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क्या है 180 पन्नों का 'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी'? जिससे अमेरिका के श्वेत समुदाय के मन में नफरत भरी गई

'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' असल में लोगों की वर्तमान मानसिकता क्या है, इसको टटोलने का एक दस्तावेज है और पिछले कुछ सालों में अमेरिका में जितनी भी शूटऑउट की घटनाएं हुई हैं, उनमें 'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' ने काम किया है...

वॉशिंगटन, मई 15: अमेरिका के बफेलो सुपरमार्केट में 10 लोगों को मौत के घाट उतारने वाले किलर का कहना है, कि उसे 'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' ने लोगों को मारने के लिए प्रेरित किया, जो दावा करता है कि बाहर से अमेरिका आये लोगों की वजह से अमेरिका के मूल श्वेत निवासी एक दिन विलुप्त हो जाएंगे। मुख्य आरोपी पेटन गेंड्रोन के गुगल ड्राइव से 180 पन्नों का एक दस्तावेज बरामद हुआ है, जिसमें उसने नरसंहार की वजहों से खुद को प्रेरित पाया है। इस दस्तावेज को पढ़ने के बाद मन में कई सवाल आते हैं और एक सवाल जो बार बार आता है, वो ये, कि भारत में मानवाधिकार पर बार बार सवाल उठाने वाला अमेरिका, अपने ही घर में क्यों बार बार हार रहा है?

'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी'

'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी'

'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' असल में अमेरिकी लोगों की वर्तमान मानसिकता क्या है, इसको टटोलने का एक दस्तावेज है और पिछले कुछ सालों में अमेरिका में जितनी भी शूटऑउट की घटनाएं हुई हैं, वो कहीं ना कहीं, 'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' से ही प्रभावित रही हैं। 'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' के तहत अमेरिका में व्हाइट समुदाय के अंदर कुछ लोगों का मानना है कि, दुनिया के अलग अलग हिस्सों से लोगों को लाकर अमेरिका में साजिश के तहत बसाया गया है, जिसका मकसद डेमोक्रेटिक पार्टी के वोटरों की संख्या को बढ़ाना है। 'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' को मानने वाले लोगों का मानना है कि, अमेरिका में प्रवासियों को एक बहुत बड़ी साजिश के तहत बसाया जा रहा है, ताकि अमेरिका से श्वेत समुदाय का वर्चस्व और उनका अस्तित्व ही खत्म हो जाए।

सुपरमार्केट में गोली बारी क्यों?

सुपरमार्केट में गोली बारी क्यों?

न्यूयॉर्क के व्यस्ततम सुपरमार्केट में गोलीबारी करने वाले पेटन गेंड्रोन को जब गिरफ्तार किया गया और जब उससे पूछताछ की गई, तो उसने बताया कि, उसने वहां पर गोलीबारी इसलिए की, क्योंकि उस क्षेत्र में सबसे ज्यादा अश्वेत आबादी है। आरोपी पेटन गेंड्रोन के पास से सुपरमार्केट का पूरा नक्शा मिला है और उसने पुलिस को बताया कि, उसने मौका-ए-वारदात के बारे में पहले किसी को इसलिए नहीं बताया, क्योंक वो नहीं चाहता था, कि वो जो करने जा रहा है, उसकी भनक पुलिस को लगे। 'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' में लिखा गया है कि, वह पूरी तरह से इंटरनेट पर मौजूद सामग्रियों को पढ़कर कट्टरपंथी बन गया था और वो ब्रेंटन टैरेंट से प्रेरित था।

कौन था ब्रेंटन टैरेंट?

कौन था ब्रेंटन टैरेंट?

आपको बता दें कि, ब्रेंटन टैरेंट एक सनकी शख्स था, जिसमें दर्जनों मुसलमानों की हत्या कर दी थी। साल 2019 में न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में स्थिति एक मस्जिद में भयानक हमला किया गया था, जिसमें 51 मुसलमानों की मौत हो गई थी और इस दौरान ब्रेंटन टैरेंट ने पूरा घटना को सोशल मीडिया पर लाइव दिखाया था। और न्यूयॉर्क सुपरमार्केट में फायरिंग करने वाला पेटन गेंड्रोन भी ब्रेटन टैरेंट को अपना आदर्श मानता था। सुपरमार्केट में गोलीबारी करने वाले पेटन गेंड्रोन ने कहा कि, 'मेरा जीवन एक सच्चाई है, लेकिन मेरे अनुभवों का कोई मूल्य नहीं है'। गेंड्रोन ने कहा कि, न्यूजीलैंड का हमलावर टैरेंट ने ही उसे 13 लोगों को गोली मारने के लिए उसे प्रेरित किया था और इंटरनेट पर वो उसी के बारे में पढ़कर जानलेवा कट्टरपंथी शख्स बन गया और उसने 10 लोगों की जान ले ली।

