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HM 313 क्या है, जो बन सकता है कश्मीर में नया खतरा? ऑपरेशन सिंदूर के बाद Pakistan की डरावनी साजिश का खुलासा!

What Is HM 313: ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंक के 9 बड़े ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया, लेकिन ये कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। अब खुलासा हुआ है कि हिजबुल मुजाहिदीन (HuM) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे खूंखार आतंकी संगठन अपने पांव खैबर पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkhwa-KPK) में गहराई तक जमा रहे हैं।

खासकर हिजबुल का नया ठिकाना कैंप 313 डरावनी साजिशों का केंद्र बनकर उभरा है। इस कैंप की कहानी सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी - आखिर क्या है ये कैंप 313, और कैसे ये पाकिस्तान (Pakistan) की आतंक की नई प्रयोगशाला बन रहा है? इस सनसनीखेज रिपोर्ट में जानिए हर डिटेल...

Pakistan Hizbul jeM

Operation Sindoor का असर: आतंकी ठिकाने KPK की तरफ शिफ्ट

भारत के सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन सिंदूर ने PoK और पंजाब में आतंकी कैंपों पर ऐसा प्रहार किया कि आतंकी दहशत में आ गए। लेकिन ये शैतानी दिमाग रुकने वाले नहीं थे। सूत्रों के मुताबिक, हिजबुल मुजाहिदीन और जैश-ए-मोहम्मद अब KPK के दुर्गम इलाकों में शरण ले रहे हैं। KPK का रफ टेरेन, अफगान बॉर्डर की नजदीकी, और जिहादियों के पुराने ठिकाने इन्हें भारतीय हमलों से बचाने का झांसा दे रहे हैं। खुफिया जानकारी बताती है कि ये शिफ्टिंग पाकिस्तानी सेना और ISI की सीधी मदद से हो रही है - पुलिस प्रोटेक्शन में रैलियां और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (JUI) का साथ इसकी गवाही है।

CAMP 313: हिजबुल का नया जिहादी अड्डा

हिजबुल मुजाहिदीन का नया हथियार है 'कैंप 313', जो KPK के लोअर डिर के बंदाई इलाके में बन रहा है। इस कैंप की कमान पूर्व पाकिस्तानी कमांडो खालिद खान (Pakistani Commando Khalid Khan) के हाथों में है। खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जमीन अगस्त 2024 में चुपके से खरीदी गई, और ऑपरेशन सिंदूर के बाद कंस्ट्रक्शन जोरों पर है। जमीनी सर्वे में बाउंड्री वॉल और ट्रेनिंग स्ट्रक्चर देखे गए हैं। नाम 313 का राज? ये बद्र की जंग और अल-कायदा (Al Qaeda) की ब्रिगेड 313 को सलाम है - हिजबुल (Hizbul) का वैश्विक जिहादी स्टेटस हासिल करने का प्लान है। इस कैंप का मकसद PoK के तबाह ठिकानों की जगह लेना और कश्मीर में घुसपैठ की साजिश रचना है।

जैश की साजिश: मनसेहरा से पेशावर तक

जैश-ए-मोहम्मद भी पीछे नहीं है। 14 सितंबर को, भारत-पाक क्रिकेट मैच से ठीक पहले, मनसेहरा के गढ़ी हबीबुल्लाह में जैश ने भर्ती रैली की। मौलाना मसूद इलियास कश्मीरी (Masood Ilyas Kashmiri) ने 30 मिनट तक ओसामा बिन लादेन को 'शोहदा-ए-इस्लाम' कहकर महिमामंडित किया और KPK को जिहादियों का शेल्टर बताया। खुफिया सूत्रों के मुताबिक, ये रैली मनसेहरा के मरकज शोहदा-ए-इस्लाम कैंप के विस्तार के लिए थी, जहां कंस्ट्रक्शन और सप्लाई बढ़ी है। 25 सितंबर को पेशावर में यूसुफ अज़हर की याद में एक और रैली प्लान है - भर्ती और स्मृति का डबल गेम!

