Iran Weapon Sources: आखिर कहां से आ रहे ईरान के पास घातक हथियार? अमेरिका से लड़ाई कौन दे रहा साथ
Iran Weapon Sources: इजराइल और अमेरिका के 'लियोन्स रोर' (Lion's Roar) ऑपरेशन के जवाब में ईरान ने भीषण पलटवार करते हुए इजराइल सहित खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर करीब 400 मिसाइलें दाग दी हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि यह हमला उन सभी ठिकानों पर है जहां से अमेरिका और इजराइल अपनी सैन्य गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।
लेकिन यह जानना जरूरी है कि वर्षों से कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का सामना कर रहा ईरान आज सैन्य शक्ति के मामले में दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस विशेष रिपोर्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि आखिर ईरान दुनिया की सबसे ताकतवर सेनाओं से लोहा लेने के लिए अत्याधुनिक हथियार और तकनीक कहां से लाता है।

रूस: इजराइल की वायुशक्ति के खिलाफ अभेद्य दीवार
ईरान अपनी हवाई सीमाओं की सुरक्षा के लिए सबसे ज्यादा रूस पर निर्भर है। हाल के घटनाक्रमों में ईरान ने रूस से S-300 और S-400 जैसे घातक एयर डिफेंस सिस्टम हासिल करने के लिए बड़े समझौते किए हैं। इसके अलावा, ईरान ने अपनी वायुसेना को आधुनिक बनाने के लिए रूस से Sukhoi Su-35 लड़ाकू विमानों की खरीद शुरू की है। रूस से मिलने वाली यह तकनीक ईरान को अमेरिकी और इजराइल के स्टील्थ विमानों को ट्रैक करने और उन्हें मार गिराने की ताकत प्रदान करती है।
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चीन: मिसाइल तकनीक और एंटी-शिप हथियार
चीन और ईरान के बीच गहरा रक्षा संबंध है। ईरान ने हाल ही में चीन के साथ CM-302 जैसी सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइलों का सौदा किया है, जो समुद्र में अमेरिकी और इजराइल के युद्धपोतों के लिए बड़ा खतरा हैं। चीन न केवल ईरान को तैयार हथियार देता है, बल्कि मिसाइल बनाने के लिए जरूरी कलपुर्जे भी सप्लाई करता है। दोनों देशों के बीच हुआ रणनीतिक समझौता ईरान को सैन्य और तकनीकी रूप से चीन के बेहद करीब ले आया है।
उत्तर कोरिया: बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम का साथी
ईरान के मिसाइल कार्यक्रम की जड़ें उत्तर कोरिया से जुड़ी मानी जाती हैं। शुरुआती दिनों में ईरान ने उत्तर कोरिया से 'नोडोंग' मिसाइलें खरीदी थीं, जिनके आधार पर ईरान ने अपनी 'शहाब' मिसाइल सीरीज तैयार की। आज भी दोनों देश मिसाइल तकनीक साझा करते हैं। उत्तर कोरियाई तकनीक की मदद से ही ईरान ने अपनी मिसाइलों की मारक क्षमता को 2000 किलोमीटर से ज्यादा बढ़ाया है, जिससे पूरे मध्य पूर्व में इजराइल और अमेरिकी बेस उसकी सीधी जद में आ गए हैं।
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स्वदेशी ताकत: खुद के हथियारों का 'हब' बना ईरान
बाहरी खरीद के अलावा, ईरान ने रिवर्स-इंजीनियरिंग के जरिए खुद का एक विशाल रक्षा उद्योग खड़ा कर लिया है। वह अब खुद ही फत्ताह (Fattah) जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें और शाहद (Shahed) ड्रोन का निर्माण कर रहा है। ईरान का दावा है कि उसके ड्रोन इतने प्रभावी हैं कि अब रूस जैसा शक्तिशाली देश भी उनसे हथियार खरीद रहा है। यह आत्मनिर्भरता ईरान को इजराइल के खिलाफ लंबे समय तक युद्ध लड़ने की क्षमता प्रदान करती है।
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