Explainer: बेंजामिन नेतन्याहू ने क्यों किया बाइडेन की युद्धविराम की अपील को खारिज? इजराइल की जिद की वजह समझिए
Israel-Hamas War: संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल में इस बात को लेकर ठन गई है, कि गाजा पट्टी में युद्ध को कैसे चलाया जाना चाहिए और आखिरकार हमास पर जीत को किस तरह से परिभाषित करना चाहिए। दोनों ही देशों के नेताओं के लिए स्थितियां अलग अलग हैं। बाइडेन को अगले साल राष्ट्रपति चुनाव लड़ना है, तो बेंजामिन नेतन्याहू किसी भी तरह से कमजोर दिखना नहीं चाहते हैं, लिहाजा दोनों के अपने अलग अलग लक्ष्य हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, जो अगले साल नवंबर में एक गर्मागर्म मुकाबले वाले चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप से फिर से भिड़ने वाले हैं, उनके लिए अमेरिका के मुस्लिमों का वोट हासिल करना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है, लिहाजा बाइडेन घरेलू मोर्चे पर स्थिति को नियंत्रित करना चाहते हैं और फिलिस्तीनी नागरिकों की सुरक्षा के लिए चिंता को भी संतुलित करना चाहते हैं, लिहाजा अब मौजूदा स्थिति ये है, कि ये मुकाबला बाइडेन बनाम बेंजामिन नेतन्याहू हो चला है।

बाइडेन बनाम बेंजामिन नेतन्याहू
7 अक्टूबर को हमास के क्रूर आक्रमण के बाद यहूदियों की रक्षा करने में नाकाम रहने के कारण आलोचना झेल रहे इजरायली प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू प्रतिशोध, पूर्ण जीत की प्यास और हमास के कब्जे वाले बंधकों को बचाने की जनता की मांगों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
लिहाजा, अब तक, नेतन्याहू की ये इच्छाएं बाइडेन की प्राथमिकताओं पर भारी पड़ रही हैं। इजरायली नेता, हमास को कुचलने और अपनी प्रतिष्ठा को बचाने के नाम पर अपने करीबी सहयोगी से सार्वजनिक रूप से अपनी स्वतंत्रता का प्रदर्शन करने का हर अवसर ले रहे हैं।
उदाहरण के लिए, नागरिक हताहतों से बचते हुए हमास का सफाया करने के बीच के संबंध को लें। बाइडेन ने गाजा पर इजरायल की बमबारी को "अंधाधुंध" कहा है और नेतन्याहू को अमेरिकी चिंताओं का अहसास कराने के लिए अभी तक तीन बार अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन को तेल अवीव भेजा है।
30 नवंबर को, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने नेतन्याहू से "बड़े पैमाने पर" नागरिक हताहतों से बचने के लिए कहा था। जबकि, पिछले हफ्ते, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने घोषणा की थी, कि गाजा पर इज़राइल का हमला एक ऐसे चरण में प्रवेश करेगा, जो "लक्ष्यीकरण पर अधिक सटीक तरीकों से केंद्रित है" और "हमास को प्रभावित करने वाले लक्ष्यों और उन लक्ष्यों के बीच अंतर करेगा, जो निर्दोष नागरिकों की जान ले सकते हैं।"
सुलिवन ने कहा, कि वह "कोई समय सीमा तय नहीं कर रहे हैं और हम समझते हैं कि अभियान जारी रहना चाहिए और जारी रहेगा, लेकिन कम तीव्रता के तरीके से।"
हालांकि, इन चिंताओं के बाद भी अमेरिका ने तय किया है, कि वो इजराइल को हथियारों की सप्लाई जारी रखेगा।
इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू का कहना है, कि इज़राइल, गाजा पट्टी के नागरिकों को निशाना नहीं बनाता है, लेकिन हमास उन्हें "मानव ढाल" के रूप में इस्तेमाल कर रहा और नागरिकों की मौत के लिए हमास जिम्मेदार है। इसके साथ ही, उन्होंने इज़राइल के आक्रमण की तीव्रता को कम करने के अमेरिका के एनएसए सुलिवन के आह्वान को खुले तौर पर खारिज कर दिया।
संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के मुताबिक, पिछले तीन हफ्तों के दौरान, इजरायली हवाई बमबारी और तोपखाने गोलाबारी में वृद्धि हुई है। फिलीस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी यूएनआरडब्ल्यूए के निदेशक फिलिप लेज़ारिनी ने कहा, गाजा "पृथ्वी पर नर्क" बन गया है। उन्होंने कहा कि गाजा पट्टी में खाद्य आपूर्ति की कमी के कारण भुखमरी पैदा हो रही है।

इजराइल कर रहा बाइडेन का अपमान?
बाइडेन, जिनकी कोशिश ये है, कि गाजा पट्टी में शांति स्थापित करने के लिए फिलीस्तीनी प्राधिकरण को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिले, उन्होंने इजराइल से कई बार कहा है, कि हमास के खात्म के बाद वो गाजा पट्टी पर कब्जा ना करे।
हालांकि, बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा है, कि इजराइल गाजा पर कब्जा और शासन नहीं करना चाहता, लेकिन नेतन्याहू युद्ध के खत्म होने के बाद हमास और फिलीस्तीनी प्राधिकरण, दोनों में से किसी के हाथों में गाजा को नहीं सौंपना चाहते हैं।
जिसका नतीजा ये है, कि इजराइल के साथ शांति रखने वाले पड़ोसी देशों मिस्र और जॉर्डन ने इस विचार को खारिज कर दिया है। इज़रायली सरकार के अधिकारियों ने यह भी सुझाव दिया है, कि प्रत्येक यूरोपीय संघ देश 10,000 फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों को ले। लेकिन, किसी ने भी इस विचार का समर्थन नहीं किया है।

दशकों पुराने इज़राइल-फिलिस्तीनी संघर्ष को हल करने के लिए, बाइडेन और उनके यूरोपीय सहयोगियों ने भी तथाकथित "दो-राज्य समाधान" को पुनर्जीवित करने का आह्वान किया है, जिसमें एक फिलिस्तीनी राज्य में फिलीस्तीनी प्राधिकरण शासन करे, जिसमें गाजा और वेस्ट बैंक दोनों शामिल होंगे।
यानि, मौजूदा हालात ये हैं, कि बाइडेन और बेंजामिन नेतन्याहू दोनों आमने-सामने हैं और फिलहाल इस युद्ध का अंत नहीं दिख रहा है।












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