यूक्रेन संकट पर पुतिन के साथ खुलकर आया चीन, रूस से सभी प्रतिबंध हटाए, US को बहुत बड़ा झटका
पश्चिमी देशों द्वारा लगाए जा रहे प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने के लिए रूस के खिलाफ पूर्व में लगाए गये कई प्रतिबंधों को हटा लिया है।
बीजिंग/मॉस्को/वॉशिंगटन, फरवरी 25: यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका और पश्चिमी देशों जहां एक तरफ अमेरिका को प्रतिबंधों में जकड़ चुके हैं, वहीं, चीन ने बहुत बड़ा खेल कर दिया है और चीन ने रूस से तमाम बड़े प्रतिबंध हटाने के ऐलान कर दिए हैं। यानि, यूक्रेन युद्ध के बीच चीन ने अमेरिका को बहुत बड़ा झटका दे दिया है।

चीन ने हटाए रूस से प्रतिबंध
चीन ने यूक्रेन पर रूस के हमले की आलोचना करने से इनकार करते हुए यूक्रेन में संकट को हल करने के लिए बातचीत का आह्वान किया है और रूस के खिलाफ अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए जा रहे प्रतिबंधों के प्रभाव को कम करने के लिए रूस के खिलाफ पूर्व में लगाए गये कई प्रतिबंधों को हटा लिया है। चीन की तरफ से पहले कहा गया था कि, चीन प्रतिबंध लगाने में विश्वास नही करता है और फिर चीन ने रूस के खिलाफ कई बड़े प्रतिबंध हटा लिए हैं। माना जा रहा है कि, रूस को अमेरिका के प्रेशर से बचाने के लिए चीन ने ये कदम उठाए हैं और जिस बात की आशंका जताई जा रही थी, कि अमेरिका प्रतिबंधों की रस्सी को जितना कसेगा, रूस और चीन उतने करीब आएंगे, उसकी पुष्टि चीन के उठाए गये इस कदम से हो गई है।

कई हिस्से में बंटी दुनिया
यूक्रेन संकट के बीच दुनिया कई हिस्सों में बंटी नजर आ रही है। एक तरफ यूक्रेन के राष्ट्रपति ने साफ कर दिया है कि, वो यूक्रेन से अकेले जंग लड़ रहे हैं, वहीं, रूस के साथ चीन, पाकिस्तान, सऊदी अरब जैसे कई मुस्लिम देश खड़े नजर आ रहे हैं। भारत ने भी खुले तौर पर रूस का विरोध नहीं किया है और भारत का रूख कहीं ना कहीं, रूस के पक्ष का ही नजर आ रहा है। जबकि. यक्रेन के साथ अमेरिका, यूरोपीय देश और नाटो है, जिसने सैन्य मदद करने से मना कर दिया है। वहीं, दुनिया की नजर लगातार चीन पर बनी हुई थी, कि आखिर यूक्रेन विवाद पर चीन क्या फैसला करता है। लेकिन, किसी को इस बात की उम्मीद नहीं थी कि, चीन रूस के ऊपर से प्रतिबंधों को हटाने का ऐलान कर देगा।

रूस को चीन की डायरेक्ट मदद
चीनी अखबार साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, चीन की सरकार ने रूस के खिलाफ लगाए गये गेहू निर्यात प्रतिबंध को हटा लिया है। ये रूस के लिए बहुत बड़ी राहत है, क्योंकि दुनिया में सबसे ज्यादा गेहूं निर्यात रूस ही करता है और पश्चिमी देशों के प्रतिबंध के बाद रूस के गेहूं निर्यात पूरी तरह से ठप पड़ने वाली थी। लेकिन चीन के प्रतिबंध हटाने के बाद साफ हो गया है कि, अब रूस अपना गेहूं चीन को बेचेगा। अखबार के मुताबिक, चीन के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम ने यूक्रेन युद्ध के बीच रूस पर लगाए गये गेहूं प्रतिबंध को हटाने की घोषणा की है। अखबार ने कहा है कि, इस महीने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की बैठक के बाद ये फैसला लिया गया था।

