इन LED बल्बों की मदद से हो सकता है कोरोना वायरस का खात्मा, शोध में सामने आई बात

नई दिल्ली: दुनियाभर में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। साथ ही अब तक लाखों लोग इस वायरस की वजह से अपनी जान भी गंवा चुके हैं। कोरोना वायरस का पता अभी सालभर पहले चला है। ऐसे में इस पर लगातार नए-नए शोध हो रहे हैं, जिसमें अब एक चौंकाने वाली बात सामने आई है। ये शोध 'जर्नल ऑफ फोटोकेमिस्ट्री एंड फोटोबॉयोलॉजी बी: बॉयोलॉजी' में प्रकाशित हुआ है।

SARS-CoV-2 भी शोध में शामिल

SARS-CoV-2 भी शोध में शामिल

इस शोध में अल्ट्रावायलेट (पराबैंगनी या यूवी) एलईडी के किसी वायरस को नष्ट करने की क्षमता का विस्तार से अध्ययन किया गया। जिसमें COVID-19 वाले SARS-CoV-2 भी शामिल थे। शोध में पता चला कि अल्ट्रावायलेट (यूवी) प्रकाश उत्सर्जक डायोड (यूवी-एलईडी) कोरोना वायरस को तेजी से मार सकते हैं। साथ ही ये काफी किफायती और कारगर साबित होंगे। अब तक सेनिटाइजर जैसे रसायनों की मदद से ही कोरोना को खत्म किया जाता रहा है।

क्या कह रहे शोधकर्ता?

क्या कह रहे शोधकर्ता?

अमेरिका में तेल अवीव विश्वविद्यालय के रिसर्चर और शोध के सह-लेखक हादस ममने ने कहा कि पूरी दुनिया कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए कारगर समाधान तलाश रही है। ऐसे में एलईडी बल्बों पर आधारित संक्रमणमुक्त करने की प्रणालियां वायु-संचरण प्रणाली और एयर कंडिशनर में लगाई जा सकती हैं। उन्होंने शोध में पाया कि अल्ट्रावायलेट किरणों के जरिए कोरोना वायरस को खत्म करना काफी आसान है। उन्होंने शोध के दौरान एलईडी बल्ब की मदद से वायरस को मारा भी था।

इस्तेमाल के लिए ये सावधानियां जरूरी

इस्तेमाल के लिए ये सावधानियां जरूरी

शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि अगर अल्ट्रावायलेट किरणों को सीधे इस्तेमाल किया गया तो वो इंसानों के लिए घातक होंगी। इसके लिए एक खास उपकरण डिजाइन किया जाना चाहिए, ताकी इंसान सीधे इसके संपर्क में ना आए। इसके बाद इस उपकरण को एयर कंडीशनिंग, वैक्यूम, और पानी प्रणालियों में स्थापित किया जा सकता है। जिससे कोरोना वायरस का खात्मा आसानी से हो सके।

कीटणुनाशक के तौर पर होता है इस्तेमाल

कीटणुनाशक के तौर पर होता है इस्तेमाल

अल्ट्रावायलेट किरणें एक प्रकार का विद्युत चुम्बकीय विकिरण हैं, जिनकी तरंग दैर्घ्य प्रत्यक्ष प्रकाश से छोटी और कोमल एक्स किरण से अधिक हों। इन किरणों का इस्तेमाल कई दशकों से कीटणुनाशक के तौर पर किया जा रहा है। कुछ जगहों पर इनकी मदद से सिरिंज तक को कीटाणु मुक्त किया जाता है। अगर किसी इंसान पर ये किरणें डाली जाएं, तो समझिए आप उसे एक तरह से भून रहे हैं। कई दवा कंपनियां कीटाणुनाशक के तौर पर अल्ट्रावायलेट किरणों का ही इस्तेमाल करती हैं।

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