, हालांकि उन्होंने अपने बयान के पीछे कोई आधार नहीं बताया। लेकिन, काकर के 25 अरब डॉलर से शहबाज शरीफ 5 अरब डॉलर तक पहुंच चुके हैं।

इन्वेस्टमेंट एंड केट्रेड सिक्योरिटीज के चेयरमैन अली फरीद ख्वाजा ने कहा, कि पाकिस्तान ने तेल रिफाइनरी प्रोजेक्ट, कृषि, खनन, बिजली क्षेत्र, टेक्नोलॉजी और एविएशन समेत छह विभिन्न क्षेत्रों में सऊदी निवेश की संभावनाएं बताई हैं।

अललजीरा की एक रिपोर्ट में उन्होंने कहा है, कि "पाकिस्तान को निवेश की जरूरत है और हम करीब 18 महीने पहले डिफॉल्ट होने की दहलीज पर थे। लेकिन, अपने सहयोगी देशों के साथ इस तरह की बातचीत और जु़ड़ाव के जरिए हम उन्हें बता रहे हैं, कि हमारे पास उन्हें ऑफर करने के लिए क्या है।"

पाकिस्तान के एक सरकारी अधिकारी, जो सऊदी अरब के व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ होने वाली बातचीत में शामिल थे, उन्होंने कहा, कि "हमें उम्मीद है, कि सऊदी अरब पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड (PIF) से पाकिस्तान में निवेश करेगा, जो सऊदी अरब की संप्रभू फंड है, जिसके 900 अरब डॉलर होने की संभावना है।"

पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा, कि "हम निश्चित तौर पर निवेश के अवसरों की तलाश कर रहे हैं और अपने विजन तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।"

पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा, कि "सऊदी अरब से 5 अरब डॉलर के निवेश पर बातचीत चल रही है और जैसे जैसे आगे बातचीत होगी, ये साफ होता जाएगा और हम देखते हैं, कि आखिर ये सौदे किस तरह के होते हैं।"

UAE करेगा 10 अरब डॉलर का निवेश?

सऊदी अरब से आश्वासन लेने के बाद शहबाज शरीफ मई के अंत में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी एक दिवसीय यात्रा के लिए गये थे और UAE भी सऊदी अरब की ही तरह पाकिस्तान का दीर्घकालिक भागीदार रहा है। शहबाज शरीफ ने UAE की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात की।

शहबाज शरीफ और शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की मुलाकात के बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ऑफिस ने दावा किया, कि यूएई ने पाकिस्तान में 10 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है। यूएई के इन्वेस्टमेंट मिनिस्ट्री ने इसकी पुष्टि भी की, लेकिन इससे ज्यादा यूएई ने कुछ नहीं कहा। लिहाजा, इस, बात की कोई जानकारी नहीं है, कि यूएई ये निवेश किम क्षेत्रों में करेगा, ये निवेश कितने सालों में होगा और क्या दोनों पक्ष निवेश की शर्तों को लेकर सहमत हुए हैं?

चीन-पाकिस्तान में कई MoU

पाकिस्तान के इकोनॉमिक एक्सपर्ट्स का कहना है, कि शहबाज शरीफ की चीन यात्रा, उनके सऊदी अरब और यूएई की यात्रा से काफी ज्यादा महत्वपूर्ण थी। शहबाज शरीफ 5 दिनों के लिए चीन की यात्रा पर गये थे। उनके साथ सैन्य प्रमुख जनरल सैयद असीम मुनीर भी थे और इन दोनों ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्रक्षी ली कियांग से मुलाकात की।,

शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर उस वक्त चीन की यात्रा पर गये थे, जब दो महीने पहले हथियारबंद लोगों ने पाकिस्तान में चीनी इंजीनियरों को ले जा रही एक बस पर हमसा कर दिया था, जिसमें कम से कम 5 चीनी इंजीनियर मारे गये थे।

पाकिस्तान और चीन मिलकर 62 अरब डॉलर की परियोजना CPEC पर काम कर रहे हैं, लेकिन इस प्रोजेक्ट को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। वहीं, पिछले 10 वर्षों में पाकिस्तान की चीन पर निर्भरता काफी ज्यादा बढ़ गई है। दोनों देशों के बीच का रिश्ता, जो एक वक्त सिर्फ सैन्य संबंधों तक आधारित था, अब ये साझेजारी आर्थिक मुद्दों पर है। पाकिस्तान पर चीन का करीब 30 अरब डॉलर का कुल विदेशी ऋण है, जबकि पाकिस्तान के ऊपर कुल विदेशी ऋण 130 अरब डॉलर से ज्यादा है।

इसके अलावा, देश को इकोनॉमिस्ट ने चेतावनी दी है, कि अगर शहबाज शरीफ देश में निवेश नहीं ला पाए, तो पाकिस्तान अपने 3.6 प्रतिशत के विकास दर हासिल करने में नाकाम हो जाएगा।

लिहाजा, शहबाज शरीफ ने बार बार चीन को सुरक्षा का आश्वासन दिया है।

पाकिस्तान को क्या करने की जरूरत है?

