तुर्की में अबकी बार किसकी सरकार? राष्ट्रपति अर्दोआन के खिलाफ 3 उम्मीदवार, जानें किसमें कितना है दम?
तुर्की में छह विपक्षी दल, जिन्हें "टेबल ऑफ सिक्स" कहा जाता है, वो मई में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन के खिलाफ एकजुट हैं। ये एक तरह का महागठबंधन की तरह ही है, जैसा भारत में होता है।

Turkish general election 2023: राष्ट्रपति रेचेप तईप अर्दोआन तुर्की की राजनीति में धड़कते हुए दिल की तरह हैं और इस बार उनकी साख प्रतिष्ठा पर लगी हुई है। तुर्की में अगले महीने 14 मई को राष्ट्रपति चुनाव होने हैं और देश की सभी राजनीतिक पार्टियों ने चुनाव में जीत हासिल करने के लिए अपनी ताकत झोंक दी है।
तुर्की के मौजूदा राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन, जो करीब 30 सालों से राजनीति में हैं, वो एक बार फिर से अपनी किस्मत आजमा रहे हैं, लेकिन 6 फरवरी को आए विनाशकारी भूकंप ने उनके रास्ते मुश्किल कर दिए हैं।
तुर्की में 6 फरवरी को भूकंप के दो बड़े झटके आए थे, जिसमें करीब 50 हजार लोग मारे गये। आरोप लगे, कि मकानों के निर्माण में भारी लापरवाही की गई और भूकंप रोधी इमारतों का निर्माण ही नहीं किया गया, जबकि देश पहले भी विनाशकारी भूकंपों का गवाह रहा है।
आईये जानने की कोशिश करते हैं, कि राष्ट्रपति पद की रेस में शामिल अर्दोआन और उनके तीन अन्य प्रतिद्वंदी कौन हैं और चुनाव में उनकी क्या संभावनाए हैं।
अर्दोआन की राजनीति को समझिए
राष्ट्रपति अर्दोआन अब 69 साल के हो चुके हैं और उन्होंने 1994 में ही अपनी राजनीति शुरू कर दी थी, जब वो पहली बार इंस्ताबुल के मेयर चुने गये थे। वो 1998 तक मेयर रहे और देश की राजनीति में आगे का सफर तय करने लगे।
उन्होंने 2001 में नरमपंथी इस्लामिक जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (AKP) की स्थापना की और एक साल बाद इसे चुनावों में जीत दिलाई।

साल 2003 से 2014 तक, उन्होंने देश के प्रधानमंत्री के रूप में काम किया और फिर वो देश के राष्ट्रपति बन गये। लेकिन, राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने तुर्की के संविधान में संशोधन कर दिया और राष्ट्रपति पद की शक्ति में विस्तार करना शुरू कर दिया। साल 2017 में, उन्होंने संविधान संशोधन कर राष्ट्रपति को पूरी शक्ति गेने के लिए एक जनमत संग्रह तक करा डाला और देश की कार्यकारी की सारी शक्तियां अपने हाथों में ले ली। ये कुछ कुछ ऐसा ही है, जैसे श्रीलंका, चीन और रूस में देखा गया। हालांकि, चीन और रूस में शी जिनपिंग और पुतिन ने ऐसी व्यवस्था की है, कि वो जिंदगी भर राष्ट्रपति रहेंगे, लेकिन तुर्की में फिलहाल ऐसा नहीं हो पाया है।
लेकिन, तुर्की की फिलहाल स्थिति ये है, कि देश की राजनीति, प्रशासन और देश की न्यायपालिका पर जो पकड़ राष्ट्रपति अर्दोआन की है, वो तुर्की के पिछले 100 सालों के इतिहास में किसी भी नेता के पास नहीं रहा है। 2012 में भी उन्होंने शक्तियों के पृथक्करण को एक "बाधा" बताया था।

