कहीं आपके घर की नींव के नीचे खिसक तो नहीं रही जमीन? अमेरिका में हुए शोध से घूम जाएगा माथा
अमेरिका में वैज्ञानिकों ने भूमिगत जलवायु परिवर्तन पर एक नया शोध किया है, जिसके नतीजे बहुत ही भयावह लग रहे हैं। यह शोध मूल रूप से शिकागो शहर में वैश्विक तापमान बढ़ने के प्रभाव को समझने के लिए किया गया है, लेकिन इसका परिणाम देखकर वैज्ञानिकों का भी माथा घूम गया है।
न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक शिकागो शहर में इमरातों, मल्टीलेवल सड़कों और सबवे से लेकर रेलवे लाइन के नीचे तक की जमीन धंस रही है; और इसकी वजह सामान्य सोच से कहीं अलग है। दुनिया के सामने आई इस नई समस्या का कारण वैज्ञानिक 'भूमिगत जलवायु परिवर्तन' बता रहे हैं।

औसतन 5. 6°F गर्म हुई शिकागो शहर की भूमिगत सतह
नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों की नई रिसर्च के मुताबिक 20वीं सदी के मध्य से लेकर हाल तक शिकागो शहर की सतह से लेकर नीचे चट्टानी हिस्से तक की जमीन औसतन 5. 6°F तक गर्म हो गई है। ये सारी गर्मी अधिकतर बेसमेंट और जमीन के नीचे की अन्य संरचाओं से निकल रही है। कुछ दशकों में इसके चलते इमारतों के नीचे की रेत, मिट्टी और चट्टानी परतें या तो कई मिलीमीटर सिकुड़ गई हैं या फिर वह फैल गई हैं।
तापमान बढ़ने से कमजोर पड़ रही है नींव
यह समस्या इतनी भयावह है कि इमारतों की नींवें कमजोर करने के लिए काफी हैं। इसकी वजह नीवों और दीवारों में दरारें पैदा हो सकती हैं और हुई हैं। इस शोध पत्र के लेखक एलेसेंड्रो रोटा लोरिया शिकागो के एक अंडरग्राउंड रेल टर्मिनल मिलेनियम स्टेशन के आसपास के क्षेत्र के बारे में कहते हैं, 'आपके चारों ओर, आपके आसपास गर्मी का स्रोत है।'
भूमिगत जलवायु परिवर्तन क्या है?
वे कहते हैं, 'ये ऐसी चीजें हैं, जिन्हें लोग देखते नहीं हैं, इसलिए उन्हें ऐसा लगता है जैसे उनका अस्तित्व ही नहीं है।' यह स्थिति सिर्फ शिकागो तक सीमित नहीं है। दुनिया भर के बड़े शहरों में इंसान जीवाश्म ईंधन जला रहा है, जिससे सतह का तापमान बढ़ रहा है। लेकिन, यह गर्मी बेसमेंट, जमीन के नीचे की पार्किंग, ट्रेनों की सुरंगों, अंडरग्राउंड पाइपलाइन, सीवर और अंडग्राउंड इलेक्ट्रिकल केबल के माध्यम से भी निकल रही है। इस घटना को वैज्ञानिक 'भूमिगत जलवायु परिवर्तन' कह रहे हैं।
अचानक आ सकती है आफत
भूमिगत तापमान बढ़ने से सुरंगें गर्म हो रही हैं, जिससे ट्रैक अत्यधिक गर्म हो रहे हैं और यात्रियों के पसीने छूटने लगते हैं। समय के साथ यह संरचनात्मक ढांचों को अंदर ही अंदर खोखला कर सकता है, जो लंबे समय तक नहीं दिखता है, लेकिन अचानक मुश्किल चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
72 साल के भूमिगत तापमान का विश्लेषण
सिविल और एन्वायरोंमेंटल इंजीनियरिंग विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर रोटा लोरिया ने शिकागो में भूमिगत जलवायु परिवर्तन के आकलन के लिए लूप लाइन में सतह के नीचे 150 से ज्यादा तापमान सेंसर लगाए थे। उन्होंने 1951 से लेकर अबतक के डेटा का कंप्यूटर पर विश्लेषण किया और यह भी देखा कि 2051 तक की क्या परिस्थितियां हो सकती हैं।
अत्यधिक गर्मी से फैल या सिकुड़ रही है जमीन
उन्होंने पाया कि शिकागो में कुछ ऐसी जगहें भी मिली हैं, जहां पिछले सात दशकों में जमीन के भीतर का तापमान 27°F से ज्यादा बढ़ गया है। इसकी वजह से कुछ इमारतों के नीचे की जमीन की सतह आधा इंच या तो फैल गई है या फिर सिकुड़ गई है।
भविष्य में बड़ी समस्या पैदा होने की आशंका
ऑस्ट्रेलिया की एक जियोटेक्निकल इंजीनियरिंग एक्सपर्ट एसल बिदरमग्ज ने कहा है, 'आज आप उस समस्या को नहीं देख रहे हैं।' 'लेकिन, अगर हम 100 साल तक बैठे रहें, तो दुनिया बहुत भयावह समस्या देखेगी।'
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