यूक्रेन को बचाएं या विश्वयुद्ध रोकें? पुतिन के सामने बाइडेन बेबस या यूक्रेन को लड़ाई में फंसाकर छोड़ा?

यूक्नेन की स्थिति काफी खराब हो चुकी है और यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सरेंडर करने से इनकार कर दिया है।

मॉस्को/कीव/वॉशिंगटन, फरवरी 24: पिछले एक साल से यूक्रेन की सीमा के पास रूसी सैनिक जमा हो रहे थे और पिछले एक साल से अमेरिकी राष्ट्रपति रूस को धमकी देने में लगे हुए थे, लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति यूक्रेन जंग को रोक नहीं पाए और अब रूस ने पूरी ताकत के साथ यूक्रेन पर हमला शुरू कर दिया है। एक तरह यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक चल रही थी और दूसरी तरफ रूसी सेना यूक्रेन पर बम बरसा रही थी। तो सवाल ये है कि, क्या अमेरिका ने यूक्रेन को भी धोखा दे दिया है या फिर पुतिन की चाल में फंसकर जो बाइडेन बेबस हो चुके हैं?

यूक्रेन के लिए भयावह हालात

यूक्रेन के लिए भयावह हालात

यूक्नेन की स्थिति काफी खराब हो चुकी है और यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सरेंडर करने से इनकार कर दिया है। इस बीच रूस की सेना लगातार यूक्रेन के अंदर बढ़ती जा रही है और रूस ने साफ तौर पर कह दिया है कि, वो यूक्रेन के सारे हथियार खत्म कर देगा और इसी मकसद के साथ रूस यूक्रेन के हथियारों के ठिकानों पर हमला कर रहा है। यूक्नेन के अलग अलग इलाकों में रूसी सैनिकों की भीड़ नजर आ रही थी और जिस यूक्रेन को उम्मीद थी, कि अगर रूस हमला करेगा, तो अमेरिका बचाने आ जाएगा, वो अमेरिका यूक्रेन को बचाने के लिए नहीं पहुंचा है। यूक्रेन में अफरातफरी मची हुई गहै और एटीएम के बाहर लंबी लंबी लाइनें लगी हैं। लोग राजधानी कीव से भाग रहे हैं और रास्तों पर गाड़ियों की लंबी लंबी कतारें लगी हैं। यूक्रेन में लगातार हवाई हमले के सायरन बज रहे हैं, जो पहले से ही उथल-पुथल से भरी दुनिया के लिए एक खतरनाक नए संकट की शुरुआत कर रहा है।

रूकने वाले नहीं हैं रूसी राष्ट्रपति

रूकने वाले नहीं हैं रूसी राष्ट्रपति

रूस के राष्ट्रपति पहले दिन से अपनी बात पर टिके थे और वो आज भी अपनी बात पर टिके हुए हैं। पुतिन लगातार कह रहे थे कि, नाटो और अमेरिका को वो किसी भी हाल में रूस की सीमा के पास आने रूस के माथे पर बैठने के लिए आने नहीं देंगे और यूक्रेन को रूस के लिए खतरा नहीं बनने देंगे और रूसी राष्ट्रपति अपने बयान पर आज भी कायम दिख रहे हैं। दूसरी तरफ सदी की सबसे खराब महामारी से सबसे ज्यादा पीड़ित अमेरिका अब यूक्रेन संकट को कैसे सुलझाए, उसे कुछ सूझ नहीं रहा है। अमेरिका में अगले दो महीने में सीनेट के चुनाव होने हैं और उससे पहले रूसी राष्ट्रपति बेबस नजर आ रहे हैं। वहीं, अमेरिका में गैस की कीमत इतनी बढ़ चुकी है, कि आम आदमी परेशान हो चुका है। और इन सबके बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाने के अलावा कोई और ऐलान नहीं कर पाते हैं, जिसके बारे में रूस को पहले से ही पता था।

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    अचानक संकट में फंस गया अमेरिका

