अमेरिकी शेयर बाजारों में भारी गिरावट, फेडरल रिजर्व ने लगातार चौथी बार बढ़ाई ब्याज दर, भारत में दिखा असर!

कोरोना महामारी, उच्च खाद्य और ऊर्जा कीमतों के साथ-साथ व्यापक मूल्य दबावों से संबंधित आपूर्ति और मांग के कारण अमेरिका बाजार असंतुलित हो रहा है।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Federal Reserve Rate Hike) ने चौथी बार फिर से प्रमुख ब्याज दरों में वृद्धि की है। हालांकि, फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया कि वह जल्द ही अपनी दरों में बढ़ोतरी को थोड़ा कम कर सकता है। फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक में प्रमुख नीतिगत दर को 75 आधार अंकों से बढ़ाकर एक दशक के उच्च स्तर 3.75-4.0 प्रतिशत कर दिया। वहीं, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजारों में इसका साफ असर दिखना शुरू हो गया है।

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मार्केट में मचा हाहाकार
फेडरल रिजर्व ने अपनी प्रमुख अल्पकालिक दर को 3.75 प्रतिशत से 4 फीसदी की सीमा तक बढ़ाया है, जो कि 15 वर्षों में इसका उच्चतम स्तर है। फेड के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने कहा कि फेड अपनी दर वृद्धि के अभियान को बंद करने के करीब नहीं है और उसे दरों को थोड़ा और बढ़ाने की जरूरत है, ताकि वह उस स्तर तक पहुंच सके जो काफी हद तक प्रतिबंधक है। जानकार बताते हैं कि, ब्याज दरें बढ़ाना एक मौद्रिक नीति साधन है जो आम तौर पर अर्थव्यवस्था में मांग को दबाने में मदद करता है, जिससे मुद्रास्फीति दर में गिरावट में मदद मिलती है।

फेड अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने क्या कहा, जानें
कोरोना महामारी, उच्च खाद्य और ऊर्जा कीमतों के साथ-साथ व्यापक मूल्य दबावों से संबंधित आपूर्ति और मांग के कारण अमेरिका बाजार असंतुलित हो रहा है। यही वजह से जिसके कारण अमेरिका में इस समय मुद्रास्फीति आसमान छू रही है। एक प्रेस कांफ्रेंस में फेड अध्यक्ष जेरोम पॉवेल ने कहा कि फेड अगले महीने बढ़ोतरी की गति को धीमा कर सकता है। पॉवेल ने कहा कि वह समय आ रहा है और इस पर फैसला अगली बैठक या उसके बाद लिया जा सकता है।

बाजार मुश्किल दौर में
अपनी नवीनतम नीति बैठक के बाद फेड ने अपने बयान में कहा कि, कई अर्थशास्त्रियों के अनुसार, दिसंबर में फेड द्वारा अगली अपेक्षित दर वृद्धि तीन-चौथाई के बजाय केवल आधा अंक हो सकती है। बयान के अनुसार, अमेरिकी अर्थव्यवस्था व्यापार, युद्ध, धीमी चीनी अर्थव्यवस्था और संभावित आर्थिक और वित्तीय अशांति से संभावित चुनौतियों का सामना कर रही है, जो यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर निकलने के बाद आ सकती है।

भारतीय शेयर बाजार पर असर
बता दें कि, शेयर बाजार पर इस निर्णय के बाद भारी दबाव दिख रहा है। निफ्टी 18000 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल चुका है। आज सेंसेक्स 394 अंकों की गिरावट के साथ 60511 के स्तर पर और निफ्टी 114 अंकों की गिरावट के साथ 17968 के स्तर पर खुला। बैंक निफ्टी 273 अंकों की गिरावट के साथ 40873 के स्तर पर खुला। खबर के मुताबिक आज रिजर्व बैंक मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की एडिशनल बैठक होने वाली है।

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