विवेक रामास्वामी का बिगाड़ा जा रहा नाम, हो रहे हैं नस्लीय टिप्पणी, जानिए राष्ट्रपति उम्मीदवार ने क्या कहा?
Vivek Ramaswamy News: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में तेजी से लोकप्रिय हो रहे और टीवी बहसों में अपने विरोधियों की बखिया उधेड़ देने वाले विवेक रामास्वामी के खिलाफ, जिस बात का डर था, वही हो रहा है। विवेक रामास्वामी के खिलाफ अमेरिका के वामपंथी टूट पड़े हैं और कभी उनके हिन्दू धर्म का मजाक उड़ाया जा रहा है, तो कभी उनके नाम को बिगाड़कर उनका मजाक उड़ाया जा रहा है।
पूर्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति माइक पेंस विवेक रामास्वामी को "विह-वेक" कह रहे हैं। गुरुवार की सुबह "फॉक्स एंड फ्रेंड्स" पैनलिस्ट के लिए भी, वह "वी-वेक" थे। वहीं, कुछ आयोवा मतदाताओं के लिए, उनका नाम "वी-विक" है, यानि विवेक अपने विरोधियों को अपने तर्क से परास्त कर रहे हैं और उनके विरोधी बौखलाहट में उनका नाम खराब कर रहे हैं।

विवेक रामास्वामी, जिन्होंने बायो-टेक्नोलॉजी फिल्ड में अपना नाम कमाया है और अपनी मेहनत की बदौलत उन्होंने अरबों डॉलर की कंपनी खड़ी कर दी है, वो राष्ट्रपति चुनाव में अपना किस्मत आजमा रहे हैं।
विवेक रामास्वामी खुद को राजनीतिक नौसिखिये के तौर पर ब्रांड कर रहे है, जो बुधवार रात पहली बार रिपब्लिकन पार्टी की बहस में शामिल हो रहे थे, उन्होंने पहली बार कार्यक्रम में शामिल होने के बाद भी अपनी बातों पर अपने विरोधियों को नचा दिया।
उन्होंने माइक पेंस और न्यू जर्सी के पूर्व गवर्नर क्रिस क्रिस्टी जैसे लोगों के साथ प्रतिस्पर्धा की।
और इसी दौरान, बौखलाहट में आकर उनके विरोधी बार बार उनके नाम का गलत उच्चारण कर रहे थे और उन्हें नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे थे।
विवेक रामास्वामी के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी
भारतीय-अमेरिकियों के बेटे विवेक रामास्वामी ने अपने नाम को खराब करने वालों को उसी भाषा में जवाब भी दिया। उन्होंने स्टेज पर आकर कहा, कि उनके माता-पिता 'पृथ्वी पर मौजूद सबसे महान देश' में आकर बस गये थे।
बुधवार को उन्होंने मंच पर पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के भाषण की एक पंक्ति दोहराई, जब उन्होंने खुद को "एक अजीब उपनाम वाले पतले आदमी" के रूप में पेश किया। (रामास्वामी ने कहा है कि "विवेक" की तुक "केक" के साथ मिलती है और वह अपना अंतिम नाम "राह-मुह-स्वाहा-मी" उच्चारित करते हैं।)
जब बहस के बाद फॉक्स न्यूज के होस्ट सीन हैनिटी ने पूछा, कि रामास्वामी ने गलत उच्चारण को पहले ही क्यों नहीं सुधार लिया, तो उन्होंने हंसते हुए कहा, "मैं सर्वोत्तम प्रयासों की सराहना करता हूं।"
एएपीआई डेटा के डायरेक्टर कार्तिक रामकृष्णन ने कहा, कि चूंकि रामास्वामी "कट्टरपंथी विचारों वाले विद्रोही उम्मीदवार" के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए "उनके लिए पुलिसिंग शुरू करना, या यह सुझाव देना, कि दूसरों को उनके नाम का उच्चारण कैसे करना चाहिए, कोई मतलब नहीं होगा।" (रामास्वामी के मंच में "10 चुनावी मंत्र" में से एक में दावा किया गया है कि "उल्टा नस्लवाद नस्लवाद है।")
'बाहरी' उम्मीदवारों के साथ पहले भी नस्लीय टिप्पणी
ये कोई पहली बार नहीं है, जब भारतीय मूल के किसी उम्मीदवार के नाम का खराब उच्चारण किया जा रहा है, बल्कि विभिन्न नस्लीय पृष्ठभूमि के पिछले राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों को भी उनके नाम से संबंधित नस्लवादी अपमान का सामना करना पड़ा है।
साल 2020 में, जॉर्जिया के तत्कालीन सीनेटर डेविड पेरड्यू ने एक रैली में कमला हैरिस के नाम का मजाक उड़ाया था, जिसके बाद उनकी काफी आलोचना की गई थी। उन्होंने मंच से "का-मा-ला, का-मा-ला, कमला- माला-माला, मुझे नहीं पता, जो भी हो" कहा था। वहीं, ओबामा के कुछ आलोचक अक्सर उनके मुस्लिम होने का झूठा दावा करने के लिए उनके मध्य नाम - हुसैन - का इस्तेमाल करते थे।
लुइसियाना के पूर्व रिपब्लिकन गवर्नर बॉबी जिंदल जब हाई स्कूल में थे, तब उन्होंने अपना नाम पीयूष से बदलकर बॉबी रख लिया था। वहीं, 2024 के राष्ट्रपति पद की रेस में शामिल एक और भारतीय अमेरिकी निक्की हेली, जिनका पहला नाम निमाराता है, वो अपना मध्य नाम इस्तेमाल करती हैं।
दरअसल, विवेक रामास्वामी इसलिए काफी लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि उन्हें भारतीय मूल के लोगों का भारी समर्थन मिल रहा है। अमेरिका में रहने वाले ज्यादातर भारतीय मूल के लोग, डेमोक्रेटिक पार्टी से जुड़े हैं, लेकिन 2020 के एक चुनावी सर्वेक्षण में देखने को मिला था, कि लगभग 60% भारतीय मूल के डेमोक्रेट ने कहा था, कि वे "अपनी पार्टी की संबद्धता की परवाह किए बिना" एक भारतीय अमेरिकी उम्मीदवार का समर्थन करने के लिए तैयार होंगे।












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