तुर्की राष्ट्रपति चुनाव: रेसेप तैयप एर्दोगन की हुई जीत, दूसरी बार संभालेंगे सत्ता

अंकारा। तुर्की की जनता ने एक बार फिर रेसेप तैयप एर्दोगन को अपना राष्ट्रपति चुन लिया है। तुर्की में रविवार (24 जून) को हुए राष्ट्रपति चुनाव में एर्दोगन की एके पार्टी को 50 फिसदी से ज्यादा वोट मिले हैं। पिछले करीब दो साल से इमेरजेंसी झेल रहे तुर्की की जनता ने फिर से एर्दोगन पर ही विश्वास जताते हुए, उन्हें दूसरी बार अपना राष्ट्रपति चुन लिया है। स्टेट मीडिया के मुताबिक, 99 फिसदी वोट काउंट हो चुके हैं, जिसमें एर्दोगन की पार्टी को सबसे ज्यादा 53 फिसदी वोट मिले हैं। वहीं, उनके प्रतिद्वंदी मुहर्रम इंजे को 31 फिसदी वोट मिले हैं। जीत के बाद सुबह 3 बजे 64 वर्षीय एर्दोगन अपने घर की बाल्कनी में बाहर आए और विक्ट्री स्पीच देते हुए कहा कि यह जीत मेरे 81 मिलियन जनता की जीत हैं।

एर्दोगन को सबसे ज्यादा 52.5 फिसदी वोट

एर्दोगन को सबसे ज्यादा 52.5 फिसदी वोट

सोशलिस्ट और रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (CHP) के उम्मीदवार मुहर्रम इंजे ने अपनी हार मान ली है। तुर्की राष्ट्पति चुनाव में कुल 6 उम्मीदवार मैदान में थे। एर्दोगन को सबसे ज्यादा 52.5 फिसदी वोट मिले हैं, उसके बाद इंजे को 30.7 फिसदी, देमिर्तास को 8.4 फिसदी और एक्सेनर को 7.3 फिसदी ने लोगों ने वोट किया। उधर विपक्षी पार्टियों ने हार को स्वीकार करते हुए कहा है कि वे तुर्की में लोकतांत्रिक मुल्यों के लिए अपनी लड़ाई को जारी रखेंगे।

और ज्यादा ताकतवर होंगे एर्दोगन

और ज्यादा ताकतवर होंगे एर्दोगन

इस जीत के बाद एर्दोगन अब और ज्यादा ताकतवर हो जाएंगे। नए संविधान के मुताबिक अब एर्दोगन की सत्ता संभालेंगे। एर्दोगन के शासन में अब सरकारी अधिकारियों, मंत्रियों और उप-राष्ट्रपति की सीधी नियुक्ती होगी। एर्दोगन ना सिर्फ अपने मुल्क के कानून सिस्टम में दखल देंगे, बल्कि उनके पास तुर्की में आपातकाल लगाने की भी शक्ति होगी। अपनी जीत के बाद एर्दोगन देश के प्रधानमंत्री की शक्तियों को भी कम कर देंगे। आलोचकों का मानना है कि इस जीत के बाद एर्दोगन के पास कई अभूतपूर्व शक्तियां होगी। 11 साल तक तुर्की के प्रधानमंत्री रहे एर्दोगन पहली बार 2014 में राष्ट्रपति बने थे। अब 2023 तक एर्दोगन तुर्की के राष्ट्रपति बने रहेंगे।

एर्दोगन की चुनौतियां

एर्दोगन की चुनौतियां

पिछले करीब दो साल से आपातकाल को झेल रहा तुर्की की इकनॉमी को बहुत नुकसान हुआ है। इस चुनाव में भी देश की इकनॉमी को फिर से पटरी पर लाने के लिए जोर-शोर से आवाजें उठी। महंगाई से पार पाना तुर्की के राष्ट्रपति के लिए सबसे बड़ी चिंता में से एक है। वहीं, कुर्दिश आतंकियों के हमले झेल रहा तुर्की के लिए आतंकवाद भी सिरदर्द बना हुआ है। सीरिया में इस्लामिक स्टेट के आतंकियों से लड़ना और शरणार्थियों को वापस भेजना एर्दोगन की सबसे बड़ी चुनौती में से एक है।

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