मानवाधिकार पर भी रूस के खिलाफ क्यों नहीं गया भारत? UNGA में भारत के फैसले से दुनिया हैरान!
भारत ने यूनाइटेड नेशंस में बूचा नरसंहार की कड़े शब्दों में निंदा की है और भारत ने कहा कि, ‘बुचा में नागरिक हत्याओं की हालिया रिपोर्टें बहुत परेशान करने वाली हैं।
नई दिल्ली, अप्रैल 08: यूक्रेन मुद्दे पर भारत लगातार अपने सख्त रूख पर कायम है और एक बार फिर से भारत ने यूनाइटेड नेशंस में बीच का रास्ता चुना है। भारत, सख्ती के साथ, अपने तटस्थ रुख पर कायम है और यूक्रेन के बूचा में नागरिकों की हत्याओं के बाद मानवाधिकार परिषद से रूस को निलंबित करने के लिए एक मसौदा प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में मतदान से फिर से दूर हो गया है। जिसके बाद पूरी दुनिया सवालिया निगाहों से भारत को देख रही है।

भारत रहा वोटिंग से गैरहाजिर
बूचा में भारी नरसंहार किया गया है और सैकड़ों लोगों की बेरहमी से हत्या की गई है। यूक्रेन और पश्चिमी देशों ने इसके लिए राष्ट्रपति पुतिन को 'युद्ध अपराधी' करार दिया है और उन्हें गिरफ्तार करने और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की है। जबकि. बूचा घटना के बाद रूस को यूएन के मानवाधिकार आयोग से बाहर निकालने की मांग उठी और फिर इसपर वोटिंग की गई। यूएनएचआरसी से रूस को सस्पेंड करने के पक्ष में 93 देशों ने वोट डाला और 24 देशों ने रूस को सस्पेंड करने के खिलाफ वोट डाला, जबकि, 58 देशों ने वोटिंग से दूरी बना ली, जिसमें भारत भी शामिल है। भारत ने वोटिंग से गैर- हाजिर रहने के पीछे अपनी वजहें बताई हैं।
भारत ने बताया...क्यों रहे गैरहाजिर?
यूनाइटेड नेशंस में भारत के स्थाई प्रतिनिधि टीएस तिरूमूर्ति ने कहा कि, "यूक्रेनी संघर्ष की शुरुआत के बाद से, भारत शांति, संवाद और कूटनीति के पक्ष में खड़ा रहा है। हम मानते हैं कि खून बहाकर और निर्दोष लोगों की जान की कीमत पर कोई समाधान नहीं निकाला जा सकता है। अगर भारत ने कोई पक्ष चुना है, तो वह पक्ष है शांति का और भारत का पक्ष हिंसा को तत्काल समाप्त करने के लिए है"। संयुक्त राष्ट्र में भारतीय दूत टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि, "हम बिगड़ती स्थिति पर गहराई से चिंतित हैं और सभी पक्षों से दुश्मनी को खत्म करने के लिए अपने आह्वान को दोहराते हैं। जब निर्दोष मानव जीवन दांव पर लगा हो, तो कूटनीति को एकमात्र व्यवहार्य विकल्प के रूप में प्रबल होना चाहिए।"

यूक्रेन पर भारत का तटस्थ रूख
भारत ने अब तक यूक्रेन में युद्ध पर तटस्थ रुख अपनाया है जो अपने दूसरे महीने में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही कह चुके हैं, कि भारत की जरूरतें रूस और यूक्रेन दोनों से जुड़ी हैं, लेकिन भारत शांति के पक्ष में है और उम्मीद करता है, कि बातचीत के जरिए सभी समस्याओं का समाधान हो जाएगा। जनवरी के बाद से, भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, महासभा और मानवाधिकार परिषद में प्रक्रियात्मक वोटों और मसौदा प्रस्तावों पर आठ मौकों पर भाग लिया है, जिसने यूक्रेन के खिलाफ रूसी आक्रमण की निंदा की थी, और भारत सभी निंदा प्रस्तावों से दूर ही रहा है। इस सप्ताह की शुरुआत में, भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपना अब तक का सबसे कड़ा बयान जारी किया था, जिसमें यूक्रेन के बूचा में आम नागरिकों की हत्याओं की निंदा की गई थी और एक स्वतंत्र जांच के आह्वान का समर्थन किया था।

यूएन में बूचा नरसंहार की निंदा
भारत ने यूनाइटेड नेशंस में बूचा नरसंहार की कड़े शब्दों में निंदा की है और भारत ने कहा कि, 'बुचा में नागरिक हत्याओं की हालिया रिपोर्टें बहुत परेशान करने वाली हैं। हमने इन हत्याओं की स्पष्ट रूप से निंदा की है और एक स्वतंत्र जांच के आह्वान का समर्थन किया हैं।" आपको बता दें कि, रूस से पहले यूनाइटेड नेशंस ह्यूमर रिसोर्स काउंसिल के इतिहास में अब तक सिर्फ एक ही देश को सस्पेंड किया गया है, जिसका नाम लीबिया है। लीबिया को साल 2011 में सस्पेंड किया गया था। सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों पर मुअम्मर अल-गद्दाफी की हिंसक कार्रवाई के खिलाफ यूएन महासभा ने लीबिया को सस्पेंड कर दिया था, जिसमें "लीबियाई अरब जमैहिरिया में मानवाधिकार की स्थिति के बारे में गहरी चिंता" व्यक्त की गई थी।

रूस पर और कसता शिकंजा
रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध आज युद्ध का 44वां दिन है संयुक्त राज्य अमेरिका ने रूस के सबसे बड़े बैंकों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बेटियों को लक्षित करने वाले नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बुधवार को फिर से पुतिन पर "बड़े युद्ध अपराध" करने का आरोप लगाया और जांच की मांग की। इस बीच, यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने रूस पर अंतरराष्ट्रीय जांच में हस्तक्षेप करने के लिए युद्ध अपराधों के सबूत छिपाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। यूक्रेन सरकार ने दोहराया कि रूसी सेना खार्किव, डोनेट्स्क और लुहान्स्क क्षेत्रों पर एक नए हमले की तैयारी कर रही है और निवासियों से तुरंत क्षेत्रों को छोड़ने का आग्रह किया। उप प्रधान मंत्री इरीना वीरेशचुक ने एक बयान में कहा, "अब यह आवश्यक है क्योंकि लोग आग की चपेट में आ जाएंगे और मौत का खतरा होगा। उन्होंने कहा यह अभी भी संभव है, जबकि खाली करना आवश्यक है।
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