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मर्दों के गर्भनिरोध की गोली चूहों में 99 फीसदी कामयाब

प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली, 24 मार्च। वैज्ञानिक इस दवा का इंसान पर परीक्षण इस साल के आखिर में शुरू करेंगे. अब तक हुई खोज की जानकारी अमेरिकन केमिकल सोसायटी की अगली बैठक में पेश की जाएगी जो इसी साल के वसंत में होनी है.

गर्भनिरोध में पुरुषों की दिलचस्पी

इस दवा को जन्म नियंत्रित करने के उपायों में काफी अहम माना जा रहा है इसके साथ ही अब इस जिम्मेदारी में पुरुष भी शामिल हो जाएंगे. 1960 के दशक में पहली बार गर्भनिरोधक गोलियों को मंजूरी मिली थी और उस वक्त से ही रिसर्चर पुरुषों के लिए इसे तैयार करने में दिलचस्पी दिखा रहे थे.

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यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के छात्र मोहम्मद अब्दुल्लाह अल नोमान इस रिसर्च को अमेरिकन केमिकल सोसायटी के सामने पेश करेंगे. उन्होंने समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, "कई रिसर्चों ने दिखाया है कि पुरुष भी अपने पार्टनर के साथ गर्भ को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी बांटना चाहते हैं."

फिलहाल पुरुषों के लिए कंडोम और नसबंदी का तरीका ही मौजूद है.

कंडोम और नसबंदी

अभी तक सिर्फ कंडोम और नसबंदी का उपाय ही पुरुषों के पास मौजूद हैं. नसबंदी को उलटने की सर्जरी काफी महंगी है और अकसर उतनी कामयाब भी नहीं होती.

महिलाओं के लिए जो गोलियां मौजूद हैं वो हॉर्मोंनों का इस्तेमाल कर माहवारी के चक्र को बाधित कर देती हैं. ऐसी गोली पुरुषों के लिए बनाने की जो कोशिश हुई वह उनके सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरॉन को निशाना बनाती है.

मुश्किल यह है कि इसके वजन बढ़ने, तनाव और कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ने जैसे साइड इफेक्ट होते हैं. इसके कारण दिल की बीमारी का खतरा बढ़ जाता है.

महिलाओं के लिए जो गोलियां हैं उनके भी साइड इफेक्ट हैं लेकिन चूंकि महिलाओं के सामने इन गोलियों को ना लेने पर गर्भधारण की चुनौती होती है इसलिए वो जोखिम का आकलन अलग तरीके से करती हैं.

महिलाओं के गर्भनिरोध की गोलियों का भी साइड इफेक्ट होता है

कैसे काम करती है दवा

हॉर्मोन रहित दवा तैयार करने के लिए नोमान ने 'रेटिनोइक एसिड रिसेप्टर, आरएआर अल्फा' नाम के प्रोटीन को लक्ष्य बनाया. शरीर में विटामिन ए कई रूपों में बदला जाता है इनमें से एक है रेटिओनिक एसिड जो कोशिकाओं की वृद्धि, शुक्राणुओं के निर्माण और भ्रूण के विकास में अहम भूमिका निभाता है.

रेटिनोइक एसिड को इन सब कामों के लिए आरएआर अल्फा से संपर्क करना पड़ता है. प्रयोगों में दिखा है कि जिन चूहों में आरएआर अल्फा पैदा करने वाली जीन नहीं होती वो नपुंसक होते हैं. नोमान ने अपने प्रयोग के लिए एक ऐसा कंपाउंड तैयार किया है जो आरएआर अल्फा के काम को रोक देता है. कंप्यूटर मॉडल के जरिए उन्होंने बेहतरीन मॉलिक्यूल स्ट्रक्चर तैयार किया है. नोमान ने बताया, "अगर हम यह जानते हों कि चाभी का छेद कैसा है तो हम बेहतर चाभी बना सकते हैं, ऐसी ही कंप्यूटर मॉडल की भूमिका होती है."

इन्होंने जो केमिकल बनाया है उसका नाम वाईसीटी529 है और इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह केवल आरएआर अल्फा से ही संपर्क करे, आरएआर बीटा और आरएआर गामा से नहीं ताकि साइड इफेक्ट को जितना हो सके कम किया जाए.

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दवा बंद असर खत्म

चार हफ्ते तक चूहों को यह गोलियां खिलाने के बाद वाईसीटी529 ने शुक्राणुओं की संख्या बहुत कम कर दी थी और यह सहवास के परीक्षणों में गर्भधारण को 99 फीसदी तक रोकने में सफल रहा.

रिसर्चरों ने वजन, भूख और बाकी सभी गतिविधियों पर भी निगरानी रखी और इसका कोई बुरा असर नहीं दिखा. हालांकि निश्चित रूप से चूहे सिरदर्द या फिर मूड खराब होने जैसी शिकायत तो नहीं कर सकते.

चार से छह हफ्ते के बाद दवा बंद कर दी गई जिसके बाद चूहे एक बार फिर बच्चे पैदा करने में सफल हुए.

वैज्ञानिकों की इस टीम को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ और द मेल कॉन्ट्रासेप्टिव इनिशिएटिव से धन मिलता है. ये लोग इंसानों में इसका परीक्षण शुरू होने के लिए 'योर चॉइस थेराप्यूटिक्स' के साथ काम कर रहे हैं जो 2022 की तीसरी तिमाही में शुरू हो जाएगा.

एक बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि क्या महिलाएं पुरुषों पर इस बात के लिए भरोसा कर सकती हैं कि वे इसका इस्तेमाल करेंगे. हालांकि सर्वेक्षणों के नतीजे बताते हैं कि ज्यादातर महिलाएं अपने पार्टनरों पर भरोसा करती हैं और बड़ी संख्या में पुरुष भी यह संकेत दे रहे हैं कि वे दवा खाने के लिए तैयार हैं.

एनआर/आरपी (एएफपी)

Source: DW

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