    अचानक संकट में फंस गया अमेरिका

    युद्ध के झंझावात में यूक्रेन फंसा हुआ है, लेकिन उसमें जलना अमेरिका को भी पड़ेगा। अमेरिका के लोगों को भी इस युद्ध की कीमत चुकानी पड़ेगी। रूस ने जैसे ही युद्ध शुरू किया, अमेरिका में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल की कीमत को पार कर गया और चूंकी पुतिन की मुख्य डिमांड ही है, कि कभी सोवियत संघ का हिस्सा रहे राष्ट्र नाटो में शामिल नहीं हो सकते हैं, लिहाजा अब इस युद्ध के बाद ये देश अब नाटो में शामिल होने से पहले सौ बार सोचेंगे और यह अमेरिका के लिए बड़ा झटका है। वहीं, संयुक्त राज्य अमेरिका सीधे यूक्रेन में रूस से लड़ने के लिए सेना नहीं भेजेगा और इस स्थिति मे आखिर अमेरिका किस तरह से यूक्रेन को बचाएगा, ये राष्ट्रपित बाइडेन अब समझ नहीं पा रहे हैं।

    अगर अमेरिका ने सेना भेजा तो...

    अगर अमेरिका ने सेना भेजा तो...

    रूस के राष्ट्रपति ने साफ चेतावनी दी है, कि अगर उसके रास्ते में कोई भी आता है, तो फिर उसे वो अंजाम भुगतना पड़ेगा, जिसकी कल्पना भी उसने नहीं की होगी। पुतिन की ये चेतावनी ये बताने के लिए काफी है, कि रूस अब इस जंग में किसी भी अंजाम की परवाह करने वाला नहीं है। और इसके साथ ही अब यह लगभग तय है कि वाशिंगटन को अपने यूरोपीय सहयोगियों को मजबूत करने के लिए सैनिकों को वापस भेजना होगा और 30 साल पहले उन्होंने अपने ठिकानों को छोड़ना शुरू कर दिया था। लातविया, लिथुआनिया और एस्टोनिया के बाल्टिक राष्ट्र अचानक कमजोर दिखने लगे हैं, जो यूक्रेन के विपरीत, नाटो के सदस्य हैं और अमेरिका की इन देशों के साथ रक्षा के लिए संधि है।

    यूक्रेन युद्ध का क्या हो सकता है असर?

    यूक्रेन युद्ध का क्या हो सकता है असर?

    अफगानिस्तान युद्ध के बाद यूक्रेन युद्ध ने साबित कर दिया है कि अब अमेरिका की सत्ता एक ‘कमजोर' राष्ट्रपति के हाथ में है और इस लड़ाई के साथ ही विश्व में लोकतांत्रिक अवधारणा कमजोर पड़ेगी और जिसके पास ताकत है, वो हथियार के दम पर एक संप्रुभू देश पर हमला करने से पीछा नहीं हटेंगे और आने वाले में अगर चीन, ताइवान पर हमला कर दें, तो ये आश्चर्य की बात नहीं होगी और अमेरिका के लिए उस वक्त और भी ज्यादा मुसीबत की बात होगी, क्योंकि रूस पर तो आर्थिक प्रतिबंध लगाकर उसे कुछ हद तक रोका भी जा सकता है, लेकिन चीन पर ना तो आर्थिक प्रतिबंध का असर होगा और ना ही अमेरिका की सेना ही चीन को रोकने में किसी भी हाल में सक्षम है। यानि, उदार लोकतंत्र को अब न केवल एक विद्रोही रूस से, बल्कि चीन में एक बढ़ती, सत्तावादी महाशक्ति से एक भयानक चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

    यूक्रेन के बारे में जानिए

    यूक्रेन के बारे में जानिए

    यूक्नेन रूस के मुकाबले काफी छोटा देश है और अभी जो हालात बने हैं, उसे देखते हुए इस बात की संभावना पहले से ही कम थी, कि रूस के खिलाफ यूक्रेन जवाबी कार्रवाई करेगा। डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि, यूक्रेन के पास रूस को रोकने का बस एक ही विकल्प है और वो है आत्मसर्पण करते हुए उसे नाटो में शामिल होने की जिद बंद कर दे। आपको बता दें कि, क्षेत्रफल के हिसाब से जहां रूस काफी ज्यादा बड़ा है, वहीं यूक्रेन की आबाजी सिर्फ 4 करोड़ 10 लाख के करीब है और क्षेत्रफल के लिहाज से यूक्रेन से तीन गुना ज्यादा बड़ा क्षेत्र रूस का है। इतना ही नहीं, यूक्रेन और रूस की अगर तुलना करें, तो रूस एक विकसित देश है, जबकि यूक्रेन रूस के मुकाबले काफी गरीब मुल्क है।

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