ब्रिटेन : भारतीय के घर में जान बूझकर लगाई गई आग

ब्रिटेन : भारतीय के घर में जान बूझकर लगाई गई आग

ब्रिटेन में एक भारतीय परिवार के घर में आगजनी की घटना हुई है. इस परिवार के सदस्य आगजनी से बचकर निकलने में कामयाब रहे.

मयूर कारलेकर ब्रिटेन में डिजिटल कंसल्टेंट हैं. वो अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ दक्षिण-पूर्व लंदन के बोर्कवुड पार्क इलाके में रहते हैं.

शनिवार की रात कारलेकर का पूरा परिवार सो रहा था. रात करीब 12.30 बजे पड़ोसियों ने उन्हें जगाया. उनके घर के बाहर आग की तेज़ लपटें उठ रही थीं. आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड को बुलाया गया.

घटना ने डरा दिया

बीबीसी मराठी से बातचीत में कारलेकर ने कहा "वो पल हमारे लिए डराने वाला था. दमकलकर्मियों ने हमें बताया कि आग को देखकर ऐसा नहीं लगता है कि ये आग सिगरेट से लगी होगी बल्कि ऐसा लगता है कि किसी ने जानबूझकर हमारे घर को आग लगाने की कोशिश की है.ये बात हमारे लिए वाकई डराने वाली थी."

बीते शनिवार को हुई इस घटना की जांच ब्रिटेन की मेट्रोपोलिटन पुलिस कर रही है. पुलिस ने बीबीसी को बताया कि वो इसकी हेट क्राइम के मामले के तौर पर जांच कर रहे हैं. अभी तक इस मामले में कोई भी गिरफ़्तारी नहीं हुई है लेकिन जांच चल रही है.

रिपोर्टों के मुताबिक इलाक़े के सीसीटीवी फ़ुटेज में नज़र आ रहा है कि चार-पांच लड़के, जिन्होंने अपने सिर ढक रखे हैं. वे कारलेकर के घर के बाहर बाड़े में आग जलाने की कोशिश कर रहे हैं.

पुलिस से शिकायत

मूल रूप से भारत के रहने वाले कारलेकर पिछले 20 सालों से ब्रिटेन में रह रहे हैं. वो कहते हैं कि इस घटना से उनका पूरी परिवार सदमे में है. पर ये हिंसा नफ़रत फ़ैलाने के लिए की गई या नहीं, इस पर कारलेकर कुछ भी नहीं कहते हैं.

44 वर्षीय कारलेकर कहते हैं, "हमने आज तक किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया और आज तक की ज़िंदगी में सिर्फ़ दूसरों की मदद की है. मैंने खुद कई बार बहुत से कामों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है और ऐसे में ये हमला सकते में डालने वाला है. न सिर्फ़ मेरे लिए बल्कि मेरे परिवार के लिए भी."

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कारलेकर ने इस घटना की कुछ तस्वीरों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर भी किया है. तस्वीरें देखकर ये अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि आग कितनी भयानक थी. इस हादसे में कारलेकर के घर का एक अच्छा-खासा हिस्सा प्रभावित हुआ है.

हालांकि कारलेकर को पुलिस से नाराज़गी भी है कि उन्होंने जांच घटना के 32 घंटे बाद शुरू की.

"पुलिस इस मामले को प्राथमिकता नहीं मान रही है. शायद जब तक कोई मर नहीं जाएगा तब तक पुलिस इसे वरीयता नहीं देगी और तब तक शायद ये बड़ा मामला नहीं बनेगा. पर ये ग़लत है."

पीड़ित परिवार ने इस मामले में लोगों से अपील की है कि अगर उन्हें कोई जानकारी हो तो वे सामने आएं ताकि इस मामले में न्याय मिल सके. "इस इलाक़े में ये इस तरह का दूसरा मामला है, इससे पहले एक लूट का मामला भी सामने आ चुका है. पर हमें लगता है कि ऐसे बहुत से मामले हुए होंगे जिनकी रिपोर्ट नहीं की गई होगी. हम चाहते हैं कि जिनके साथ भी ऐसा कुछ हुआ है वे सामने आएं और अपनी आवाज़ उठाएं. जब तक हम कुछ करेंगे नहीं तब तक इस तरह की घटनाएं रुकेंगी नहीं."

स्थानीय मीडिया में ज़्यादा जगह नहीं

एक ओर जहां भारत में इस ख़बर की काफी चर्चा है लेकिन ब्रिटेन के स्थानीय मीडिया में इस मामले को बहुत जगह नहीं दी गई है.

इस साल की शुरुआत में जारी हुए आधिकारिक आंकड़ों की मानें तो ब्रिटेन में बीते कुछ सालों में नफ़रत फ़ैलाने के उद्देश्य से हुई हिंसा में बढ़ोतरी हुई है, ख़ासतौर पर साल 2016 यूरोपीय संघ जनमत संग्रह होने के बाद से. साल 2016 से 2017 के बीच 80,393 मामले रिकॉर्ड किए गए जबकि साल 2015 से 2016 के बीच 62, 518 मामले रजिस्टर हुए. यूके होम ऑफ़िस ने साल 2011-2012 से इस तरह के आंकड़े जमा करने शुरू किए थे और तब से लेकर अभी तक का ये सबसे बढ़ा हुआ प्रतिशत है.

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