हालांकि, आर्थिक संकट ने तुर्की को भी परेशान कर रखा है और मानवाधिकार उल्लंघन की वजह से भी अर्दोआन काफी दवाब में हैं। पिछले एक साल में तुर्की के कई अभिनेताओं और सिंगर्स को राष्ट्रपति के खिलाफ बोलने के आरोप में जेल भेजा गया है।
अर्दोआन की AKP पार्टी वर्तमान में अल्ट्रानेशनलिस्ट नेशनलिस्ट मूवमेंट पार्टी (MHP) के साथ गठबंधन का हिस्सा है।
केमल किलिकडारोग्लू भी हैं उम्मीदवार
हालांकि, केमल किलिकडारोग्लू को कभी भी विपक्ष का स्वाभाविक नेता नहीं माना गया था, लेकिन वह जीत हासिल करने में कामयाब रहे हैं और 14 मई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में छह दलों के विपक्षी गठबंधन का प्रतिनिधित्व करेंगे।

74 साल के केमल किलिकडारोग्लू एक पूर्व नौकरशाह हैं और उन्हें भ्रष्टाचारियों पर सख्त कार्रवाई करने के लिए जाना जाता रहा है। उनका एक उपनाम "डेमोक्रेटिक अंकल" भी है। वह 2007 से धर्मनिरपेक्ष रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (सीएचपी) के अध्यक्ष हैं।
किलिकडारोग्लू और उनका छह दलों का विपक्षी गठबंधन, तुर्की को बदलने और इसे वापस "मजबूत संसदीय प्रणाली" में बदलने का वादा कर रहा है। वे अर्दोआन के कई संवैधानिक परिवर्तनों को फिर से पूर्ववत करना चाहते हैं, जिससे उनकी शक्ति में वृद्धि हुई है।
6 दलों का विपक्षी गठबंधन तुर्की में फिर से संसदीय लोकतंत्र की स्थापना करने, कानून का शासन स्थापित करने, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया की स्वतंत्रता को बहाल करने के वादे के साथ चुनावी मैदान में है। इस गठबंधन का मकसद देश की संस्थाओं के अधिकारों को वापस करना है और ये शक्ति का विभाजन चाहता है।
यदि किलिकडारोग्लू राष्ट्रपति चुने जाते हैं, को वो राष्ट्रपति के अपमान वाला कानून खत्म कर देंगे, जिसमें राष्ट्रपति का अपमान करना एक आपराधिक अपराध है। इस कानून के जरिए अर्दोआन अभी तक दर्जनों लोगों को जेल भेज चुके हैं। ये बात उन्होंने हालिया समय में DW को दिए गये इंटरव्यू में कहा है।
किलिकडारोग्लू को इस्तांबुल के लोकप्रिय मेयर एक्रेम इमामोग्लू और उनके समान रूप से लोकप्रिय अंकारा के मेयर मंसूर यावस का भी समर्थन प्राप्त है। अगर किलिकडारोग्लू जीतते हैं, तो वो इमामोग्लू और यावस को उप राष्ट्रपति नामित करेंगे। वहीं, देश के कई प्रभावशाली कुर्द राजनेता उम्मीद करते हैं, कि तुर्की के कुर्द मतदाता, जिनकी तादाद करीब 15 से 20% के बीच हैं, वो 14 मई को होने वाले चुनाव में किलिकडारोग्लू का समर्थन करेंगे।
मुहर्रम इन्स भी राष्ट्रपति बनने की रेस में
राष्ट्रपति पद की रेस में मुहर्रम इन्स भी शामिल हैं, हालांकि उन्हें विशेष रूप से लोकप्रिय नहीं माना जाता हैं। तुर्की के पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का कहना है, कि विपक्ष के वोट में सेंधमारी करने के लिए तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने ही मुहर्रम इन्स को राष्ट्रपति चुनाव में खड़ा किया है।

