Indians in Russian Army: झांसा देकर रूसी सेना में कराया शामिल! 21 साल का समरजीत लापता, 14 और भारतीय फंसे

Indians in Russian Army: यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध में भारतीय युवाओं की दुखद भागीदारी का एक नया और गंभीर मामला सामने आया है। लुधियाना के 21 वर्षीय समरजीत सिंह का पिछले एक महीने से कोई अता-पता नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध लड़ने के लिए हथियारों के साथ अग्रिम मोर्चे पर भेजे जाने के बाद से उनकी कोई खबर नहीं मिल सकी है।

मोगा के रहने वाले बूटा सिंह, जो खुद इसी युद्ध में घायल होकर मॉस्को के अस्पताल में भर्ती हैं, ने समरजीत के लापता होने की पुष्टि की है। यह घटनाक्रम समरजीत के परिवार के लिए गहरा सदमा लेकर आया है और भारत सरकार पर इन फंसे हुए युवाओं की सुरक्षित वापसी के लिए दबाव बढ़ा रहा है।

Indians in Russian Army

कैसे फंसा समरजीत?

यह पूरा मामला उन भारतीय युवाओं से जुड़ा है, जिन्हें एजेंटों द्वारा बेहतर भविष्य और नौकरी का झांसा देकर रूस भेजा गया और फिर धोखे से रूसी सेना में भर्ती कर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में धकेल दिया गया। लुधियाना के समरजीत सिंह भी इसी जाल में फंस गए।

  • स्टडी वीज़ा पर रूस गए: लुधियाना के डाबा इलाके के रहने वाले 21 वर्षीय समरजीत सिंह, इस साल जुलाई में स्टडी वीज़ा पर रूस गए थे। वह एक सामान्य छात्र की तरह बेहतर अवसरों की तलाश में थे।
  • एजेंट का झूठा वादा: समरजीत एक योग्य एक्स-रे तकनीशियन थे। रूस में एक एजेंट ने उन्हें रूसी सेना में डॉक्टर के सहायक (doctor's assistant) की नौकरी दिलाने का वादा किया। यह नौकरी युद्ध के मोर्चे से दूर, चिकित्सा संबंधी सहायता प्रदान करने वाली मानी गई होगी, जो उन्हें सुरक्षित लगी होगी।
  • धोखे से सेना में भर्ती और ट्रेनिंग: एजेंट के झांसे में आकर समरजीत ने रूसी सेना से जुड़े कागजात पर हस्ताक्षर कर दिए। उन्हें यह बताया गया होगा कि यह एक सहायक भूमिका है। हालांकि, उन्हें कुछ दिनों की ट्रेनिंग के बाद सीधे हथियारों के साथ युद्ध लड़ने के लिए अग्रिम मोर्चे (frontline) पर भेज दिया गया। यह एक बड़ा धोखा था, क्योंकि उन्हें सीधे युद्ध में शामिल होने की कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
  • युद्ध क्षेत्र में तैनाती और संपर्क टूटना: अग्रिम मोर्चे पर भेजे जाने के लगभग एक महीने बाद, समरजीत सिंह का अपने साथियों और रूसी सेना के अधिकारियों से संपर्क टूट गया। उनके साथ मौजूद रहे पंजाब के मोगा जिले के बूटा सिंह (जो खुद इस युद्ध में घायल होकर मॉस्को के अस्पताल में भर्ती हैं) ने बताया कि समरजीत से वॉकी-टॉकी के जरिए संपर्क करने की कोशिशें नाकाम रहीं।
  • लापता होने की पुष्टि: बूटा सिंह ने अपने ट्रांसलेटर के माध्यम से पता किया तो ट्रांसलेटर ने पुष्टि की कि समरजीत वापस नहीं लौटे हैं, जबकि उनके साथ गया दूसरा व्यक्ति सकुशल पहुंच गया है। इससे यह स्पष्ट हो गया कि समरजीत लापता हो गए हैं और उनकी जान खतरे में है।

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अभी भी 14 लोग फंसे हैं

मोगा के रहने वाले बूटा सिंह, जो खुद इस मानवीय संकट का शिकार हुए हैं, ने रूस-यूक्रेन युद्ध क्षेत्र के भयावह और बदलते हालात की अंदरूनी जानकारी दी है। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, 'हमें (भारतीयों के समूह को) लगभग एक महीने पहले एक खतरनाक युद्ध मिशन पर भेजा गया था। दुर्भाग्यवश, मैं इस दौरान घायल हो गया और मुझे मॉस्को के पास एक अस्पताल में भर्ती कराया गया।'

बूटा सिंह इस समय अस्पताल में भर्ती होने वाले अकेले भारतीय हैं, लेकिन उनका खुलासा यहीं खत्म नहीं होता। उन्होंने बताया कि उनके समूह के कम से कम 14 अन्य भारतीय अभी भी यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में सक्रिय हैं, जो लगातार मौत के मुँह में धकेले जा रहे हैं।

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