हिंद महासागर में भारत ने 'हिन्दुओं के दूसरे घर' में बनाया सैन्य अड्डा.. मालदीव 'हारकर' भी क्यों नहीं है अफसोस?
India-Mauritius airstrip military significance: पिछले हफ्ते भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनौथ ने संयुक्त रूप से अगालेगा द्वीप पर बने एक हवाई पट्टी और एक जेटी का उद्घाटन किया है, जिसका निर्माण भारत सरकार ने किया है।
ये अगालेगा द्वीप हिंद महासागर में रणीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण जगह पर स्थित है और खासकर भारत के लिए ये और भी ज्यादा महत्वपूर्ण इसलिए हो गया है, क्योंकि मालदीव अब चीन की गोदी में जाकर बैठ गया है और चीनी जासूसी जहाजों ने अब मालदीव में डॉक करना शुरू कर दिया है।

हिंद महासागर में कहा हैं अगालेगा द्वीप?
अगालेगा द्वीप मॉरीशस का है और इसके दो क्षेत्र हैं, मुख्य उत्तरी द्वीप और छोटा दक्षिणी द्वीप, जो मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुइस से करीब 1100 किलोमीटर उत्तर में और मालदीव की राजधानी माले से 2,500 किमी दक्षिण पश्चिम में स्थित है।
पिछले कुछ वर्षों में, लगातार दावे किए गये हैं, कि हिंद महासागर में अगालेगा को भारत एक सैन्य अड्डे के रूप में विकसित कर रहा है, लेकिन मॉरीशस के प्रधान मंत्री प्रविंद जुगनाथ ने इन दावों का जोरदार खंडन किया है और उन्होंने साफ शब्दों में कहा है, कि 'कुछ बीमार मानसिकता वाले भारत के खिलाफ अभियान चला रहे हैं।'
यहां आपके लिए जानना ये भी जरूरी है, कि मालदीव की तरह मॉरीशस में भी भारत विरोधी अभियान चलाने की कोशिश की गई है, लेकिन ऐसा अभियान मॉरीशस में नाकाम रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह मॉरीशस में हिन्दुओं की आबादी है। मॉरीशस में हिन्दुओं की आबादी करीब 48.4 प्रतिशत है, लिहाजा भारत के खिलाफ चल रहे अभियान को कुचलने में प्रविंद जुगनौथ को कोई मुश्किल नहीं हुई।
जबकि, मालदीव में सौ फीसदी मुस्लिम रहते हैं, लिहाजा भारत विरोधी अभियान चलाने वाले मोहम्मद मुइज्जू को ज्यादा मुश्किलों का सामना नहीं करना पड़ा।
भारत ने कहा है, कि मॉरीशस उसकी 'नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी' का एक प्रमुख भागीदार और भारत के प्रमुख 'सागर' प्रोजेक्ट का प्रमुख हिस्सा है। भारत और मॉरीशस के बीच एक विशेष भागीदारी है, और दोनों देशों के बीच एक जीवंत, मजबूत और अद्वितीय रिश्ता भी है।

अगालेगा हवाई पट्टी का भारत के लिए क्या रणनीतिक महत्व है?
अगालेगा द्वीप में भारत ने एडवांस हवाई पट्टी और जेटी का निर्माण किया है, जो भारत की प्रपुख रणनीतिक परियोजनाएं हैं, जो हिंद महासागर में भारत की पहुंच का विस्तार करने और अफ्रीका के पूर्वी तट तक फैले समुद्र में निगरानी बढ़ाने में मदद कर सकती हैं।
चीन चूंकी हिंद महासागर में घुस चुका है और मालदीव उसके कंट्रोल में आ चुका है, लिहाजा अगालेगा द्वीप भारत को रणनीतिक बढ़त प्रदान तकती है।
उत्तरी अगालेगा द्वीप पर मौजूदा हवाई पट्टी, भारतीय नौसेना के डोर्नियर विमान संचालन के लिए पहले से ही परफेक्ट रहा है, लेकिन अब एडवांस हवाई पट्टी, भारतीय नौसेना को बड़े P8I समुद्री टोही विमान को भी संचालित करने की अनुमति देगी। द्वीप पर विमान उतारने के लिए अतिरिक्त बुनियादी ढांचे के निर्माण की आवश्यकता होगी, जिसके बाद ये एक पूर्ण नौसैनिक अड्डा बन जाएगा।
अगालेगा द्वीप से ऑपरेशन शुरू करते हुए, भारतीय नौसेना के लंबी दूरी के विमान पश्चिमी और दक्षिणी हिंद महासागर और अफ्रीका के पूर्वी और दक्षिणी तट पर नजर रखने में सक्षम होंगे, जिससे क्षेत्र में भारत की समुद्री डोमेन सर्विलास और इसकी क्षमता में काफी सुधार होगा। और इंडियन नेवी के लिए समुद्री अभियानों को अंजाम देना काफी आसान हो जाएगा।
अमेरिकी सैन्य अड्डों से कनेक्ट हो पाएगा भारत
लाल सागर क्षेत्र में तनाव के बाद, कई वाणिज्यिक जहाजों ने अब केप ऑफ गुड होप की ओर से फिर से गुजरना शुरू कर दिया है और लाल सागर रूट को छोड़ा जा रहा है, जिससे हिंद महासागर क्षेत्र में पारगमन और शिपिंग यातायात में वृद्धि हुई है।
हालांकि, मॉरीशस के प्रधानमंत्री जुगनॉथ ने अगालेगा में भारतीय सैन्य अड्डे के संभावित विकास के बारे में रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, लेकिन इस क्षेत्र में सैन्य उपस्थिति बनाए रखने वाले देशों का कॉन्सेप्ट नया नहीं है। अगालेगा अड्डे से भारत और अमेरिका के बीच का कॉर्डिनेशन और भी ज्यादा मजबूत हो जाएगा।
संयुक्त राज्य अमेरिका की नौसेना का डिएगो गार्सिया में एक प्रमुख सैन्य अड्डा है, जो 58-द्वीप चागोस द्वीपसमूह का सबसे बड़ा द्वीप है, जो मध्य हिंद महासागर में भूमध्य रेखा के ठीक दक्षिण में स्थित है। और 2017 में, चीन ने पूर्वी अफ्रीकी देश जिबूती में अपना पहला विदेशी नौसैनिक अड्डा खोला, जिसने चीन को रणनीतिक रूप से अदन की खाड़ी के मुहाने पर पहुंचा दिया है। लिहाजा, आने वाले वक्त में हिंद महासागर में गतिविधियां काफी तेज होने वाली है और भारत कोई भी चूक करने के मूड में नहीं है।

