नरेन्द्र मोदी को बधाई देकर चीन के सामने अड़ा ताइवान.. भारत का पक्ष लेकर विवाद में अमेरिका भी कूदा
US On India-Taiwan-China Row: नरेन्द्र मोदी को चुनावी जीत पर बधाई देकर चीन के निशाने पर आए ताइवान के साथ अमेरिका खड़ा हो गया है। अमेरिका ने कहा है, कि "इस तरह के बधाई संदेश कूटनीतिक कार्य का हिस्सा हैं।"
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के बीच शुभकामनाओं के आदान-प्रदान को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है, क्योंकि ताइवान ने साफ साफ शब्दों में 'चीन की आपत्तियों को खारिज कर दिया है।'

दरअसल, ये विवाद उस वक्त शुरू हुआ, जब भारत में लोकसभा चुनाव के रिजल्ट जारी होने के बाद NDA की जीत पर दुनियाभर से नरेन्द्र मोदी के लिए बधाईयों का सिलसिला आना शुरू हुआ और बधाई देने वाले नेताओं में से एक ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते हैं, जिन्हें चीन एक 'अलगाववादी' नेता मानता है, लेकिन उन्हें अमेरिका का भरपूर समर्थन हासिल है।
ताइवान में भी हाल ही में चुनाव हुए हैं, जिसमें लाई चिंग-ते ने भारी बहुमत से जीत हासिल की है और वो ताइवान को एक स्वतंत्र और संप्रभू देश मानते हैं, जबकि चीन कहता है, कि 'ताइवान उसका हिस्सा है।'
ताजा विवाद में ये हुआ है, कि ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने भारतीय प्रधानमंत्री को लोकसभा चुनाव 2024 में जीत के लिए शुभकामनाएं दी, जिसपर चीनी विदेश मंत्रालय ने आपत्ति जताई और ये कहा, कि "ताइवान को भारत को बधाई देने का हक नहीं है, क्योंकि ताइवान चीन का हिस्सा है।"
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स के पत्रकार ने धमकाने वाले लहजे में कहा, कि 'मोदी ने हद पार कर दी है और भारत को इसका अंजाम भुगतना होगा।'
जाहिर है, चीन भारत और ताइवान को धमकाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि ताइवान लगातार भारत का समर्थन हासिल कर रहा है।
वहीं, बधाई को लेकर मचे विवाद के बीच व्हाइट हाउस ने भारत और ताइवान का पक्ष लिया है और अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है, कि "इस तरह के बधाई संदेश कूटनीतिक कार्य का हिस्सा हैं।"
भारत और चीन के शीर्ष नेतृत्व के बीच शुभकामनाओं के आदान-प्रदान पर चीन के दबावपूर्ण रवैये के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा, कि "मैंने वे रिपोर्टें नहीं देखी हैं, इसलिए मैं उन पर विस्तार से टिप्पणी नहीं करना चाहता, लेकिन मैं कहूंगा, कि इस तरह के बधाई संदेश कूटनीतिक कामकाज का सामान्य हिस्सा है।"
इससे पहले जारी एक बयान में ताइवान के राष्ट्रपति ने कहा था, कि "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी चुनावी जीत पर मेरी हार्दिक बधाई। हम तेजी से बढ़ती ताइवान-भारत साझेदारी को बढ़ाने और व्यापार, टेक्नोलॉजी और अन्य क्षेत्रों में अपने सहयोग का विस्तार करने के लिए तत्पर हैं, ताकि इंडो-पैसिफिक में शांति और समृद्धि में योगदान दिया जा सके।"
संदेश का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कि "राष्ट्रपति लाई चिंग-ते, आपके गर्मजोशी भरे संदेश के लिए धन्यवाद। मैं पारस्परिक रूप से लाभकारी आर्थिक और तकनीकी साझेदारी की दिशा में काम करते हुए और अधिक घनिष्ठ संबंधों की आशा करता हूं।"
बधाई संदेश पर भड़का चीन
भारत और ताइवान के बीच कूटनीतिक आदान-प्रदान के बीच, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने भारत के सामने विरोध दर्ज कराया और इस बात पर जोर दिया, कि नई दिल्ली को ताइवान के अधिकारियों की "राजनीतिक हिसाब किताब" का विरोध करना चाहिए।
चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा, कि "सबसे पहले, ताइवान क्षेत्र में कोई राष्ट्रपति नहीं है। दुनिया में केवल एक चीन है, और ताइवान पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के क्षेत्र का एक अविभाज्य हिस्सा है।"
लिहाजा, "इस सवाल पर चीन, ताइवान के अधिकारियों और चीन के साथ राजनयिक संबंध रखने वाले देशों के बीच सभी प्रकार की आधिकारिक बातचीत का विरोध करता है।"
दैनिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने इस बात पर जोर दिया, कि 'एक चीन सिद्धांत' अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त मानदंड है और इस पर आम सहमति बनी है। उन्होंने कहा, "भारत ने गंभीर राजनीतिक प्रतिबद्धताएं की हैं और उसे ताइवान के अधिकारियों की राजनीतिक हिसाब किताब का विरोध करना चाहिए।"
आपको बता दें, कि भारत ने अभी तक चीनी पक्ष की टिप्पणियों पर कोई प्रतिक्रिया या कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।












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