• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

नोबेल पुरस्‍कार समिति को अब हो रहा है ओबामा को नोबेल देने का अफसोस!

|

ओस्‍लो। नोबेल समिति ने जब वर्ष 2009 में राष्‍ट्रपति बराक ओबामा को नोबेल शांति पुरस्‍कार दिया था तो समिति की काफी निंदा हुई थी। उस समय समिति ने खुद को विवाद से किनारे कर लिया। अब छह वर्ष बाद समिति को अहसास हो रहा है कि ओबामा को नोबेल शांति पुरस्‍कार देकर उन्‍होंने एक गलती की थी।

barack-obama-nobel-peace-prize

नोबेल समिति के पूर्व सेक्रेटरी गेर लूनेश्‍टा ने कहा है कि राष्ट्रपति ओबामा को वर्ष 2009 का नोबेल शांति पुरस्कार देने का फैसला समिति की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। अपने मेमोयर में लूनेश्टा ने कहा कि समिति को उम्मीद थी कि

इस पुरस्कार से अमेरिका में ओबामा की छवि सुधरेगी। लेकिन अमेरिका में ही इस फैसले की निंदा हुई। बहुत से लोगों का कहना था कि ओबामा का प्रभाव पुरस्कार लायक नहीं था।

उस समय राष्ट्रपति ओबामा खुद भी पुरस्कार मिलने से हैरान थे। लूनेश्टा के मुताबिक, खुद ओबामा ने कहा था कि वो पुरस्कार मिलने से हैरान हैं। उनके कुछ समर्थकों ने भी सोचा था कि शायद कोई गलती हुई है। ओबामा ने यह भी सोचा था कि वो पुरस्कार लेने नॉर्वे की राजधानी ओस्लो ना जाएं।

उनके ऑफिस की ओर से सवाल किया गया था कि क्या बाकी विजेताओं ने भी कभी ऐसा किया है कि वे पुरस्कार लेने ना आए हों। लूनेश्टा के मुताबिक व्‍हाइट हाउस में लोगों को अहसास हो गया कि उन्हें ओस्लो जाना ही चाहिए।

लूनेश्टा 1990 से 2015 तक नोबेल कमेटी के सेक्रेटरी रहे लेकिन वो वोटिंग नहीं कर सकते थे। वहीं इन मेमोयर के जरिए उन्होंने इस समिति के गोपनीयता की परंपरा को तोड़ा है। इसके सदस्य समिति की कार्यवाही का ब्योरा बहुत कम देते हैं।

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Nobel Peace Prize for US President Barack Obama was a disappointment. Former Nobel secretary regrets Obama peace prize and he has asked Obama to return his Nobel.
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more