यूक्रेन युद्ध पर क्या बोला चीन?
चीन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने एक प्रेस ब्रीफिंग में संवाददाताओं से कहा कि "यूक्रेन मुद्दा अपनी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की वजह से जटिल है... आज हम जो देख रहे हैं वह जटिल कारकों की परस्पर क्रिया है।" उन्होंने कहा कि, "चीन ताजा घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहा है और हमें अब भी उम्मीद है कि संबंधित पक्ष शांति के दरवाजे बंद नहीं करेंगे और इसके बजाय बातचीत और परामर्श में शामिल होंगे और स्थिति को आगे बढ़ने से रोकेंगे।" हालांकि, चीन ने यूक्रेन में सेना भेजने का तो समर्थन नहीं किया, लेकिन उसने प्रतिबंधों को मानने से इनकार कर दिया।

चीन के प्रतिबंध हटाने का मतलब?
गुरुवार को चीन की सीमा शुल्क एजेंसी ने रूस से गेहूं के आयात को मंजूरी दे दी है और रूस सबसे बड़े गेहूं उत्पादकों में से एक है, लेकिन अमेरिका और यूरोपीय देशों के प्रतिबंध के बाद अब रूस का गेहूं निर्यात बुरी तरह से प्रभावित होगा। लेकिन, चीन के प्रतिबंध हटाने के बाद रूस को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। ऐसा माना जा रहा है कि, रूस को पहले से ही पता था, कि अमेरिका गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगा सकता है, लिहाजा दोनों देशों ने पहले ही गेंहू को लेकर समझौता कर लिया। चीनी अखबार के रिपोर्ट के मुताबिक, 8 फरवरी को दोनों देशों के बीच गेहूं निर्यात से प्रतिबंध हटाने का फैसला किया गया। आपको बता दें कि, बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन कार्यक्रम में भाग लेने के लिए रूसी राष्ट्रपति ने चीन का दौरा किया था और इस दौरान शी जिनपिंग के साथ उनकी लंबी बैठक हुई थी।

कृषि वस्तुओं का बहुत बड़ा बाजार है चीन
आपको बता दें कि, चीन कृषि उत्पादों और उसके आपूर्तिकर्ताओं के लिए एक विशालकाय बाजार है, लेकिन अभी तक बैक्टीरिया और कंटेमिनेशन के डर से चीन ने रूसे से गेहूं खरीदने पर प्रतिबंध लगा रखा था। लेकिन, गुरुवार की घोषणा में कहा गया है कि, रूसी गेहूं के स्मट फंगस द्वारा संदूषण को रोकने के लिए "सभी उपाय" करेगा। यानि, जो खतरा अभी तक चीन को था, वो खतरा यूक्रेन युद्ध से पहले खत्म हो गया। इससे पहले, कीव में चीन के दूतावास ने अपने नागरिकों को घर पर रहने और लंबी दूरी की यात्रा करने की आवश्यकता होने पर अपने वाहन के अंदर या अपने वाहन पर चीनी झंडा लगाने की चेतावनी जारी की थी।

पश्चिमी देशों पर चीन के आरोप
बुधवार को चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता हुआ ने पश्चिमी देशों पर "भय और दहशत" पैदा करने और फैलाने का आरोप लगाया है और कहा कि अमेरिका कीव को हथियार मुहैया कराकर तनाव बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि, चीन रूस पर नए प्रतिबंधों का विरोध करता है। आपको बता दें कि, चीनी नेता शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन-रूस संबंध घनिष्ठ हुए हैं, जिन्होंने इस महीने की शुरुआत में बीजिंग में वार्ता में पुतिन की मेजबानी की थी। दोनों नेताओं ने पूर्व सोवियत गणराज्यों में नाटो के विस्तार के लिए मास्को के विरोध का समर्थन करते हुए एक संयुक्त बयान जारी किया था और ताइवान के स्व-शासित द्वीप पर चीन के दावे का समर्थन किया, जो बीजिंग और मॉस्को के लिए प्रमुख विदेश नीति के मुद्दे हैं।












Click it and Unblock the Notifications