US Election 2024: रूस-यूक्रेन और इजराइल-लेबनान संघर्ष पर क्या असर डाल सकते हैं चुनाव के नतीजे? क्या थमेगी वॉर?
US Elections 2024 Results Impacts: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024 का परिणाम न केवल अमेरिका के लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए अहम साबित हो सकता है। अमेरिका की वैश्विक भूमिका के चलते इसके राष्ट्रपति के फैसले युद्ध, शांति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर प्रभाव डाल सकते हैं।
वर्तमान में, दो बड़े मोर्चों पर युद्ध चल रहे हैं - रूस-यूक्रेन और इजराइल-लेबनान। आइए जानते हैं कि अगर कमला हैरिस या डोनाल्ड ट्रंप में से कोई भी राष्ट्रपति बने, तो इन युद्धों पर क्या असर पड़ सकता है?

इजराइल-लेबनान और गाजा संघर्ष पर क्या होगा प्रभाव?
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान गाजा और लेबनान में इजराइल के हमलों ने अमेरिका में मुस्लिम और अरब समुदायों को निराश किया है। कमला हैरिस और डोनाल्ड ट्रंप, दोनों ने इजराइल के प्रति समर्थन जताया है, लेकिन इनके रुख में अंतर भी है।
क्या है ट्रंप का रुख?
डोनाल्ड ट्रंप ने हमेशा इजराइल के प्रति अपने समर्थन को खुलकर जाहिर किया है। 2017 में राष्ट्रपति रहते हुए, उन्होंने येरुशलम को इजराइल की राजधानी के रूप में मान्यता दी थी। हमास द्वारा 7 अक्टूबर को इजराइल पर हुए हमले के बाद ट्रंप ने हमास की कड़ी निंदा की, लेकिन गाजा के नागरिकों के प्रति सहानुभूति कम ही दिखाई। इसके अलावा, ट्रंप ने कहा कि इजराइल को आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है।
क्या है कमला हैरिस का रुख?
कमला हैरिस ने इजराइल के प्रति समर्थन जताने के साथ-साथ गाजा के नागरिकों पर हो रहे हमलों पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि इजराइल को अपनी आत्मरक्षा का अधिकार है, लेकिन इसका तरीका मायने रखता है। उन्होंने इजराइल से संघर्ष खत्म करने के लिए बातचीत का समर्थन किया है, लेकिन हथियारों पर प्रतिबंध लगाने का विरोध किया है।
दोनों नेताओं के रुख को देखते हुए, ऐसा लगता है कि चाहे जो भी जीते, इजराइल-लेबनान और गाजा संघर्ष पर अमेरिकी नीतियों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। ट्रंप या हैरिस के सत्ता में आने पर संघर्ष खत्म होने की संभावना कम ही नजर आती है।
रूस-यूक्रेन युद्ध पर कैसा होगा असर?
रूस-यूक्रेन युद्ध पिछले 32 महीनों से जारी है। दोनों देशों के बीच संघर्ष में अमेरिका का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, खासकर सैन्य और आर्थिक सहायता के रूप में। अब सवाल यह है कि नए राष्ट्रपति के आने पर यह समर्थन कैसा रहेगा?
ट्रंप का रुख
डोनाल्ड ट्रंप ने कई मौकों पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की तारीफ की है। आपको बता दें कि बीती 11 सितंबर को ट्रंप ने दावा किया था कि वे सत्ता में आने के 24 घंटे के भीतर रूस-यूक्रेन युद्ध को सुलझा सकते हैं। ट्रंप के अनुसार, वे एक ऐसा शांति समझौता करवा सकते हैं, जिसमें यूक्रेन को नाटो में शामिल नहीं किया जाएगा और रूस को कुछ विवादित क्षेत्रों पर नियंत्रण दे दिया जाएगा।
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क्या है कमला हैरिस का रुख?
कमला हैरिस का रुख ट्रंप से बिल्कुल अलग है। उन्होंने रूस के खिलाफ यूक्रेन को सैन्य सहायता देने का समर्थन किया है। हैरिस का मानना है कि अगर, इस युद्ध में पुतिन जीतते हैं, तो उनका अगला कदम यूरोप होगा। उन्होंने यूक्रेन के लिए अमेरिकी समर्थन को जरूरी बताया है और नाटो में यूक्रेन की संभावित सदस्यता पर विचार जारी रखने की बात कही है।
ट्रंप के सत्ता में आने पर रूस-यूक्रेन युद्ध को एक शांति समझौते के तहत खत्म करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, लेकिन यह यूक्रेन के लिए कठिन हो सकता है, क्योंकि इसमें उसे कई रियायतें देनी पड़ेंगी। वहीं, कमला हैरिस की जीत से रूस के खिलाफ अमेरिका का समर्थन जारी रहेगा, जिससे यूक्रेन को राहत मिलेगी।
अमेरिकी अरब और मुस्लिम समुदाय की भूमिका
इस चुनाव में अमेरिकी मुस्लिम और अरब समुदाय का समर्थन भी महत्वपूर्ण है। 2020 में स्विंग स्टेट्स (एरिज़ोना, जॉर्जिया, मिशिगन, नेवादा, उत्तरी कैरोलिना, पेंसिल्वेनिया, विस्कॉन्सिन) में बाइडेन की जीत में अरब-अमेरिकी समुदाय का योगदान अहम था। लेकिन, हाल के घटनाक्रमों और इजराइल-लेबनान संघर्ष को लेकर उनकी नाराजगी के चलते इस बार इन वोटरों का झुकाव बदल सकता है।
अमेरिकी चुनाव के नतीजों का रूस-यूक्रेन और इजराइल-लेबनान युद्ध पर प्रभाव अवश्य पड़ेगा, लेकिन इसे पूरी तरह समाप्त करने की उम्मीद नहीं की जा सकती। ट्रंप या हैरिस में से जो भी सत्ता में आए, उनके नीतिगत निर्णय इन संघर्षों के स्वरूप को जरूर प्रभावित करेंगे, लेकिन इनकी समाप्ति के लिए तत्काल कोई बड़ी पहल होती नहीं दिख रही।
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