US Election Results:अमेरिका में कभी भी बिगड़ सकते हैं हालात, ट्रंप-बाइडेन समर्थकों का टूट रहा है सब्र
नई दिल्ली- अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के आखिरी नतीजे आने में जितनी देरी हो रही है, उससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रतिद्वंद्वी डेमोक्रैट उम्मीदवार जो बाइडेन के समर्थकों के सब्र का बांध टूटता जा रहा है। कहीं पर गुस्साए ट्रंप समर्थक काउंटिंग सेंटर पर पहुंचकर मतगणना रोकने की मांग कर रहे हैं तो कहीं पर सैकड़ों बाइडेन समर्थक एक-एक वोट की गिनती की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को इन हालातों में लॉ एंड ऑर्डर बनाए रखना बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
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अमेरिका में बुधवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दर्जनों नाराज समर्थक डेट्रॉयट और फीनिक्स में काउंटिंग सेंटर के बाहर जमा हो गए और वोटों की गिनती रोकने की मांग करने लगे। फीनिक्स में ट्रंप समर्थकों ने 'गिनती बंद करो' और 'चोरी बंद करो' जैसी नारेबाजी शुरू कर दी। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि, मिशिगन और एरिजोना में ट्रंप की उम्मीदों को झटका लगता दिख रहा है। दरअसल, ट्रंप ने बिना किसी ठोस आधार के दावा किया है कि वोटिंग और बैलेट की गिनती में बड़ी धांधली हुई है। मेल-इन वोट की गिनती से उन्हें खास आपत्ति है, जिसके खिलाफ कई राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी के लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उधर पूरे अमेरिका में ट्रंप विरोधी हजारों प्रदर्शनकारी न्यूयॉर्क से लेकर सिएटल तक सड़कों पर उतरकर एक-एक बैलेट की गिनती की मांग कर रहे हैं।
ट्रंप समर्थकों का गुस्सा फॉक्स न्यूज के खिलाफ भी देखा जा रहा है, जिसने एरिजोना में जो बाइडेन को विजेता घोषित कर दिया है। एरिजोना में रिपब्लिकन पार्टी के नेता और ट्रंप के कट्टर समर्थक पॉल गोसर ने समर्थकों के बीच पहुंचकर ऐलान किया कि 'हम इस चुनाव की चोरी नहीं होने देंगे। ' हालांकि, मतगणना केंद्रों पर दोनों पार्टियों के पर्यवेक्षक मौजूद हैं और काउंटिंग प्रक्रिया की हर वक्त ऑनलाइन लाइव-स्ट्रीमिंग भी हो रही है। हालात के मद्देनजर मैरिकोपा काउंटी के दो बड़े अधिकारियों (एक डेमोक्रैट और एक रिपब्लिकन) की ओर से बयान जारी कर हालात पर चिंता जताते हुए कहा गया है कि अफवाहों से चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। बयान में कहा गया है कि 'मतों की सही गिनती में समय लगता है......यह लोकतंत्र का सबूत है, धांधली का नहीं।'
उधर पोर्टलैंड में प्रदर्शनकारियों के उग्र प्रदर्शनों को देखते हुए गवर्नर को नेशनल गार्ड को बुलाना पड़ा है। वहां के गवर्नर केट ब्रॉन ने कहा कि, '(मतदान)प्रक्रिया पर भरोसा रखना महत्वपूर्ण है और दशकों से इस देश की व्यवस्था ने बहुत बड़े संकटों के समय में भी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव को सुनिश्चित किया है.......इसमें हम सब लोग एकजुट हैं। ' पोर्टलैंड में अपनी हृदय संबंधी दिक्कतों के बावजूद ट्रंप-विरोधी प्रदर्शन में रिचर्ड मार्च भी शामिल हुए। उनके मुताबिक, 'इस चुनाव पर संदेह पैदा करने से हमारे लोकतंत्र को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे.....मुझे लगता है कि अब हमारे समाज का बहुत ही ध्रुवीकरण हो चुका है और मुझे इस बात की चिंता है कि आने वाले दिनों, हफ्तों या महीनों में क्या होने जा रहा है। '
मिशिगन को लेकर खास चिंता इस वजह से भी है, क्योंकि वहां पिछले कई महीनों से राजनीतिक हिंसा की स्थिति पैदा होती रही है। वहां पर सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी खुलेआम बंदूक लेकर राज्य की राजधानी में प्रदर्शन कर चुके हैं और चुनी हुई सरकार को बंधक बनाने की साजिश रचने के आरोप में पिछले महीने 6 लोगों को गिरफ्तार भी किया जा चुका है। अब जिस तरह से चुनाव नतीजे आने में देरी हुई है और मेल-इन वोट को लेकर विवाद शुरू हुआ है, उससे इस आशंका से इनकार नहीं किया जा रहा है कि इसके चलते भारी अव्यवस्था पैदा हो सकती है।
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