SIFC का गठन पिछले साल जून में किया गया था और इसे देश में बाहरी निवेश के लेकर अवसर खोजने का काम दिया गया था। पाकिस्तान के सेन्ट्रल बैंक के आंकड़ों से पता चलता है, कि इस साल जुलाई से अप्रैल तक पाकिस्तान को 1.45 अरब डॉलर का निवेश प्राप्त हुआ, जो पिछले साल की तुलना में मात्र 8.1 प्रतिशत की है।

लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि शहबाज शरीफ की तीन विदेश यात्राओं से ये तो पता चलता है, कि वो वित्तीय मदद हासिल करने के लिए कितने बेताब हैं, लेकिन किसी भी परियोजना को पूरा नहीं करने का पाकिस्तान का इतिहास भी उन देशों के सामने है।

किंग फैसल सेंटर फॉर रिसर्च एंड इस्लामिक स्टडीज के एसोसिएट फेलो उमर करीम का कहना है, कि "किसी भी प्रोजेक्ट को लेकर मिली नाकाम की वजह पुरानी राजनीतिक अस्थिरता और संरचनात्मक मुद्दे हैं। पाकिस्तान के पास इन्फ्रास्ट्क्चर नहीं है, महौल नहीं है और कुशल हाथ नहीं हैं, लिहाजा निवेश की संभावना काफी कम है।

इकोनॉमिक एक्सपर्ट उजैर यूनुस का भी मानना है, कि "पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा मुद्दा ये है, कि वो घरेलू राजनीति में बुरी तरह से उलक्षे हुए हैं और, क्या कोई देश पाकिस्तान में निवेश का रिस्क ले पाएगा?"

अलजजीरा की एक रिपोर्ट में वाशिंगटन डीसी स्थित विश्लेषक उजैर यूनुस ने कहा, कि "ऐसे समय में जब घरेलू निवेशक भी पाकिस्तान के बाजार में निवेश करने से हिचकिचा रहे हैं, तो क्या विदेशी निवेशक रिस्क लेंगे?"

उन्होंने कहा, कि "पाकिस्तान को विदेशी निवेश हासिल करने के लिए आमूल-चूल परिवर्तन करने होंगे और निवेशकों के सामने एक विश्वसनीय रोडमैप लेकर जाना होगा, जो ना सिर्फ विदेशी, बल्कि घरेलू निवेशकों को भी आकर्षित कर सके, लेकिन क्या अब तक शहबाज शरीफ ने ऐसा किया है, ऐसा नहीं लगता।"

एक्सपर्ट्स का कहना है, कि जिस तरह से चुनावों में धांधली हुई है, उसने देश की राजनीति को अस्थिर कर दिया है। दूसरी तरफ, पाकिस्तान में एक के बाद एक आतंकी हमले हो रहे हैं और अधिकारियों को निशाना बनाया गया है। वहीं, पाकिस्तान का भारत के साथ तनाव बरकरार है और अफगानिस्तान सीमा पर स्थिति कभी भी ऑउट ऑफ कंट्रोल हो सकती है, लेकिन शहबाज शरीफ के पास इन मुद्दों से निपटने के लिए क्या समाधान हैं, वो बता नहीं पाते हैं।

हालांकि, लंदन स्थित निवेशक केट्रेड सिक्योरिटीज के ख्वाजा ने उम्मीद जताते हुए कहा है, कि "चीन, सऊदी और यूएई.. ये तीन प्रमुख ऋणदाता पाकिस्तान में निवेश के लिए व्यापक योजना के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।"

लेकिन, कराची स्थित अर्थशास्त्री खुर्रम हुसैन ने कहा, कि "ये तीनों देश पाकिस्तान को हाई-रिस्क देश मानते हैं और पाकिस्तान सरकार को नकदी की जरूरत है।" उन्होंने कहा, कि "अगर ये देश निवेश के लिए तैयार भी हो जाते हैं, तो ये निवेश आने में कई साल लग सकते हैं, और ये सौदे देश में ज्यादा नकदी भी नहीं ला पाएंगे, और शहबाज सरकार के सामने सबसे बड़ी दिक्कत ये है, कि विदेशी कर्ज चुकाने के लिए वो नकदी कहां से लाएगी?"

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