इन देशों में है इस्लाम के खिलाफ सख्त कानून, मस्जिद बनाने, बुर्का पहनने पर है रोक
यह पहली बार नहीं है जब इस्लाम की मान्यता खत्म की गई है। इससे पहले भी कुछ देश ऐसे हैं जहां ऐसे प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। अंगोला, स्लोवाकिया ऐसे देश हैं जहां इस्लाम पूरी तरह से बैन है।
नई दिल्ली, 25 जूनः दुनिया के सबसे बड़े धर्मों में शामिल इस्लाम की मान्यता ट्यूनिशिया में खत्म होने जा रही है। अफ्रीकी देश ट्यूनीशिया में राष्ट्रपति कैस सैईद एक ऐसे संवैधानिक मसौदे को मंजूरी देने जा रहे हैं, जिससे इस्लाम को मिली राज्यधर्म की मान्यता खत्म हो जाएगी। राष्ट्रपति का यह फैसला बेहद चौंकाने वाला है क्योंकि ट्यूनीशिया मुस्लिम बहुल देश है। कैस सैईद ने कहा कि राष्ट्र के नवीन संविधान के ड्राफ्ट संस्करण में किसी राजधर्म के लिए कोई स्थान है, यानी ट्यूनीशिया प्रमुख रूप से इस्लाम बाहुल्य होकर भी एक पंथनिरपेक्ष राष्ट्र होगा, जहां कट्टरपंथ के लिए कोई स्थान नहीं होगा।
तस्वीर- प्रतीकात्मक

बनने जा रहा नया संविधान
ट्यूनीशिया ऐसा देश है, जहां बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी होने के बाद भी वहां शरिया का पालन नहीं किया जाता है। इसका कानूनी स्ट्रक्चर अधिकतर यूरोपीय सिविल लॉ पर आधारित है। ट्यूनीशिया के 2014 के संविधान के अध्याय-1 के पहले अनुच्छेद में कहा गया है कि ट्यूनीशिया एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है और इस्लाम इसका धर्म और अरबी इसकी भाषा है। लेकिन अब ट्यूनीशिया का नया संविधान इसकी जगह लेगा। इस नए संविधान में इस्लाम राज्य के आधिकारिक धर्म के तौर पर नहीं रहेगा, बल्कि ये एक उम्माह यानी कि एक समुदाय के रूप में होगा।

इस्लाम पर लगा है प्रतिबंध
हालांकि यह पहली बार नहीं है जब इस्लाम की मान्यता खत्म की गई है। इससे पहले भी कुछ देश ऐसे हैं जहां ऐसे प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। अंगोला, स्लोवाकिया ऐसे देश हैं जहां इस्लाम पूरी तरह से बैन है। वहीं इस्तोनिया जैसे देश भी हैं जहां एक भी मस्जिद नहीं है।

प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश
प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश
इस्लाम धर्म और मुसलमानों पर पाबंदी लगाने वाला अंगोला दुनिया का पहला देश बना। यहां 2013 में इस्लाम पर बैन लगाया गया था। मंत्री रोसा के मुताबिक ये फैसला देश में पनप रहे कई अवैध धार्मिक मतों को रोकने की कड़ी में लिया गया था। मंत्री ने यह बयान देश की संसद में देते हुए कहा था कि अंगोला की संस्कृति के खिलाफ जो भी मत हैं, उन्हें रोकने के लिए यह जरूरी कदम है।

रहते हैं 8 लाख मुसलमान
अंगोला अफ्रीका महादेश का हिस्सा है जहां की आबादी लगभग 3 करोड़ है। अंगोला में 60 मस्जिदें हैं और यहां लगभग 8 लाख मुसलमान रहते हैं। ये मुस्लिम अपने धर्म को मानने के लिए स्वतंत्र हैं लेकिन इस धर्म को यहां मान्यता समाप्त कर दी गई है। हालांकि यहां के मुसलमान चाहते हैं कि एक बार फिर से देश में उनके धर्म को मान्यता मिले और इसके लिए वे प्रयास भी कर रहे हैं।

मस्जिद बनाने की नहीं है इजाजत
स्लोवाकिया ऐसा देश है जहां मुस्लिम तो जरूर रहते हैं लेकिन यहां न तो एक भी मस्जिद है और न ही उसे बनाने की इजाजत है। 30 नवबर 2016 को स्लोवाकिया ने एक कानून पास कर इस्लाम को आधिकारिक मजहब का दर्जा देने पर रोक लगा दी थी। यह मुल्क इस्लाम को एक मजहब के तौर पर मान्यता नहीं देता है। वहीं, यह देश अपनी बॉर्डर में सिर्फ ईसाई माइग्रेंट्स को ही आने की इजाजत देता है। यानी, अगर देश की सीमा पार करने की कोशिश कोई मुस्लिम करता है, तो उसे भगा दिया जाता है।

2016 में बना था कानून
2016 से स्लोवाकिया में इस्लाम को राजकीय मान्यता प्राप्त धर्म बनना असंभव कर दिया था। जिससे यह देश यूरोप के सभी देशों में इस्लाम के खिलाफ सबसे कठोर कानूनों वाला देश बन गया। बीते कुछ सालों में यूरोप भर में हुए सिलसिलेवार इस्लामी आतंकी हमलों के बाद इस महाद्वीप में मुस्लिम विरोधी भावना घर कर गई है। स्लोवाकिया एकमात्र ऐसा यूरोपियन यूनियन सदस्य देश है, जहां कोई भी वैध आधिकारिक मस्जिद नहीं है। इस देश में मुस्लिम समुदाय किराए के घरों या फिर अस्थायी प्रार्थना घरों में ही मिलते हैं।












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