भारत में मिले कोरोना वायरस वेरिएंट के खिलाफ वैक्सीन की दो डोज ही सुरक्षित, ब्रिटिश रिसर्च में खुलासा

ब्रिटिश सरकार की शोध में पता चला है कि वैक्सीन की दो खुराक ले चुके लोग भारत में मिले कोरोना वायरस के वेरिएंट बी.1.617.2 से 81 प्रतिशत तक सुरक्षित हो जाते हैं।

लंदन, मई 23: भारत में कोरोना वायरस का जो वेरिएंट मिला है, उससे बचने के लिए वैक्सीन की दो खुराक बेहद जरूरी है। ब्रिटिश सरकार की रिसर्च में पता चला है कि भारत में मिले कोरोना वायरस के वेरिएंट से सर्वाधिक सुरक्षा के लिए वैक्सीन की दो खुराब काफी ज्यादा जरूरी है। ब्रिटेन में भारत में मिले कोरोना वायरस वेरिएंट के खिलाफ काफी लंबे वक्त से रिसर्च चल रही है, जिसमें पता चला है कि जिन लोगों ने वैक्सीन की दो खुराक ले ली है, वो बी.1.617.2 वेरिएंट से सुरक्षित हैं जबकि एक खुराक लेने वाले लोग कम सुरक्षित हैं।

वैक्सीन की दो खुराक असरदार

वैक्सीन की दो खुराक असरदार

ब्रिटिश सरकार की शोध में पता चला है कि वैक्सीन की दो खुराक ले चुके लोग भारत में मिले कोरोना वायरस के वेरिएंट बी.1.617.2 से 81 प्रतिशत तक सुरक्षित हो जाते हैं। वहीं, कोरोना वायरस के एक और वेरिएंट बी.1.1.7 के खिलाफ वैक्सीन की दो खुराक 87 प्रतिशत तक सुरक्षा देता है। कोरोना वायरस का बी.1.1.7 वेरिएंट सबसे पहली बार इंग्लैंड के दक्षिणी-पूर्वी हिस्से में मिला था। इंग्लैंड के पब्लिक हेल्थ की डेटा के मुताबिक वैक्सीन की दो खुराक सबसे ज्यादा सुरक्षा प्रदान करता है। पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड ने रिसर्च के दौरान मिले आंकड़ों को गवर्नमेंट्स न्यू एंड इमरजेंसी रेसपिरेटोरी वायरस थ्रेट एडवाइजरी ग्रुप के साथ शेयर किया है। शुक्रवार को जिन दो लोगों ने बैछठक में हिस्सा लिया था, उन्होंने खुलासा किया है कि जिन लोगों ने वैक्सीन की एक खुराक ली है, वो भारत में मिले वेरिएंट से सिर्फ 33 प्रतिशत ही सुरक्षित हैं। वहीं, फाइनेसियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक वैक्सनी की एक खुराक लेने वाले लोग कोरोना वायरस के बी.1.617.2 वेरिएंट और बी.1.1.7 वेरिएंट से 35 प्रतिशत कम सुरक्षित हैं।

भारत के लिए बड़ी चुनौती

भारत के लिए बड़ी चुनौती

ब्रिटेन का ये शोध भारत के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है। क्योंकि, भारत में अभी तक सिर्फ 3 प्रतिशत आबादी को ही कोरोना वायरस वैक्सीन की दो खुराक दी गई है। वहीं, भारत में इस वक्त कोरोना वायरस का कहर जो आप देख रहे हैं, उसकी वजह भारत में मिला कोरोना वायरस का बी.1.617.2 वेरिएंट ही है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अभी तक सिर्फ 4 करोड़ 30 लाख लोगों को कोरोना वायरस का दोनों खुराक दिया गया है। भारत में विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन कार्यक्रम 16 जनवरी को शुरू किया गया था और पहले चरण में भारत में 60 साल की उम्र से ज्यादा वाले लोगों को वैक्सीन की खुराक दी गई थी। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अभी तक करीब 16 करोड़ लोगों को वैक्सीन की एक खुराक दी गई है।

कोविशिल्ड और फाइजर वैक्सीन कारगर

कोविशिल्ड और फाइजर वैक्सीन कारगर

इंग्लैंड में जिन दो वैक्सीन पर रिसर्च किया गया है, उनमें ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका की कोविशिल्ड और अमेरिका में इस्तेमाल की जाने वाली वैक्सीन फाइजर शामिल है। आपको बता दें कि ऑक्सफोर्ड एस्ट्राजेनेका द्वारा तैयार की गई वैक्सीन का नाम कोविशिल्ड है, जिसे भारत में सीरम इंस्टीट्यूट तैयार कर रहा है और भारत में ज्यादातर लोगों को कोविशिल्ड वैक्सीन की खुराक ही दी जा रही है। इंग्लैंड की रिसर्च में पता चला है कि इन दोनों वैक्सीन में किसी एक वैक्सीन का दो डोज लेने के बाद आदमी भारत में मिले कोरोना वायरस के वेरिएंट बी.1.617.2 से 81 प्रतिशत कर सुरक्षित हो जाता है। आपको बता दें कि रिसर्च के दौरान 20 हजार सैंपल्स पर रिसर्च किया गया है। वहीं, आश्चर्य की बात ये है कि भारत सरकार ने जहां वैक्सीन की दो खुराक के बीच की समयावधि बढ़ाकर 12 हफ्ते का कर दिया है वहीं, इंग्लैंड सरकार ने वैक्सीन की दो खुराक के बीच की समयावधि घटा दी है।

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