डोनाल्ड ट्रंप का फिर दिखा दोहरा रवैया, पाकिस्तान को एक ओर आतंकी बताया और टैरिफ में दी बड़ी राहत
Trump Tariff on India and Pakistan 2025: अमेरिका की विदेश नीति में एक बार फिर 'दोहरा मापदंड' (Double Standard) साफ तौर पर देखने को मिला है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 94 देशों पर आयात शुल्क (Import Tariff) लगाने वाले कार्यकारी आदेश पर दस्तखत कर दिए हैं, जो 7 अगस्त 2025 से लागू होगा।
आश्चर्यजनक रूप से भारत पर 25% का कठोर टैरिफ लगाया गया है, जबकि आतंकवाद को पनाह देने के लिए बदनाम पाकिस्तान, जिसे अमेरिका खुद आतंकी नेटवर्कों के समर्थन के लिए कठघरे में खड़ा कर चुका है, उसे 19% का रियायती टैरिफ दिया गया है। यही नहीं, बांग्लादेश पर भी टैरिफ को 35% से घटाकर 20% कर दिया गया है।

अमेरिका का दोहरा रवैया
एक तरफ अमेरिका की सरकार पाकिस्तान को आतंकवाद फैलाने वाला देश मानती है, दूसरी तरफ उसी देश को व्यापार में राहत दी जा रही है। इससे अमेरिका की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठते हैं।
टैरिफ दरों का तुलनात्मक विश्लेषण
| देश | पहले टैरिफ (%) | अब टैरिफ (%) | |
| भारत | 25% | 25% | कोई राहत नहीं |
| पाकिस्तान | 29% | 19% | 10% की राहत |
| बांग्लादेश | 35% | 20% | 15% की राहत |
आतंक पर कठोर, व्यापार में उदार?
ट्रंप प्रशासन की यह नीति दोहरे मापदंड का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। एक ओर FATF (Financial Action Task Force) में पाकिस्तान को आतंकी वित्तपोषण के मामलों में घसीटा जाता है, वहीं दूसरी ओर व्यापारिक छूट देकर उसके लिए रास्ता आसान कर दिया जाता है।
भारत को क्यों नहीं मिली राहत?
विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत पर टैरिफ में कोई राहत न देना भारत-अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में बढ़ते तनाव का संकेत है। जबकि भारत वैश्विक मंचों पर अमेरिका का रणनीतिक साझेदार रहा है, ऐसे में इस फैसले से भरोसे में दरार पड़ सकती है।
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ट्रंप के टैरिफ से देश में मचा हड़कंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद देश के कारोबारी और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों और उद्यमियों के बीच असमंजस और चिंता का माहौल बन गया।
उद्योग संगठनों और आर्थिक विशेषज्ञों ने ट्रंप के इस फैसले को अनुचित और एकतरफा करार दिया है। उनका मानना है कि इससे भारत की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका लग सकता है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक व्यापार पहले ही अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है।
उधर, राजनीतिक मोर्चे पर विपक्ष ने सरकार को घेरा है। कई विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि सरकार इस टैरिफ के खिलाफ केवल कूटनीतिक भाषा का सहारा न ले, बल्कि खुलकर विरोध दर्ज कराए और अमेरिका को स्पष्ट संदेश दे कि भारत किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
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