ईरान पर हमले के बाद अपने ही देश में घिरे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, मिलिट्री एक्शन के लिए तर्कों को बताया बेतुका
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Iran पर Air Strike America को भारी पड़ गई, अब Trump के सामने बड़ी मुसीबत ? | वनइंडिया हिंदी
वॉशिंगटन।
ईरान पर अमेरिकी हमले के बाद खुद अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप घिर गए हैं। दो सीनेट डेमोक्रेट्स और जीओपी सीनेटर्स ने ईरान मसले पर हुए ब्रीफिंग को अब तक की सबसे खराब ब्रीफिंग करार दिया है। इन सीनेटर्स का कहना है कि ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के अधिकारी इस बात को साबित करने में पूरी तरह से विफल रहे हैं कि उनका हमला और कमांडर कासिम सुलेमानी को मारे जाने का फैसला सही था। ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के ही दो सीनेटर्स उटा से सीनेटर माइक और केंटुकी के रैंड पॉल ने ही राष्ट्रपति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। id="toptextpromo"> id='are-slot-1' class='oiad oi-axt oiadv'>id='top-searched-articles'>
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ने सीनेट में हुई ब्रीफिंग के बाद कहा कि सीनेट में पिछले नौ वर्षों में मिलिट्री से जुड़े मसलों पर यह अब तक की सबसे खराब ब्रीफिंग थी। सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में पॉल ने कहा कि ब्रीफिंग दरअसल संविधान का अपमान है। उनके शब्दों में, 'ब्रीफिंग में और सार्वजनिक तौर पर एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से तर्क दिया गया है कि साल 2002 में सद्दाम हुसैन को सत्ता से बेदखल करने के लिए इराक में मिलिट्री एक्शन लिया गया था। जबकि यह बहुत ही बेतुकी बात है।' उन्होंने आगे कहा, 'कोई भी अपने होशो-हवास में रहते हुए पूरी ईमानदारी के साथ यह नहीं कह सकता है कि साल 2002 में जिस तरह से कांग्रेस के वोट के बाद ईराक में मिलिट्री एक्शन का फैसला लिया गया, उसी तरह से ईरान में भी 18 साल बाद मिलिट्री एक्शन के लिए मंजूरी दी गई।' पॉल के मुताबिक किसी को भी उस हमले के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी जिसमें जनरल कासिम को मारा गया था। अगले दिन अमेरिकी अखबारों के जरिए कांग्रेस को इस मिलिट्री एक्शन के बारे में खबर मिली।











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