US President Election: विवेक रामास्वमी का राष्ट्रपति अभियान खत्म? हिन्दू होने का नुकसान, जीता चर्च?
भारतीय अमेरिकी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार विवेक रामास्वामी ने बीते साल रिपब्लिकन प्रत्याशी के रूप में राष्ट्रपति पद के लिए अभियान शुरू किया था, लेकिन इस बार बुधवार को वे जीओपी बहस से गायब नजर आए।
विवेक रामास्वामी की टीम ने कुछ सप्ताह पहले टीवी पर विज्ञापन देना बंद कर दिया था और अब वे इलिनोइस प्राइमरी में भी भाग नहीं ले रहे हैं, क्योंकि उनका नाम उम्मीदवारों की सूची में नहीं है जबकि उनके अन्य विरोधी रिपब्लिकन इसमें शामिल हैं।

इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह व्हाइट हाउस के लिए विवेक रामास्वामी की दावेदारी के अंत का संकेत हो सकता है। अगले सप्ताह होने वाले जीओपी बहस में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पूर्व गवर्नर निक्की हेली, गवर्नर रॉन डेसेंटिस और पूर्व गवर्नर क्रिस क्रिस्टी शामिल हैं।
मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि विवेक रामास्वामी की प्रचार टीम में काम करने वाले कर्मचारियों को अपनी नौकरी का डर है। विवेक रामास्वामी के प्रचार अभियान में शामिल रहे लोगों को लग रहा है कि भारतवंशी प्रत्याशी के हटते ही उनकी नौकरी खतरे में आ जाएगी। यही वजह है कि उनके सहयोगी कर्मचारी नई नौकरी की तलाश अभी से ही कर रहे हैं।
विवेक रामास्वामी की बात करें तो ओहियो के इस 38 वर्षीय भारतवंशी शख्स राष्ट्रीय चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप, रॉन डेसेंटिस और निक्की हेली के बाद चौथे स्थान पर हैं, और क्रिस क्रिस्टी से आगे हैं।
यह एक राजनीतिक नौसिखिए के लिए प्रभावशाली स्थान हो सकता है, लेकिन बेहत ताकतवर ट्रम्प को चुनौती देने के लिए पर्याप्त नहीं है, जिन्होंने 2016 में एक बाहरी व्यक्ति के रूप में नामांकन जीता था।
38 वर्षीय विवेक रामास्वामी का जन्म ओहायो में हुआ। उनके माता-पिता भारत के अप्रवासी थे। विवेक ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है। 2014 में उन्होंने अपनी खुद की बायोटेक कंपनी, रोइवंत साइंसेज की स्थापना की, जिसने उन दवाओं के लिए बड़ी कंपनियों से पेटेंट खरीदे।
हिन्दू होने का खामियाजा भुगते रामास्वामी?
पिछले महीने CNN टाउन हॉल को संबोधित करते वक्त विवेक रामास्वामी ने कहा था कि वे एक प्राउड हिंदू हैं। रामास्वामी ने कहा कि उन्हें सिखाया गया है कि भगवान ने हम सबको यहां किसी मकसद से भेजा है। वे कोई फर्जी हिंदू नहीं हैं, जिसने अपना धर्म बदला हो। वे अपने राजनीतिक करियर के लिए झूठ नहीं बोल सकते।
अमेरिका में ईसाई आबादी बेहद अधिक है। उनका हिन्दुत्व को लेकर कट्टर समर्थन वहां के लोगों को पंसद नहीं आ रहा था। विरोधी रामास्वामी की धार्मिक मान्यताओं पर सवाल उठा रहे थे। कुछ रिपब्लिकन कार्यकर्ताओं ने कहा था कि रामास्वामी से उनकी हिंदू धार्मिक पृष्ठभूमि के कारण ईश्वर उनसे नफरत करते हैं।
एक रूढ़िवादी ईसाई कार्यक्रम में रामास्वामी की उपस्थिति पर सवाल उठाते हुए एबी जॉनसन ने कहा कि अभी, राष्ट्रपति पद के नामांकन के लिए लड़ाई चल रही है। एक व्यक्ति है जो अभी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में लोकप्रियता हासिल कर रहा है और उसका नाम विवेक रामास्वामी है और वह हिंदू हैं। जो हिंदू हैं वे कई देवताओं में विश्वास करते हैं।
विवेक रामास्वामी ने कहा कि ईसाई धर्म का प्रचार करने के लिहाज से वे सबसे अच्छे राष्ट्रपति नहीं हो सकते। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति का ये काम नहीं होता है। मैं उन मूल्यों का जरूर पालन करूंगा, जिनपर अमेरिका की स्थापना हुई थी।












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