'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी'... कट्टर विचार

'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी'... कट्टर विचार

'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' असल में अमेरिका में श्वेत आबादी के युवाओं के मन में नफरत भरने का दस्तावेज बन चुका है और ये एक ऐसा घोषणापत्र बन चुका है, जो आतंकवादी विचारधारा को जन्म दे रहे हैं। न्यूयॉर्क सुपरमार्केट के हमलावर पेटन गेंड्रोन के गुगल ड्राइव से मिले 'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' में दक्षिण कैरोलिना चर्च हमले का भी जिक्र किया गया है, जब साल 2015 में चर्च में घुसकर डायरल रूफ नाम के एक श्वेत हमलावर ने 9 अश्वेत उपासकों की हत्या कर दी थी। इसके साथ ही 'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' में उस नॉर्वेजियन हत्यारे एंडर्स ब्रेविक का भी गुणगान किया गया गया है, जिसने साल 2011 में 77 लोगों का नरसंहार कर दिया था। हालांकि, उस हमले में मारे गये लोगों में अश्वेत सिर्फ 11 थे और बाकी श्वेत समुदाय के ही लोग थे। हत्या की इन घटनाओं में एक कॉमन बात ये है, कि इन हत्यारों ने हत्याकांड को किसी ना किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लाइल दिखाया और दहशत फैलाई। गेंड्रोन का घोषणापत्र वाला Google दस्तावेज़ कई घंटों तक ऑनलाइन रहा। हालांकि, बाद में गुगल ने इसे हटा दिया। लेकिन, तब तक इस दस्तावेज का स्क्रीनशॉट कई लोगों ने निकाल लिया था।

'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' में क्या है?

'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' में क्या है?

'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' में सैकड़ों नस्लवादी मीम्स शामिल हैं। इसके साथ ही उन नेताओं के बयान शामिल हैं, जो कथित तौर पर लिबरल्स हैं और जिन्होंने अपने आप को लिबरल्स साबित करने के लिए श्वेत समुदाय के खिलाफ जहर उगले हैं। दस्तावेज में लिखा है, नेताओं और पत्राकारों के एकतरफा बयानों ने उसे मन में नफरत भर दिया था। वो लगातार सवाल उठा रहा था, कि जब कोई अश्वेत किसी गोरे को मारता है, तो मीडिया और लिबरल्स चुप क्यों रहते हैं और इसके पीछे वो अश्वेतों को खत्म करने की साजिश मान रहा था। 18 साल का गेंड्रोन पूरी तरह से नफरत से भरा हुआ जहरीला बन चुका था और फिर उसने 13 लोगों को सुपरमार्केट में गोली मार दी, जिसमें 11 अश्वेत थे, जिनमें 10 की मौत हो गई।

किसने लिखा है 'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी'?

सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, 'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' को किसने लिखा है, इसकी जानकारी किसी को नहीं है, लेकिन अमेरिका में कई लोगों के पास 180 पन्नों का ये जहरीला दस्तावेज पहुंच चुका है। 'ग्रेट रिप्लेसमेंट थ्योरी' घोषणापत्र के लेखक का कहना है कि उसने कुछ समय के लिए बारूद खरीदा, लेकिन जनवरी तक हमले की योजना बनाने के बारे में गंभीर नहीं हुए। लेखक श्वेत आबादी के घटते आकार और गोरों के जातीय और सांस्कृतिक प्रतिस्थापन के दावों के बारे में अपनी धारणाओं के बारे में भी बताता है। दस्तावेज का एक हिस्सा सवाल-जवाब के रूप में लिखा गया है। घोषणापत्र के लेखक अपने अधिकांश विश्वासों के लिए इंटरनेट को श्रेय देता है और खुद को एक फासीवादी, एक श्वेत वर्चस्ववादी और एक यहूदी-विरोधी के रूप में वर्णित करता है।

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