भारत के मॉरीशस के साथ क्या सैन्य संबंध हैं?
भारत और मॉरीशस ने समुद्री सुरक्षा और अन्य पहलुओं पर घनिष्ठ सहयोग किया है। भारतीय रक्षा अधिकारियों को मॉरीशस रक्षा बलों में प्रतिनियुक्त किया जाता है। विदेश मंत्रालय के एक दस्तावेज़ में उल्लेख किया गया है, कि भारतीय नौसेना का एक बड़ा अधिकारी, मॉरीशस नेशनल कोस्ट गार्ड का प्रमुख होता है, जबकि, भारतीय वायु सेना का एक अधिकारी, मॉरीशस के पुलिस हेलीकॉप्टर स्क्वाड्रन की कमान संभालता है, वहीं भारतीय नौसेना का एक अधिकारी, मॉरीशस हाइड्रोग्राफी सेवाओं का प्रमुख होता है।
भारतीय रक्षा बलों के करीब 20 से ज्यादा अधिकारी, मॉरीशस में प्रतिनियुक्ति पर हैं, यानि मॉरीशस की सेना के अलग अलग विभागों को संभाल रहे हैं। भारत ने मॉरीशस में सेवारत सात हेलीकॉप्टरों में से छह के अलावा पांच जहाजों, तीन विमानों और 10 फास्ट इंटरसेप्टर नौकाओं की आपूर्ति की है और एक तटीय निगरानी रडार प्रणाली स्थापित करने में मदद की है।
फरवरी 2021 में, भारत ने रक्षा उत्पादों की खरीद के लिए मॉरीशस को 100 मिलियन डॉलर की ऋण सुविधा दी थी।
हिंद महासागर में कहां कहां है भारतीय सेना की मौजूदगी?
भारतीय नौसेना इसी हफ्ते लक्षद्वीप के मिनिकॉय द्वीप पर अपने सैन्य अड्डे का उद्घाटन करने जा रही है, जिसे INS जटायु नाम दिया गया है। भारत का ये सैन्य अड्डा, मालदीव से सिर्फ 500 किलोमीटर की दूरी पर होगा और अरब सागर में ये अड्डा उस जगह मौजूद है, जहां से मालवीद नाक की लाइन में स्थित है।
कावारत्ती में आईएनएस द्वीपरक्षक के बाद आईएनएस जटायु, लक्षद्वीप में भारत का दूसरा नौसेना बेस होगा।
मॉरीशस के अलावा, भारत हाल के वर्षों में सेशेल्स और मेडागास्कर सहित अफ्रीकी देशों के साथ अपने राजनयिक और सैन्य संबंधों को बढ़ाने के लिए काम कर रहा है।
भारत के मालदीव के साथ भी कई दशकों से सैन्य संबंध रहे हैं, लेकिन द्वीपों में राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव से संबंध प्रभावित हुए हैं। राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की वर्तमान सरकार, जो पिछले साल "इंडिया आउट" के नारे पर सत्ता में आई थी, का झुकाव स्पष्ट रूप से चीन की ओर है। लिहाजा, मॉरीशस में बना भारत का एयरस्ट्रिप, चीन की नाक में दम करने वाला है और भारत को रणनीतिक तौर पर बड़ी बढ़त देता है।
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