युद्ध के बीच कैसे गुजरती है यूक्रेन के लोगों की रात? दहशत... युद्ध... मौत... इंतजार.. हर तरफ सिर्फ कोहराम

यूक्रेन के ज्यादातर हिस्सों में लोगों की जिंदगी की यही कहानी है। खासकर राजधानी कीव और यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीव में स्थिति काफी भयानक है।

कीव, मार्च 01: जब बच्चे रोना शुरू करते हैं, तो उनके पैरेंट्स उन्हें दबी आवाज में गीत सुनाना शुरू कर देते हैं... डर भगाने के लिए लोग एक दूसरे से लगातार बात करते रहते हैं, कहानियां सुनाते हैं, चर्चा करते हैं और जब बच्चे काफी रोने लगते हैं, तो फिर उन्हें परियों की कहानियां सुनना शुरू कर देते हैं। उनके पास खाना नहीं होता है और पीने के लिए पानी भी नहीं होता है और इस बेबसी में वो क्या करें, उन्हें कुछ समझ नहीं आता है।

डर में गुजरती है पूरी रात

डर में गुजरती है पूरी रात

यूक्रेन के ज्यादातर हिस्सों में लोगों की जिंदगी की यही कहानी है। खासकर राजधानी कीव और यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खारकीव में स्थिति काफी भयानक है। हजारों लोग अलग अलग बंकरों में छिपे हुए हैं, तो मेट्रो स्टेशनों पर रातें गुजार रहे हैं। हजारों की भीड़ में बुजुर्ग भी हैं, महिलाएं भी हैं और सबसे खराब स्थिति बच्चों की हैं। शहर में लगातार मिसाइल, बम फूटने और तोप से निकलने वाले गोले चलते रहते हैं और इस बीच रात एक एक पल गुजरती रहती है और लोग अपनी जान बचाने के लिए, जिसके जो भगवान हैं, उनसे मनुहार लगाते रहते हैं। रविवार की रात भी ऐसी ही एक रात थी और हवाई हमले को लेकर अलर्ट सायरन बजते ही सैकड़ों हजारों नागरिक कीव में मेट्रो नेटवर्क में रात बिताने के लिए भाग निकले।

कैसे गुजरती है लोगों की रात?

कैसे गुजरती है लोगों की रात?

मेट्रो स्टेशनों पर शरण लेने वाले लोगों में कुछ पत्रकार भी हैं और इस बात के गवाह बन रहे हैं, कि युद्ध कितनी तबाही मचाता है और मानवता को कैसे बेमौत मारता है। इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, एसोसिएटेड प्रेस के कुछ पत्रकारों ने बताया है कि, रात के वक्त आश्रितों की रात कैसे गुजरती है। पत्रकार बताते हैं कि, लोग बेबसी में आंसू बहाते रहते हैं और उनकी परेशानी का अंदाजा लगाना कतई आसान नहीं है।

एक भयानक सपना...

37 साल की रुत्सको, जो राजधानी कीव के पेचेर्सकाया मेट्रो स्टेशन में पर शरण ली हुई हैं, वो कहती हैं, "ये एक भयानक सपना है... और मुझे ऐसा लगता है कि यह सब मेरे साथ नहीं हो रहा है। आंखें सब कुछ देखती रहती हैं, लेकिन मन मानने से इनकार करता है। " रुत्सको के लिए लगातार ये चौथी रात है और अब वो बताती हैं कि, ''अब मैं सो पा रही हूं और डरावने सपने भी देख सकती हूं, लेकिन जागना सबसे ज्यादा मुश्किल है''। वो बताती है कि, ''उन्हें अपने दादा से विरासत में एक पियानो मिला था, जो पिछले युद्ध (2014) में बच गया था और इस पियानो को देखने के बाद उन्हें हौसला मिलता है''। लड़ाई अभी भी दक्षिण-पूर्वी यूक्रेनी शहर मारियुपोल में जारी है, जहां यूक्रेनी सेना ने अब तक रूसी सेना को आज़ोव सागर पर रणनीतिक बढ़त हासिल करने से रोक रखा है।

