डोनाल्ड ट्रंप का एक फैसला चीन के लिए हानिकारक और भारत के लिए फायदेमंद!
रीगन के प्रशासन में रह चुके हैं अमेरिका के नए व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लिग्टाहीजर बने नए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पसंदीदा। चीन और फ्री ट्रेड के बड़े आलोचक रॉबर्ट।
वाशिंगटन। नए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नए कदम से साफ कर दिया है कि वह आने वाले चार वर्षों में चीन के साथ व्यापार के मुद्दे पर और सख्त होने वाले हैं। ट्रंप ने पेशे से एक वकील रॉबर्ट लिग्टाहीजर को अपना ट्रेड
रिप्रजेंटेटिव चुना है। रॉबर्ट वह व्यक्ति हैं जो चीन के बड़े आलाचेक हैं। लेकिन उनकी नियुक्ति भारत को बड़ा फायदा पहुंचा सकती है।

चीन के बड़े आलोचक लिग्टाहीजर
लिग्टाहीजर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के प्रशासन में भी इसी पद पर रह चुके हैं और अब वह यूएस ट्रेड रिप्रजेंटेटिव (यूएसटीआर) होंगे। लिग्टाहीजर रीगन प्रशासन में डिप्टी यूएसटीआर थे और वह सेक्रेटरी ऑफ कॉमर्स विल्बर रॉस और व्हाइट हाउस ट्रेड काउंसिल के हेड पीटर नावारो के साथ काम करेंगे। इस नियुक्ति पर ट्रंप की ट्रांजिशन टीम की ओर से बयान जारी कर कहा गया, 'लिग्टाहीजर की नियुक्ति से अमेरिका के मैन्यूफैक्चरिंग बेस को मजबूत बनाना और अमेरिका से बाहर गई नौकरियों को वापस लाना है।' भारत के लिए यह इस मायने में फायदेमंद है क्योंकि ओबामा प्रशासन में यूएसटीआर माइकल फोरमैन भारत के व्यापार और बौद्धिक संपदा अधिकार नीति को लेकर बहुत बड़े आलोचक हैं। फोरमैन भारत की एशिया पैसिफिक कू-ऑपरेशन में सदस्यता के भी खिलाफ थे। यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल के प्रेसीडेंट मुकेश अगही ने लिग्टाहीजर के अप्वाइंटमेंट का स्वागत किया है। उन्होंने कहा, 'भारत और अमेरिका के बीच व्यापार की संभावनाएं काफी ज्यादा है और यह नए प्रशासन के तहत और आगे बढ़ेंगी।'
इसलिए ट्रंप ने चुना लिग्टाहीजर को
यूएसटीआर पर दूसरे देशों के साथ व्यापार समझौते करने की जिम्मेदारी होती है और साथ ही वह वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करते हैं। राष्ट्रपति ओबामा के प्रशासन में यूएसटीआर का ऑफिस ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप को लेकर समझौता करने में बिजी था। ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप अमेरिका और 11 देशों के बीच मुफ्त व्यापार सौदा है। ट्रंप ने वादा किया है कि ऑफिस संभालते ही वह इस डील को खत्म करेंगे। उनके अप्वाइंटमेंट के बाद ट्रंप की ओर से भी बयान आया। उन्होंने कहा है, 'उनके पास इस तरह के समझौतों को हासिल करने का गहरा अनुभव है जिनके जरिए अर्थव्यवस्था के अहम सेक्टर्स की रक्षा की जा सकती है। वह अमेरिका को उन सौदों से बचाते आए हैं जिनकी वजह से नागरिकों को काफी तकलीफ पहुंची है। इसके अलावा वह उन असफल नीतियों को अमेरिका के पक्ष में करेंगे जिनकी वजह से बहुत से अमेरिकियों को अब तक लूटा गया है। '












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