तालिबान के सामने घुटनों पर आई अफगान सरकार, रिपोर्ट के मुताबिक दिया ये ऑफर
दोहा, 12 अगस्त: अमेरिकी इंटेलिजेंस एजेंसी ने एक दिन पहले अनुमान लगाया था कि तालिबान को काबुल पर नियंत्रण करने में मुश्किल से 90 दिन लगेंगे। लेकिन, लगता है कि अफगानिस्तान की अशरफ गनी सरकार जल्द ही उनके आगे घुटने टेक देगी। अब जानकारी मिल रही है कि अफगान सरकार तालिबान को सत्ता में साझेदार बनाकर उनकी हिंसा को रोकना चाह रही है। अफगान सरकार की ओर से डील की यह कोशिश कतर की राजधानी दोहा में चल रही है। हालांकि, तालिबान के तेवरों से लगता नहीं है कि वह इसपर भी हथियार डालने को तैयार होंगे। दूसरी तरफ अमेरिका ने अफगानिस्तान को इस मुसीबत में छोड़कर निकलने का फैसला जरूर किया है, लेकिन वह किसी न किसी रूप में इस संघर्ष में अभी भी मौजूद है।

तालिबान के सामने घुटनों पर आई अफगान सरकार!
कतर में अफगान सरकार के वार्ताकारों ने देश में जंग खत्म करने के लिए तालिबान को सत्ता में साझेदारी करने का ऑफर दिया है। गुरुवार को सरकारी वार्ताकारों के सूत्रों के हवाले से एएफपी ने ये खबर दी है। सूत्र ने कहा है, 'हां, सरकार ने कतर के सामने मध्यस्थ के तौर पर एक प्रस्ताव रखा है। प्रस्ताव के मुताबिक देश में हिंसा रोकने के बदले तालिबान को साथ सत्ता में साझेदारी की इजाजत होगी।' दरअसल, गुरुवार को तालिबान ने अफगानिस्तान के गजनी जैसे रणनीतिक शहर पर भी कब्जा कर लिया है। यह शहर काबुल से महज 150 किलोमीटर की दूरी पर है। एक हफ्ते में उसने 10 प्रांतों की राजधानियों पर कब्जा कर लिया है, जिसमें गजनी को उनकी सबसे अहम कामयाबी माना जा रहा है।

गजनी पर तालिबान का कब्जा
अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्रालय ने गजनी के हाथ से जाने की पुष्टि की है, जो काबुल-कांधार के अहम हाइवे पर स्थित है और राजधानी काबुल और अफगान सरकार के गढ़ माने जाने वाले दक्षिणी अफगानिस्तान का गेटवे कहलाता है। अफगानिस्तान सरकार के प्रवक्ता मीरवाइज स्तानिकजई ने मीडिया को दिए संदेश में कहा कि 'दुश्मनों ने नियंत्रण कर लिया है।' हालांकि, उन्होंने कहा कि लड़ाई और प्रतिरोध अभी भी जारी है। सच्चाई ये है कि अफगान सरकार ने ज्यादातर उत्तरी और पश्चिमी अफगानिस्तान को गंवा दिया है और उसके हिस्से में छिटपुट शहर ही बचे हुए हैं, जिनके भी तालिबान के कब्जे में जाने का जोखिम बढ़ चुका है।
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गजनी पर कब्जे से तालिबान का हौसला बुलंद है
अफगानिस्तान में सरकार और तालिबान के बीच संघर्ष तब से नाटकीय अंदाज में बढ़ गया है, जब से अमेरिकी सेना ने 20 साल बाद अपने जवानों को निकालने की आखिरी कार्रवाई शुरू की। उसने इस महीने के अंत तक अफगानिस्तान पूरी तरह से खाली कर देने की घोषणा कर रखी है। गजनी के हाथ से निकलने के बाद अफगानिस्तानी एयर फोर्स पर दबाव और बढ़ेगा, जो कि पहले से ही मुश्किलों में है। क्योंकि, तितर-बितर हो चुकी अफगान सेना की सहायता के लिए सड़कों के जरिए और सैनिकों को भेजना बहुत ही मुश्किल होता जा रहा है। उधर तालिबान समर्थकों के भी हौसले बुलंद हो चुके हैं और हाल के दिनों में उनके समर्थन वाले सोशल मीडिया पोस्ट की भरमार आ चुकी है। उनकी ओर से जो तस्वीरें पोस्ट की जा रही हैं, उनमें सेना के उन वाहनों, हथियारों और ड्रोन की तस्वीरें ज्यादा हैं, जो तालिबान आतंकियों ने खाले पड़े अफगान मिलिट्री बेस से लूटे हैं।

गनी के रहते बातचीत नहीं करेगा तालिबान- इमरान खान
इस बीच दोहा में ही अफगानिस्तान में अमेरिकी दूत जलमे खालिजाद ने चीन, पाकिस्तान और रूस के राजनयिकों से मुलाकात की है। इसका मकसद तालिबान के खिलाफ एकजुटता प्रदर्शित करना है कि अगर वह नहीं सुधरा और आक्रामक बना रहा तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसी तरह खारिज रहना पड़ेगा। यह जानकारी अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने दी है। खालिजाद की अफगानिस्तान सरकार और तालिबान के लोगों से भी मुलाकात करने की योजना है। इस बीच पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान ने एक मीडिया को तालिबान की ओर से जानकारी दी है कि जब तक अशरफ गनी के पास अफगानिस्तान की सत्ता है, वह बातचीत नहीं करेगा। इमरान ने कहा है, 'मैंने तालिबान को समझाने की कोशिश की थी......तीन-चार महीने पहले वे यहां आए थे।' वे बोले कि 'शर्त ये है कि जब तक असरफ गनी वहां हैं, हम (तालिबान) अफगान सरकार से बात नहीं करने जा रहे हैं।'












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