Israel Iran War Impact on India: इजरायल-ईरान जंग में झुलसेगी आपकी जेब! पेट्रोल-डीजल की कीमतों में होगा विस्फोट
US Israel Iran War Impact on India: इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। शनिवार को इजरायल की तरफ से ईरान पर किए गए हमले के बाद अब भारतीय बाजार (Indian market) और आपकी जेब पर इसका सीधा असर पड़ने के आसार हैं। एक्सपर्ट का कहना है कि इस जंग की वजह से आने वाले दिनों में मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। आइए जानतें हैं रिपोर्ट में किन-किन बड़ी परेशानियों की ओर इशारा किया है।
वेल्थमिल सिक्योरिटीज के एक्सपर्ट क्रांति बाथिनी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि भारत के लिए कच्चा तेल इस समय सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने इसे 'जोकर' (Joker in the pack) कहा है, जिसका मतलब है कि तेल की कीमतें कभी भी खेल बिगाड़ सकती हैं। बाथिनी के अनुसार, अगर कच्चा तेल 80 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर चला गया, तो भारतीय मार्केट और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाएगी।

पेट्रोल-डीजल पर सीधा असर
एनरिच मनी के सीईओ पोन्मुडी आर ने मनी कंट्रोल से बातचीत में बताया कि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल दूसरे देशों से खरीदता है। अगर युद्ध की वजह से सप्लाई रुकती है, तो तेल की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल महंगा होने से न केवल पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ेंगे, बल्कि महंगाई भी बढ़ेगी क्योंकि सामान ढोना महंगा हो जाएगा।
किन सेक्टर्स पर पड़ेगा बुरा असर?
रिपोर्ट में बताया गया है कि पेंट बनाने वाली कंपनियां, हवाई जहाज कंपनियां (Aviation) और गाड़ियां बनाने वाली कंपनियों के लिए आने वाला समय मुश्किल भरा हो सकता है। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से इन कंपनियों का खर्चा बढ़ जाएगा। हालांकि, इस दौरान सोने की कीमतों में तेजी आने की संभावना है। ट्रेडबुल्स सिक्योरिटीज के भविक पटेल ने बताया कि अगर ईरान के तेल ठिकानों को नुकसान पहुंचता है, तो पूरी दुनिया में तेल की कमी हो जाएगी।
भारत के लिए एक राहत की बात ये भी है कि इंडिया का ईरान के बीच बाइलेटरल ट्रेड बहुत ज़्यादा नहीं है, और ज़्यादातर ड्रग्स और फलों तक ही लिमिटेड है, इसलिए मौजूदा तनाव से दोनों देशों के बीच कॉमर्स पर ज़्यादा असर नहीं पड़ सकता है।
US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कन्फर्म किया कि यूनाइटेड स्टेट्स ने ईरान के खिलाफ एक मिलिट्री कैंपेन शुरू किया है, उन्होंने इस ऑपरेशन को "बहुत बड़ा और लगातार चलने वाला" बताया और इसका मकसद ईरानी सरकार से आने वाले खतरों को बेअसर करना बताया।
भारत-ईरान और इजरायल के बीच व्यापार का पूरा गणित
इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का भारत के व्यापार पर मिला-जुला असर पड़ने की संभावना है। भारत और ईरान के बीच अब व्यापार बहुत अधिक नहीं रह गया है, इसलिए मौजूदा तनाव का सीधा असर हमारे कॉमर्स (Commerce) पर शायद बहुत ज्यादा न पड़े। साल 2024-25 में भारत और ईरान का द्विपक्षीय व्यापार (Bilateral Trade) घटकर महज 1.68 अरब डॉलर रह गया है, जो 2018-19 में 17.03 अरब डॉलर हुआ करता था।
ईरान से क्यों घटा व्यापार?
इस भारी गिरावट का सबसे बड़ा कारण अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध (Sanctions) हैं, जिसकी वजह से पिछले पांच सालों में भारत ने ईरान से कच्चे तेल का आयात लगभग बंद कर दिया है। वर्तमान में भारत ईरान को मुख्य रूप से बासमती चावल, चाय, चीनी, ताजे फल और दवाइयां भेजता है, जबकि वहां से सेब, पिस्ता और खजूर जैसी चीजें आती हैं।
इजरायल के साथ बढ़ती रणनीतिक दोस्ती
ईरान के उलट, इजरायल के साथ भारत का व्यापार पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष रूप से रक्षा (Defense) और हाई-टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हमारा एक्सपोर्ट 21% बढ़ा है। इजरायल से हथियारों और गोला-बारूद का आयात 100 गुना तक बढ़ गया है, जो साल 2013 के 10 लाख डॉलर से बढ़कर 2024 में 10.4 करोड़ डॉलर पर पहुंच गया है।
क्या है भारत के लिए सबसे बड़ा रेड अलर्ट?
व्यापार से कहीं ज्यादा बड़ा खतरा भारत की तेल सप्लाई को लेकर है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध की वजह से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का रास्ता बंद होता है, तो भारत के कुल मासिक तेल आयात का 50% हिस्सा प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा लाल सागर (Red Sea) के रास्ते में बाधा आने से माल ढुलाई और बीमा का खर्च बढ़ जाएगा, जिससे विदेशों में सामान बेचना महंगा हो जाएगा और भारत का आयात बिल भी बढ़ जाएगा।












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