मुहर्रम इन्स के बारे में कहा जाता है, कि वो विपक्ष के वोटरों के बीच सेंधमारी कर सकते हैं। लिहाजा, तुर्की के अंदर उनकी उम्मीदवारी की भारी आलोचना की जा रही है।
58 साल के मुहर्रम इन्स 2018 में भी राष्ट्रपति पद की रेस में शामिल हुए थे और 30 प्रतिशत वोट हासिल किया था। पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स का कहना है, कि 2018 में उन्होंने अर्दोआन को गंभीर चुनौती दी थी, लेकिन इस बार वो राजनीतिक हासिए पर जा चुके हैं।
हालांकि, मुहर्रम इन्स ने 2018 चुनाव के बाद उन्होंने सीएचपी से इस्तीफा दे दिया और अपनी खुद की पार्टी, "होमलैंड पार्टी" (मेमलेकेट पार्टिसि) की स्थापना की। उन्होंने सीएचपी पर आरोप लगाया, कि पांच साल पहले जब वह राष्ट्रपति पद की रेस में शामिल हुए थे, तो पार्टी के अंदर से ही उन्हें पर्याप्त समर्थन नहीं मिला। कई सीएचपी समर्थक अब इन्स को फूका कारतूस बता रहे हैं।
किलिकडारोग्लू ने मुहर्रम इन्स को अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के लिए मनाने की कोशिश की थी, लेकिन इन्स नहीं माने।
सिनान ओगन भी हैं उम्मीदवार
तुर्की राष्ट्रपति चुनाव में खड़े होने वाले चौथे उम्मीदवार हैं सिनान ओगन, जिनके पास शायद राष्ट्रपति पद की दौड़ जीतने का कम मौका है। हालांकि, उन्हें छोटे, अल्ट्रानेशनलिस्ट पार्टियों के गठबंधन का समर्थन प्राप्त है।

2011 में, उन्होंने MHP पार्टी के टिकट पर संसद का चुनाव जीता था और 2015 में उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। हालांकि एक अदालती मामले के बाद वो पार्टी में फिर से शामिल हो गए। 2017 में, ओगन को फिर से निष्कासित कर दिया गया। MHP ने कहा है, कि उनके व्यवहार ने "पार्टी की एकता को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया" था और उन पर "पार्टी अध्यक्ष के प्रति गंभीर अनुशासनहीनता" का आरोप लगाया गया था। हालांकि उस समय उन्हें MHP पार्टी नेतृत्व के लिए एक संभावित उम्मीदवार माना जाता था, लेकिन आज उनके पास राष्ट्रपति पद जीतने का कोई वास्तविक मौका नहीं है।
लेकिन, सिनान ओगन भी राष्ट्रपति अर्दोआन के लिए रास्ता साफ करेंगे और विपक्ष का वोट काटेंगे, जिससे 6 विपक्षी दलों के गठबंधन उम्मीदवार किलिकडारोग्लू के जीतने की राह मुश्किल होगी।
सिनान ओगन एक धार्मिक कट्टर नेता हैं और उनकी विदेश नीति का रुख स्पष्ट है। वह ग्रीस के स्वतंत्रता दिवस को मनाना बंद करने का वादा करते हैं और इस बात पर जोर देते हैं, कि तुर्की को तुर्किक राज्यों, अजरबैजान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
काफी कड़ा होने वाला है चुनाव
तुर्की राष्ट्रपति चुनाव में चार उम्मीदवार हैं और तुर्की की राजनीति को समझने वाले लोग जानते हैं, कि हर एक वोट की काफी अहमियत होने वाली है। थोड़ा सा वोट ही चुनाव परिणाम में अंतर ला सकता है।
1994 में अर्दोआन जब राष्ट्रपति चुनाव में खड़े हुए थे, तो वो अकेले प्रत्याशी नहीं थे। चुनाव में गैर-इस्लामी पार्टियों के चार उम्मीदवारों ने क्रमशः 22, 20, 15 और 12% वोट हासिल किए और 25 प्रतिशत वोट पाकर अर्दोआन ने जीत हासिल कर ली थी।
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इस साल, तुर्की के विपक्ष के बीच एक बार फिर डर है, कि इसकी खुद की फूट ही अर्दोआन को चुनाव जीतने में मदद कर सकती है।
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