उत्तर कोरिया पर बड़ा खतरा? क्या है US-दक्षिण कोरिया का वॉशिंगटन डिक्लेरेशन, जिससे कांप रहे किम जोंग

उत्तर कोरिया ने पिछले साल दावा किया था, कि उसने अमेरिका तक मार करने वाली मिसाइल विकसित कर ली है, जिसके बाद ही अमेरिका ने दक्षिण कोरिया के साथ ये समझौता किया है।

Washington Declaration

Washington Declaration: यदि उत्तर कोरिया संयुक्त राज्य अमेरिका या उसके सहयोगी दक्षिण कोरिया के खिलाफ अपने परमाणु हथियारों का उपयोग करता है, तो यह किम जोंग उन के शासन का "अंत" होगा। ये घोषणा की गई है अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच हुए वॉशिंगटन डिक्लेरेशन में।

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक-योल अमेरिका की छह दिवसीय राजकीय यात्रा पर हैं, जहां उन्होंने और उनके समकक्ष जो बाइडेन ने परमाणु-सशस्त्र उत्तर कोरिया के सामने दक्षिण कोरिया के लिए अमेरिकी सुरक्षा कवच को मजबूत करने पर चर्चा की।

लेकिन कठोर दिखने वाला बयान कितना महत्वपूर्ण है? और किम जोंग उन के गले की हड्डी ये डील कैसे बन गई है, आइये समझते हैं।

वाशिंगटन घोषणा क्या है?

वॉशिंगटन डिक्लेरेशन अमेरिका और दक्षिण कोरिए के नए कदमों का एक सेट है, जो यूएस-दक्षिण कोरियाई सैन्य सहयोग और सूचना साझा करने को बढ़ावा देता है।

इस घोषणा में दक्षिण कोरिया को अमेरिकी परमाणु हथियारों का सहारा दिया गया है, जिसके तहत अगर उत्तर कोरिया परमाणु हथियार का इस्तेमाल करता है, तो दक्षिण कोरिया भी ऐसा कर पाएगा।

इस घोषणा पत्र के तहत दक्षिण कोरिया में अमेरिकी परमाणु-सशस्त्र बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) की नियमित तैनाती शामिल है।

हालांकि, दक्षिण कोरिया में अमेरिकी परमाणु हथियारों को तैनात करने की कोई योजना नहीं है, और कुछ विश्लेषकों को घोषणा के व्यावहारिक मूल्य पर संदेह है।

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वॉशिंगटन डिक्लेरेशन कितना महत्वपूर्ण है?

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति यून सुक-योल की अमेरिका की राजकीय यात्रा निश्चित तौर पर काफी महत्वपूर्ण है और इससे दोनों देशों के बीच के संबंध और मजबूत होंगे।

सियोल में इवा विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर लीफ-एरिक इस्ले, एएफपी को बताया, कि इस यात्रा के तहत दोनों देशों के बीच पूर्ण प्रदर्शन पर सुरक्षा, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

उत्तर कोरिया के एक के बाद एक बैलिस्टिक मिसाइलों की प्रक्षेपण के बीच दोनों देशों के बीच परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियों को लेकर हुए इस समझौते से 'घबराई हुई दक्षिण कोरिया की जनता' को जरूर राहत मिलेगी।

हालांकि, विश्लेषकों का कहना है, कि एक बड़ी समस्या को लेकर समझौता नहीं, बल्कि अमेरिकी राजनीतिक लेन है।

इस समझौते के तहत परमाणु हथियार चलाने की आजादी दक्षिण कोरिया के पास नहीं होगी, बल्कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल का अधिकार अमेरिका के पास होगा।

शिकागो काउंसिल ऑन ग्लोबल अफेयर्स में कार्ल फ्रेडहॉफ ने एएफपी को बताया, कि इस समझौते के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सत्ता में संभावित वापसी को लेकर सियोल में 'बेहद गंभीर चर्चा' शुरू हो सकती है।

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दक्षिण कोरिया की चिंता क्या है?

दक्षिण कोरिया के लिए अमेरिका की "विस्तारित निवारक" सुरक्षा एक साधारण धारणा पर टिकी हुई है, कि यदि उत्तर कोरिया दक्षिण कोरिया के खिलाफ परमाणु हथियारों का उपयोग करता है तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा।

2006 में प्योंगयांग द्वारा पहली बार परमाणु बम का परीक्षण करने के बाद के वर्षों तक, उत्तर कोरिया निश्चित तौर पर दक्षिण कोरिया के लिए एक विश्वसनीय खतरा था। उत्तर कोरिया के पास अपेक्षाकृत कम बम थे और उत्तर कोरिया के पास ज्यादा दूरी तक अपने बमों को भेजने की क्षमता नहीं थी।

लेकिन, अब उत्तर कोरिया का शस्त्रागार बढ़ गया है, और अब उसके पास अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) हैं जो अमेरिकी शहरों तक पहुंच सकती हैं, जिससे दक्षिण कोरिया की रक्षा करने की लागत संभावित रूप से कहीं अधिक हो गई है।

दक्षिण कोरिया की एक बड़ी आबादी का अब मानना है, कि अमेरिका पर पूरी तरह से विश्वास नहीं करके, दक्षिण कोरिया को अब खुद परमाणु हथियारों का निर्माण करना चाहिए। और अमेरिका ने इसी कोशिश को खत्म करने के लिए ये समझौता किया है।

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उत्तर कोरिया अब क्या करेगा?

विशेषज्ञों का कहना है, कि इसके स्व-घोषित कट्टर दुश्मनों, वाशिंगटन और सियोल के बीच नजदीकी सहयोग, किम जोंग उन के शासन के लिए चिंता का विषय है और इसे प्रदर्शित करने के लिए अब वो और ज्यादा मिसाइल लॉन्च कर सकते हैं।

अमेरिका ने कहा है, कि अगर उत्तर कोरिया परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करता है, तो किम जोंग उन के शासन का अंत होगा, लिहाजा किम जोंग का प्रशासन अब और भी ज्यादा आक्रामक हो सकता है।

हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि घबराने की बात उत्तर कोरिया के लिए भी है। क्योंकि उसे अपने परमाणु हथियारों के लिए करोड़ों डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था काफी खराब हुई है, लेकिन दक्षिण कोरिया के पास अमेरिकी परमाणु हथियार होंगे, लिहाजा अब उसके हाथ में डराने के लिए कुछ भी नहीं होगा।

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