हमले के बीच कटती जिंदगी

हमले के बीच कटती जिंदगी

स्थानीय स्वयंसेवक एरवंड तोवमासियन ने कहा कि, 'भगवान न करे कि कोई भी रॉकेट हिट हो। इसलिए हमने सभी को यहां इकट्ठा किया है।" एरवंड तोवमासियन ने लोगों को शहर के एक जिम के तहखाने में इकट्ठा कर रखा है और उनके लिए जरूरी सुविधाओं को मुहैया कराने की कोशिश करते हैं। उनका छोटा बेटा उनके साथ ही लिपटा रहता है और वो सबकी जान बचाने के लिए लगातार संघर्ष करते रहते हैं। पिछले हफ्ते लड़ाई शुरू होने के बाद से आश्रय स्थलों पर पीने के पानी, भोजन और जनरेटर के लिए गैसोलीन की कमी देखी गई है, इसलिए लोग अपने अपने साथ खाने का सामान लाते हैं और उनका कम इस्तेमाल करते हैं, ताकि स्टॉक बना रहे, क्योंकि उन्हें कल की कोई खबर नहीं होती है।

पिछले युद्ध को करते हैं याद

आश्रयस्थलों पर मौजूद कई लोग 2014 में हुई गोलाबारी को भी याद करते हैं, जब रूस समर्थित अलगाववादियों ने शहर पर कुछ समय के लिए कब्जा कर लिया था। अन्ना डेलिना उस लड़ाई में बच गई थीं और अब उनके दो बच्चे हैं। अपने बच्चों को संभालने और उनके मन में बसे डर को हटाने के लिए वो लगातार कोशिश करती रहती हैं, उनके दोनों बच्चे एक ठंडे जिम के फर्श पर कंबल के नीचे लिपटे हुए हैं। रात का तापमान माइनस 4 डिग्री सेल्सियस से माइनस पांच डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, लिहाजा रात का वक्त और भी ज्यादा मुश्किल और क्रूर नजर आता है। वो बताती हैं, कि इस बार भी वही सबकुछ हो रहा है, लेकिन इस बार उनके साथ दो बच्चे भी हैं, जो युद्ध के अंजाम को भुगत रहे हैं।

अपनों से मिलकर भावुक होती आंखे

अपनों से मिलकर भावुक होती आंखे

देश के पूर्व में क्रामाटोर्स्क में सुरक्षा की उम्मीद में पश्चिम की ओर जाने वाली ट्रेन में महिला के चढ़ने से पहले पति को गले से लगाती है और फिर पोलैंड की तरफ शरण लेने के लिए ट्रेन से निकल जाती है। वहीं, राजधानी कीव लगातार युद्ध की प्रतिक्षा की प्रतिक्षा कर रहा है और राजधानी कीव के पेचेर्सकाया मेट्रो स्टेशन भी इस वक्त लोगों के लिए आश्रय स्थल बने हुए हैं, जहां लोग अपने अपने पालतू जानवरों के साथ आश्रय पा रहे हैं। मालिकों के साथ पालतू जानवर भी स्टेशनों पर नजर आते हैं।

बेटी को परियों की कहानी सुनाती मां

डेनमार्क की रहने वाली 32 साल की आर्किटेक्ट शेस्ताकोव भी अपनी पांच साल की बेटी के साथ राजधानी कीव में ही युद्ध में फंसी हुई हैं और उनकी रात भी राजधानी कीव के पेचेर्सकाया मेट्रो स्टेशन पर ही गुजरती है। धमाकों की आवाज और दिन रात एयर अलर्ट सायरनों की आवाज से उनकी बेटी जब डरकर रोने लगती है, तो फिर उसे वो परियों की कथा सुनाती हैं, ताकि उसका डर कम हो सके, लेकिन मां शेस्ताकोव खुद डरी हुई हैं और आने वाले वक्त को लेकर काफी तनाव मे हैं। वो अपनी तनाव को कम करने की कोशिश करते हुए बताती हैं कि, "आप एक बुरे सपने के अभ्यस्त हो सकते हैं और यह भी एक बुरा सपना है।" स्टेशन पर कई बुजुर्ग महिलाएं भी हैं, जिनसे एक कदम चलना मुहाल हुआ जा रहा है, लेकिन कई घंटों से वो प्यासी हैं। इस युद्ध के लिए कौन जिम्मेदार है, किसकी गलती है, इसपर घंटों और महीनों बहस हो सकती है, लेकिन हजारों लाखों लोगों की जिंदगी जिन काली रातों से गुजर रही हैं, उनकी कल्पना करना भी काफी मुश्किल है।

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