"जब हमने अमेरिका में भारत का स्वतंत्रता दिवस मनाया"
कई साल पहले की बात है। उस समय मैं सियैटल में रहता था। सियैटल तब भी उतना ही खूबसूरत था जितना कि आज है। भारतीय स्वतंत्रता दिवस आने वाला था। मेरी कम्पनी में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग काम करते थे।
एक दिन भोजनावकाश के समय स्वतंत्रता दिवस को लेकर चर्चा हुई तो यह विचार बना कि क्यों न पन्द्रह अगस्त को दोपहर में बारह बजे हम लोग कंपनी परिसर के बाहर चुपचाप एकत्रित हों तथा राष्ट्रगान गा कर वापस अपने अपने स्थान पर आ जाएँ।

इस बात की बाबत सूचना भारतीयों के ईमेल समूह में प्रेषित कर दी गई। मैंने सोचा था कि संभवतः पन्द्रह बीस लोग वहाँ एकत्रित हो जाएँगे। पन्द्रह अगस्त आया और समय से पाँच मिनट पहले जब मैं नियत जगह पर पहुँचा तो वहाँ कोई नहीं दिखाई दिया। मैंने सोचा कि यदि कोई न आया तो मैं अकेले ही राष्ट्रगान गा कर वापस चला जाऊँगा।
मैंने मन ही मन खुद को सावधान में खड़े होने की आज्ञा दी, तभी वहाँ दो लोग आए, फिर चार और बारह बजे तक एक साथ सैकड़ों कंठों से जन गण मन गूंज कर व्योम को आलोकित करने लगा। राष्ट्रगान गाते गाते मुझे आभास हुआ कि मेरा कंठ रुंध रहा है और मेरी आँखों गा रही हैं, शब्द मौन हो चुके थे और भावनाओं का आवेग बह रहा था। भारत से हज़ारों मील दूर, सैंकड़ों अपरिचित लोग, भारत को और असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों को अपने प्रणाम निवेदित कर रहे थे।
एक दूसरे को भारतीय स्वतंत्रता की बधाई दे रहे थे। अनेक आँखें नम थीं। राष्ट्रगान के बाद 'वन्दे मातरम्' और 'भारत माता की जय' के घोष के साथ सब वापस अपनी अपनी राह पर चले गए। सबके जाने के बाद भी मैं वहीं रुका रहा और राष्ट्रगान से उत्पन्न सकारात्मक ऊर्जा में सराबोर होता हुआ स्वयं को भारत माता की गोद में महसूस करता रहा।
सभी को भारतीय स्वतंत्रता दिवस की अनंत और अग्रिम शुभकामनाएँ।
(लेखक हिंदी के उदीयमान कवि हैं और संप्रति अमेरिका में बतौर सॉफ्टवेयर इंजिनियर कार्यरत हैं)












Click it and Unblock the Notifications