अमेरिका के खिलाफ आग उगलने वाले चीनी मीडिया ने अचानक बदले तेवर, क्यों करने लगा प्यारी-प्यारी बातें?
Chinese Media on US: सालों से चीनी मीडिया ने संयुक्त राज्य अमेरिका को एक अमित्र राष्ट्र के रूप में चित्रित किया है और आरोप लगाया है, कि अमेरिका, विश्व मंच पर चीन को नियंत्रित और कमजोर करना चाहता है।
ताइवान को हथियार देने, यूक्रेन को सैन्य सहायता भेजने और गाजा पर इजरायल के युद्ध का समर्थन करने की वाशिंगटन की नीतियों के कारण चीनी मीडिया में अमेरिका को बार-बार विश्व शांति के लिए बड़ा खतरा बताया गया है।
इसलिए, जब चीनी मीडिया में अचानक "चीन-अमेरिका संबंधों को मजबूत करने" और "अमेरिकियों और चीनियों के बीच दोस्ती के बंधन" के बारे में लिखना और बोलना शुरू किया, तो पूरी दुनिया का माथा ठनका, कि आखिर चीनी माीडिया के अचानक बदले तेवर के पीछे क्या बात है?

चीनी मीडिया ने क्यों बदले तेवर?
सैन फ्रांसिस्को में APEC शिखर सम्मेलन में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 15 नवंबर को लंबे समय से प्रतीक्षित बैठक से पहले के हफ्तों में, चीनी मीडिया ने अपनी तीखी बयानबाजी को नरम करना शुरू कर दिया।
राज्य संचालित शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने उस चिट्ठी के बारे में बात की, जिसे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने एक अमेरिका के एक अनुभवी युद्धा को भेजा था, जिसने फ्लाइंग टाइगर्स उपनाम वाले अमेरिकी वायु सेना समूह में काम किया था और जिन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानियों के खिलाफ चीनी सेना के साथ लड़ाई लड़ी थी।
पत्र में, शी जिनपिंग ने चीन और अमेरिका के बीच संबंधों को संबोधित करते हुए, दोनों देशों के बीच बनी गहरी दोस्ती का उल्लेख किया, जो "खून और आग की परीक्षा में भी खरी उतरी है।"
वहीं, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी-नियंत्रित पीपुल्स डेली, जिसने इस साल की शुरुआत में अमेरिका को एक युद्धप्रिय देश कहा था, उसने उसी सप्ताह फ्लाइंग टाइगर्स की स्मृति में लेखों के एक कलेक्शन को बढ़ावा दिया, जब बाइडेन ने शी जिनपिंग से मुलाकात की थी।
1973 में फिलाडेल्फिया ऑर्केस्ट्रा की बीजिंग यात्रा की 50वीं वर्षगांठ भी फोकस का विषय बन गई, साथ ही 1985 में अपनी पहली यात्रा के साथ शुरू हुई शी जिनपिंग की अमेरिका की विभिन्न यात्राएं, जो उन्होंने आयोवा में बिताईं थीं, उसका भी जिक्र किया गया और चीनी मीडिया ने बताया, कि किस तरह से शी जिनपिंग ने इस दौरान अमेरिका-चीन दोस्ती को बढ़ावा देने का काम किया।
यहां तक की, अमेरिका के खिलाफ आग उगलने के लिए कुख्यात, कम्युनिस्ट पार्टी के भोंपू, सरकारी ग्लोबल टाइम्स, जिसने अक्टूबर में एक संपादकीय में अमेरिका के हाथ गाजा में "निर्दोष नागरिकों के खून से सना हुआ" बताया था, उसने बाइडेन-शी जिनपिंग की बैठक के दिन, बीजिंग और वाशिंगटन के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया। जबकि, ठीक दो महीने पहले ग्लोबल टाइम्स ने लिखा था, कि अमेरिका चीन पर अपने हमलों को "और भी ख़राब" कर रहा है।
जबकि, प्रोपेगेंडा फैलाने में माहिर चीन के राष्ट्रवादी टिप्पणीकारों ने भी मीडिया के नरम स्वर को ही फॉलो किया है।
टिप्पणीकार हू ज़िजिन, जिन्होंने एक बार लोकतांत्रिक रूप से शासित ताइवान द्वीप पर अमेरिकी सैनिकों को "खत्म" करने के लिए ताइवान पर चीनी हवाई हमलों का आह्वान किया था, उन्होंने हाल ही में एक ओपिनियन आर्टिकिल में चीन-अमेरिका सहयोग की आवश्यकता के बारे में लिखा है।
वहीं, एक और राष्ट्रवादी ब्लॉगर सिमा नान, जिन्होंने कभी अमेरिका को "सड़ा हुआ, अपराध-ग्रस्त स्थान" बताया था, उन्होंने अचानक दावा किया, कि वह "मैत्रीपूर्ण चीन-अमेरिकी संबंधों को बढ़ावा देने के लिए" प्रयास कर रहे हैं।
लिहाजा, सवाल ये उठ रहे हैं, कि वो क्या माहौल है, जो चीनी मीडिया बनाने की कोशिश कर रहा है, कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से क्या निर्देश मिला है, चीन, अचानक अमेरिका को क्यों पसंद करने लगा है, और चीन-अमेरिका के बीच क्या खिचड़ी पक रही है?
क्या खराब अर्थव्यवस्था से बदल गये हैं तेवर?
अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर में चीन में सार्वजनिक प्रशासन के विद्वान अल्फ्रेड वू ने कहा, कि यह राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अध्यक्षता वाली चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) है, जो चीनी मीडिया में क्या छपना है, इसरी दिशा तय करती है।
उन्होंने कहा, कि "हाल के वर्षों में चीन में मीडिया पर राज्य का नियंत्रण पूरी तरह से स्थापित हो गया है, लिहाजा उन मीडिया के लिए बहुत कम जगह बची है, जिसका सरकार से संबद्ध नहीं हैं।"
वहीं, एडवोकेसी ग्रुप रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के अनुसार, चीन 2023 के लिए विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में नीचे से दूसरे स्थान पर था, और अंतिम स्थान पर मौजूद उत्तर कोरिया से थोड़ा आगे था।
रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स ने कहा, "पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) पत्रकारों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी जेल है, और इसका शासन दुनिया भर में पत्रकारिता और सूचना के अधिकार के खिलाफ दमन का अभियान चलाता है।"
ताइवान में नेशनल सन यात-सेन यूनिवर्सिटी में चीनी सोशल मीडिया नीतियों के शोधकर्ता टाइटस चेन ने कहा, "इन दिनों यह वास्तव में मायने नहीं रखता, कि आप किस प्रकार के मीडिया हैं।" उन्होंने कहा, "यदि आप चीनी मीडिया बाजार में जीवित रहना चाहते हैं, तो आपको पार्टी लाइन का पालन करना होगा।"
चेन के अनुसार, कम्युनिस्ट पार्टी की नई लाइन स्पष्ट रूप से बाइडेन-शी जिनपिंग बैठक के लिए, चीन-अमेरिका संबंधों के अधिक सौहार्दपूर्ण तत्वों पर जोर देने की मांग करती है।
उन्होंने कहा, "मीडिया कवरेज में बदलाव द्विपक्षीय संबंधों में ज्यादा स्थिरता की नए सिरे से इच्छा के कारण है, खासकर चीन की मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए।"
चीन की आर्थिक वृद्धि को सरकारी लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए संघर्ष करना पड़ा है, जून में युवा बेरोजगारी 21.3 प्रतिशत तक पहुंच गई, जिसके बाद डेटा प्रकाशन पर रोक लगा दी गई। वहीं, चीन ने 2023 की जुलाई-सितंबर अवधि में अपना पहला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश घाटा दर्ज किया है।
चेन ने कहा, "चीन अपने प्रचार के माध्यम से अमेरिका और पश्चिम को यह संकेत भेजने की कोशिश कर रहा है, कि चीन इस उम्मीद के साथ कई मुद्दों पर सहयोग करने के लिए तैयार है, कि उसतक विदेशी निवेश पहुंचने में पश्चिम अड़ंगा ना लगाए।"
कब तक रहेगा चीन का नरम लहजा?
द एडवरटाइजिंग ग्रुप के त्सेंग के अनुसार, चीनी मीडिया ने बाइडेन-शी जिनपिंग बैठक में निराशाजनक आर्थिक स्थिति को एक कारक के रूप में चित्रित नहीं किया है।
दरअसल, ग्लोबल टाइम्स में चीन पर लगाए गए अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को चीनी चिप प्रौद्योगिकी में सफलताओं को बढ़ावा देने वाला बताया गया है।
लोगों से लोगों के बीच आदान-प्रदान के बारे में शी जिनपिंग के अक्सर बताए गए मंत्र और इस तरह के आदान-प्रदान के साथ-साथ वर्षों से अमेरिकी लोगों के साथ उनकी खुद की बातचीत को चीन के मीडिया में एक सफल APEC शिखर सम्मेलन के रूप में चित्रित किया गया है।
यह भी बताया गया है, कि बिजनेस लीडर्स के साथ APEC रात्रिभोज के दौरान शी जिनपिंग को कई स्टैंडिंग ओवेशन मिले और शी जिनपिंग द्वारा उल्लिखित सहयोग के बिंदुओं ने "चीन-अमेरिका संबंधों के भविष्य के लिए एक दृष्टिकोण" खोला है।
शिखर सम्मेलन के दो हफ्ते बीतने के बाद भी, पीपुल्स डेली ने शी जिनपिंग के लोगों से लोगों के संबंधों के समर्थन को अमेरिकियों और चीनी दोनों के लिए एक प्रेरणा के रूप में वर्णित किया है, जो "चीन-अमेरिका संबंधों के स्वस्थ विकास के लिए अधिक सकारात्मक ऊर्जा" उत्पन्न करेगा।
वू के मुताबिक, चीनी मीडिया के लिए शी जिनपिंग को APEC शिखर सम्मेलन का केंद्र बनाना जरूरी था।
उन्होंने कहा, "अंतर्निहित संदेश यह है, कि शी जिनपिंग एक बहुत ही सक्षम राजनेता हैं [जो] अमेरिका के साथ बातचीत कर सकते हैं और चीन को बेहतर जगह पर ले जा सकते हैं।"
त्सेंग ने कहा, "मुझे लगता है कि माहौल जल्द ही फिर से अमित्र हो सकता है। और मुझे अभी भी पिछले हफ्तों में चीनी मीडिया पर अमेरिका विरोधी सामग्री मिली है, इसलिए यह कभी भी पूरी तरह से गायब नहीं हुई।"
यानि, चीन एक तरफ नरम स्वर अपनाएगा, लेकिन अमेरिका के खिलाफ आग भी उगलना जारी रखेगा, जिसका मकसद अलग अलग संदेश भेजना है।












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