आतंक का नेटवर्क: KPK में ISI का हाथ

सूत्रों का कहना है कि जैश और हिजबुल की ये हरकतें बिना पाकिस्तानी सेना के समर्थन के मुमकिन नहीं। मसूद इलियास कश्मीरी ने दावा किया कि फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने जैश के जनाजों में सेना को शरीक होने का ऑर्डर दिया। KPK में पुलिस और JUI का सहयोग इस बात का सबूत है कि आतंक और राज्य का गठजोड़ कितना गहरा है। विरोधाभास देखिए - पाकिस्तान UNSC और SCO का चेयर है, लेकिन जैश की रैलियां सरकारी छत्रछाया में चल रही हैं!

कैंप 313 का मकसद: कश्मीर में नया खतरा

कैंप 313 को हिजबुल की नई प्रयोगशाला बनाया जा रहा है। ये कश्मीर में घुसपैठ (Kashmir New Terror) और आतंकी एक्टिविटी का हब बनेगा। मसूद इलियास, जो 2018 के सुंजवान हमले का मास्टरमाइंड रहा, अब हिलाल-उल-हक ब्रिगेड (पीपुल्स एंटी-फासीस्ट फ्रंट) की कमान संभाल रहा है। ये ब्रिगेड कश्मीर में 'स्वदेशी' आतंक का चेहरा बनने की कोशिश में है। आतंकियों का मानना है कि KPK की लोकेशन भारतीय स्ट्राइक्स से सुरक्षित है, खासकर जब PoK के कैंप तबाह हो चुके हैं।

Meaning of 313: 313 का अर्थ और खतरा

'313' नाम इस्लामिक युद्ध 'बद्र' में भाग लेने वाले 313 योद्धाओं और अल-कायदा की कुख्यात Brigade 313 से लिया गया है। 313 का इस्तेमाल जिहादी प्रतीक के तौर पर किया जाता है, जो वैश्विक तौर पर आतंकी नेटवर्क को जोड़ने और कट्टर प्रतिभागियों को आकर्षित करने का जरिया है। अल-कायदा ब्रिगेड 313 को दक्षिण एशिया में 'शैडो आर्मी' भी कहा जाता है - यह पाकिस्तान, अफगानिस्तान, कश्मीर और भारत में आतंकी गतिविधियों का सबसे घातक नेटवर्क है।

क्राइम वर्ल्ड का खुलासा: आतंक का नया चेहरा

हिजबुल मुजाहिदीन (Hizbul Mujahideen), 1989 में सैयद सलाहुद्दीन की अगुआई में बना, कभी स्वदेशी लड़ाकों का ग्रुप था। लेकिन अब नई पीढ़ी और पाक समर्थन ने इसे खतरनाक बना दिया। जैश (2000, Masood Azhar) और लश्कर-ए-तैय्यबा (1990, हाफिज सईद) के साथ मिलकर ये KPK से कश्मीर और भारत को निशाना बना रहे हैं। 2019 का पुलवामा अटैक और 2008 का मुंबई हमला इनकी क्रूरता की मिसाल हैं। KPK में इनका बढ़ता नेटवर्क भारत के लिए नई चुनौती है।

क्या होगा अगला कदम?

कैंप 313 और जैश की रैलियां आतंक के नए अध्याय की शुरुआत हैं। क्या भारत फिर सर्जिकल स्ट्राइक करेगा? या KPK का ये जिहादी गढ़ और खतरनाक हो जाएगा? एक बात साफ है - पाकिस्तान का दोहरा चेहरा दुनिया के सामने है।

ये भी पढ़ें- 'घर जैसा लगा पाकिस्तान में’– सैम पित्रोदा के बयान से मचा सियासी तूफान, जानें BJP ने क्या कहा?

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