पुलवामा हमले के बाद अब क्या चल रहा है पाकिस्तान में

इमरान ख़ान, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री
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इमरान ख़ान, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री

भारत प्रशासित कश्मीर के पुलवामा जिले में सीआरपीएफ़ जवानों के काफ़िले पर हुए आत्मघाती हमले के बाद भारत में सरकार, लोगों और मीडिया के बीच गहमागहमी जारी है.

हमले की ज़िम्मेदारी पाकिस्तान में मौजूद संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है. इसके बाद से भारत सरकार पुलवामा हमले के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहरा रही है. मीडिया में युद्ध करने से लेकर सिंधु जल समझौता तोड़ने तक की बातें हो रही हैं.

भारत, पाकिस्तान पर चरमपंथ को पनाह देने का आरोप भी लगा रहा है.

लेकिन, पाकिस्तान ने इन सभी आरोपों से इनकार किया है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने हमले की सूरत में जवाबी कार्रवाई की चेतावनी भी दे डाली है.

ऐसे में पाकिस्तान की आवाम इस मसले को कैसे देख रही है. सरकार में किस तरह की हलचल है और मीडिया में पुलवामा हमले और भारत के रुख को कितना महत्व दिया जा रहा है.

पाकिस्तान की आवाम में कैसी हलचल

पाकिस्तान के लोगों में चिंता तो है कि एक बार फिर दोनों देश उस दुष्चक्र में आ गए हैं जिसमें भारत पर हमला होता है तो सीधे पाकिस्तान पर इल्ज़ाम लगता है.

लेकिन, पाकिस्तान के लोग भी जंग नहीं चाहते. यहां के लोगों ने तालिबान को और जंग के हालातों को देखा हैं, ऐसे में वो शांति के पक्षधर हैं.

लेकिन, विपक्ष के नेता ये सवाल ज़रूर उठा रहे हैं कि क्या पाकिस्तान ने अपना होमवर्क किया है. पहले भी पाकिस्तान इस बात से इनकार करता रहा है कि चरमपंथी हमले के लिए उसकी ज़मीन का इस्तेमाल किया गया है. लेकिन, बाद में इससे जुड़ी कई ऐसी बातें सामने आईं जो पाकिस्तान के इस दावे पर सवालिया निशान लगाती हैं.

ऐसे में क्या पाकिस्तान को इस बार पूरा भरोसा है कि हमले को यहां से अंजाम नहीं दिया गया था और इसमें पाकिस्तान का कोई शफ़ा यानि समूह शामिल नहीं था.

पुलवामा हमला
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पुलवामा हमला

सियासत पर कितना असर

पु​लवामा हमले के बाद भारत में सियासत गरमा रही है लेकिन पाकिस्तान में हाल थोड़ा अलग है.

पाकिस्तान में कई मुद्दे एक वक़्त में चलते रहते हैं इसलिए ध्यान बंटा रहता है. ईरान की तरफ़ से भी वहां चरमपंथी हमले के बाद सख्त बयान आए थे. फिर कुलभूषण जाधव के मसले पर भी ध्यान दिया जा रहा था.

पाकिस्तानी वकीलों ने भारतीय वकीलों को कैसे जवाब दिया और उनकी दलीलों को कैसे खारिज किया इस पर मीडिया ख़बरें दे रहा था.

पु​लवामा पर बहुत ज़्यादा ख़बरें नहीं थीं. पाकिस्तान में इस मसले का लेकर नेताओं की बैठकें और प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के बयान को प्रमुखता से अख़बारों में छापा गया था. लेकिन, अगर पाकिस्तानी टीवी देखें तो लगता यही है कि इस मुद्दे पर ज़्यादा बात नहीं हो रही है.

इमरान ख़ान, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री
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इमरान ख़ान, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री

क्या इमरान ख़ान के लिए ये होगा चुनावी मुद्दा

पाकिस्तान में चुनाव पिछले साल हो गए हैं इसलिए यहां फिलहाल ये सियासी मसला नहीं है. लेकिन, यहां अर्थव्यवस्था का मसला ज़रूर है.

इमरान ख़ान अर्थव्यस्था में सुधार के लिए लगातार कोशिशें कर रहे हैं. लेकिन, अगर किसी कार्रवाई का अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है तो वो सरकार के लिए चिंता का विषय ज़रूर होगा.

सरकार नहीं चाहती कि ऐसे हालात पैदा हों कि उसे विकास के लिए बचा कर रखे गए फंड को सेना में लगाना पड़े. इसलिए वो सक्रीयता भी दिखा रहे हैं. लोगों से ज़्यादा सरकार में असहजता जरूर है.

भारत के तीखे बयानों की आवाम में प्रतिक्रिया

भारत में पाकिस्तान से बदला लेने, पानी और टमाटर बंद करने जैसी बातें हो रहे हैं. लेकिन, अगर पाकिस्तान का सोशल मीडिया देखें तो वहां इस पर कोई आक्रामक प्रतिक्रिया नहीं देखने को मिलती है.

इस तनाव भरे माहौल में भी लोग मज़ाक कर रहे हैं. जैसे कुछ लोग लिख रहे हैं कि पाकिस्तान में हालात ठीक नहीं हैं तो पाकिस्तान और भारत को अपना युद्ध दुबई में करना चाहिए.

किसी ने लिखा कि 'दहशतगर्दी के जवाब में भारत टमाटरगर्दी' कर रहा है. ऐसे जुमले बना रहे हैं. मज़ाक चल रहा है. गंभीर बातें भी हो रही हैं जैसे पाकिस्तान जंगों का और बोझ बर्दाश्त नहीं कर सकता, अर्थव्यवस्था को ज़्यादा तवाज्जो देनी है.

इमरान ख़ान, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री
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इमरान ख़ान, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री

इमरान ख़ान का लहजा बदला?

पुलवामा हमले के बाद पीएम नरेंद्र मोदी और नेताओं के बयान तीखे हो गए हैं. बार-बार सेना को खुली छूट देने और जवाबी कार्रवाई की बातें हो रही हैं. लेकिन, पाकिस्तान में इमरान ख़ान का लहजा पहले जैसा ही है.

वह पहले की तरह ही अपना आक्रामक लहजा इस्तेमाल कर रहे है. इमरान ख़ान विपक्ष के नेता से प्रधानमंत्री बन गए हैं फिर भी उनका वही आक्रामक तरीका रहा है. वो आक्रामक क्रिकेट भी खेलते रहे हैं तो शायद इसलिए भी ये तरीका है.

कुछ लोग तो ये भी कहते हैं कि शायद उन्हें अभी तक ये यकीन नहीं आया है कि वो प्रधानमंत्री बन चुके हैं इसलिए वो विपक्षी नेताओं से ज्यादा शोर करते हैं. विपक्ष वाले कम बोलते हैं और सरकार ज्यादा बोलती है.

हालांकि, पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर में मौजूद लोगों को ए​हतियात बरतने के लिए कहा गया है. साथ ही ये भी कहा गया है कि भारत के नजदीक वाले इलाकों में ज्यादा लोगों का जमा होना जरूरी नहीं है.

पेशावर के आसमान में जंगी जहाज काफ़ी उड़ाने भरते दिख रहे हैं. पाकिस्तान अपनी तरफ से तैयारी कर रहा है लेकिन उम्मीद सभी यही कर रहे हैं कि बेहतर यही होगा कि इसकी नौबत न आए.

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