Video: लद्दाख में Indian Army का सामना करने से पहले फूट-फूटकर रोए चीनी जवान

बीजिंग। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर टकराव जारी है। इस टकराव के बीच ही पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) के जवानों का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पीएलए जवानों को उस समय फूट-फूटकर रोते हुए देखा जा सकता है जब वह लद्दाख में तैनाती के लिए रवाना हो रहे हैं। ये सभी जवान एक बस में हैं और दिलचस्‍प बात है कि इसे पाकिस्‍तान के कॉमेडियन जैद हामिद ने शेयर किया है। रविवार को इस वीडियो को कई हजार लोग देख चुके हैं।

पाकिस्‍तानी यूजर ने किया व्‍यंग्‍य

पाकिस्‍तानी यूजर ने किया व्‍यंग्‍य

पाकिस्‍तानी कॉमेडियन जैद हामिद ने वीडियो तो शेयर ही किया साथ ही व्‍यंग्‍य भी किया। उन्‍होंने लिखा, 'चीन की वन चाइल्‍ड पॉलिसी गंभीर तौर पर हमारे चीनी भाईयों के मोटिवेशन लेवल को तकलीफ पहुंचा रही है।' जैद ने ही जानकारी दी कि इन जवानों को इंडियन आर्मी का सामना करने के लिए लद्दाख बॉर्डर पर भेजा जा रहा है। इसके बाद उन्‍होंने फिर तंज कसा और लिखा, 'हम पाकिस्‍तान आपका समर्थन करते हैं चीन। बहादुर बने रहिए।' यह बात सच है कि पाकिस्‍तान, चीन का करीबी है लेकिन हामिद ने अपने वीडियो के जरिए जमकर इन जवानों पर तंज कसा है।

वीचैट पर हुआ था सबसे पहले अपलोड

ताइवान टाइम्‍स के मुताबिक यह वीडियो सबसे पहले वीचैट पर फुयांग सिटी वीकली पेज पर पोस्‍ट की गई थी। लेकिन बाद में इसे डिलीट कर दिया गया। जो वीडियो पोस्‍ट किया गया था उसमें नजर आ रहा था कि फुयांग सिटी के यिंगझोउ जिले से 10 नए रिक्रूट्स को बॉर्डर पर तैनाती के लिए रवाना किया जा रहा है। ये सिटी चीन के अनहुई प्रांत में है। बताया जा रहा है कि सभी नए रिक्रूट्स कॉलेज के छात्र हैं और जिसमें से पांच स्‍वेच्‍छा से तिब्‍बत में सर्व कर चुके हैं। इस वीडियो को फुयांग रेलवे स्‍टेशन पर शूट किया गया है। यहां से इन रिक्रूट्स को हेबेई प्रांत के मिलिट्री कैंप में तैयारी के लिए ले जाया गया।

PLA को ताकतवर मानने से इनकार

PLA को ताकतवर मानने से इनकार

वीडियो में सैनिकों को फूट-फूटकर रोते हुए देखा जा सकता है। रोते हुए ही वह पीएलए के एक गीत को गाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं जो कुछ इस तरह से है, 'ग्रीन फ्लॉवर्स इन द आर्मी।' चीन के इंटरनेट यूजर @waynescene की तरफ से इस वीडियो को रविवार को री-पोस्‍ट किया गया था। इस यूजर ने लिखा था, 'इन्‍हें बताया गया था कि उन्‍हें बस पर चढ़ने के बाद मोर्चे पर तैनाती के लिए जाना है।' चीन अक्‍सर अपनी मीडिया के जरिए उन क्षमताओं का प्रदर्शन करता है जिसके दम पर पीपुल्‍स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) खुद को ताकतवर बताती हैं। लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो पीएलए को लेकर चीन के जो भी दावे हैं, उनमें जरा भी दम नहीं है।

1979 में छोटे से देश वियतनाम ने चटाई धूल

1979 में छोटे से देश वियतनाम ने चटाई धूल

विशेषज्ञों की मानें तो मिलिट्री की ताकत परेड या ऐसे आयोजनों पर नजर नहीं आती मगर इससे आंकी जाती है कि युद्ध में उसने कैसा प्रदर्शन किया था। चीन ने आखिर बार सान 1979 में वियतनाम के खिलाफ युद्ध लड़ा था। इस युद्ध ने उसकी असलियत सामने लाकर रख दी थी। इस वॉर के जरिए यह बात भी पता चल गई थी कि चीन इस बात को लेकर झूठ बोलता है कि उसने कभी किसी की विदेशी जमीन पर कब्‍जा किया है। वियतनाम युद्ध में चीन को मुंह की खानी पड़ी थी। चीन को एक छोटे से देश के खिलाफ पीछे हटना पड़ा और उसकी सेनाएं कितनी ताकतवर हैं, यह बात उस समय हर किसी को पता लग गई।

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