चीन को ताइवान की सीधी चेतावनी, जंग हुई तो पूरे एशिया में आएगा महाविनाश, अमेरिका को ड्रैगन ने घेरा!
चीन और ताइवान के बीच जंग की संभावना काफी बढ़ गई है, जिसके बाद ताइवान की राष्ट्रपति ने पहली बार बयान जारी करते हुए कहा है कि, चीन अगर जंग लड़ता है तो एशिया में विनाश आ जाएगा।
ताइपे/वॉशिंगटन, अक्टूबर 05: चीन की आक्रामक नीति और दूसरे देशों की जमीन हड़पने की नीति के चलते एशिया महाद्वीपर महाविनाश का खतरा तेजी से मंडरा रहा है। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि चीन कभी भी ताइवान पर हमला कर सकता है और चीन को रोकने के लिए अमेरिका क्या करेगा, ये अभी तक साफ नहीं हो पाया है। लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन अमेरिका को घेरने की कोशिश कर रहा है और चीन का मकसद है कि वो अमेरिका ना सिर्फ वर्चस्व खत्म कर दे, बल्कि उसकी इज्जत को भी खत्म कर दे।
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एशिया में विनाश की चेतावनी
इस आशंका के साथ कि चीन कभी भी ताइवान पर हमला कर सकता है, ताइवान की राष्ट्रपति का बड़ा बयान सामने आया है। ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने चीन की सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि, अगर चीन ने ताइवान पर कब्जा किया, तो पूरे एशिया में इसके विनाशकारी परिणाम होंगे। फॉरेन अफेयर्स पत्रिका में ताइवान की राष्ट्रपति साई इंग-वेन ने एक लेख लिखा है। जिसमें उन्होंने कहा है कि, ताइवान सैन्य टकराव नहीं चाहता है, लेकिन ताइवान अपने आपको बचाने के लिए जो भी करना पड़े, करेगा और खुद को बचाने के लिए ताइवान कोई भी कदम उठाने से नहीं चूकेगा। आपको बता दें कि, इससे पहले कल ही ताइवान के विदेश मंत्री ने बयान जारी करते हुए कहा है कि, ताइवान ने चीन से जंग लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है।

अमेरिका को चीन की सीधी चुनौती
पिछले चार दिनों से लगातार चीन अपने लड़ाकू विमानों को ताइवान के हवाई क्षेत्र में भेज रहा है और ऐसा लग रहा है कि चीन कभी भी ताइवान पर हमला कर सकता है। ताइवान ने हमले की आशंका को देखते हुए फौरन ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से मदद मांगी है और कुछ एक्सपर्ट्स आशंका जता रहे हैं कि अमेरिका को अपनी शक्ति का अहसास कराने के लिए अब चीन ताइवान के खिलाफ एक्शन कर सकता है और वो एक तरह से मनोवैज्ञानिक खेल खेलने की कोशिश में है। चीनी लगातार ताइवान के वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (एडीआईजेड) में अपने लड़ाकू विमानों के साथ साथ अपने न्यूक्लियर हथियारों से लैस विमानों को भी भेज रहा है। पिछले एक हफ्ते में चीन की वायुसेना ने 149 बार ताइवान में घुसपैठ की है।

अमेरिकी एयरक्राफ्ट कर रही युद्धाभ्यास
चीन की सेना ने ताइवान के अंदर परमाणु बमों से लैस हथियार उस वक्त भेजे हैं, जब अमेरिका की एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस रोनाल्ड रीगन, यूएसएस कार्ल विंसन, एचएमएस एलिजाबेथ लगातार जापानी, ऑस्ट्रेलियाई, न्यूजीलैंड और कनाडाई जहाजों के साथ ताइवान और ओकिनावा के तट के बीच अभ्यास कर रहे हैं। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन के अंदर घरेलू परिस्थितियां काफी बदल रही हैं और शी जिनपिंग ने देश की जनता पर और नकेल कसने के लिए जो नया कानून बनाया है, उसको लेकर देश में काफी गुस्सा है और देश की जनता का ध्यान भटकाने के लिए चीन चाहता है कि युद्ध जैसा माहौल बने।

ध्यान भटकाने की कोशिश में शी जिनपिंग
रिपोर्ट के मुताबिक, अंधाधुंध कर्ज बांटने वाला चीन बुरी तरह से आर्थिक संकट में घिरता जा रहा है। खासकर शी जिनपिंग का बीआरआई प्रोजेक्ट दम तोड़ने वाला है। वहीं, चीन में रियल एस्टेट सेक्टर काफी परेशानी है और पिछले कुछ दिनों से चीन बुरी तरह से बिजली संकटों में घिरा हुआ है, लिहाजा शी जिनपिंग किसी भी तरह से देश की जनका का ध्यान घरेलू मद्दों से हटाकर युद्ध के माहौल पर लगाना चाह रहे हैं। चीन के अखबारों में देश भक्ति के लंबे लंबे आर्टिकल लिखे जा रहे हैं और ऑस्ट्रेलिया-अमेरिका को सीधे तौर पर धमकियां दी जा रही है। ऐसे में आशंका इस बात भी लग रही है कि, शी जिनपिंग अपनी गद्दी बचाने के लिए चीन को लड़ाई में धकेल सकते हैं।

ताइवान को चीन की धमकी
बीजिंग पर नजर रखने वाले एक्सपर्ट्स का मानना है कि, हालिया हवाई घुसपैठ का उद्देश्य ताइवानियों को यह संकेत देना है कि अगर चीन सामरिक रूप से रणनीतिक द्वीपों पर कब्जा करने का फैसला करता है, तो कोई भी देश ताइपे के समर्थन में नहीं आएगा। ताइवान में हवाई घुसपैठ में आई काफी तेजी का मतलब अमेरिकी सहयोगियों विशेष रूप से जापान और ऑस्ट्रेलिया के लिए भी एक संदेश है, जो क्वाड ग्रुपिंग में प्रमुख भागीदार हैं। वहीं, ताइवान ने अभी तक चीनी हवाई आक्रमण का जवाब नहीं दिया है, लेकिन इतना दिखने लगा है कि, दक्षिण चीन सागर के प्रमुख खिलाड़ियों के लिए समय अब वास्तव में खत्म हो रहा है। पीएलए का बढ़ता सैन्य दबदबा, विशेष रूप से समुद्री क्षेत्र इंडो-पैसिफिक पर अमेरिकी प्रभुत्व के लिए खतरा पैदा कर रहा है और साथ ही जापान को अपने शांतिवादी सिद्धांत को छोड़ने के लिए मजबूर कर रहा है।

अमेरिकी वर्चस्व को खत्म करने की सोच
एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन काफी सोच-समझकर ताइवान को घेरने की कोशिश कर रहा है और हो सकता है कि चीन ताइवान पर हमला कर दे। अगर युद्ध की स्थिति में अमेरिका ताइवान की मदद करने आ जाता है, तो फिर यहां से विश्व युद्ध की शुरूआत हो जाएगी और अगर अमेरिका सीधे तौर ताइवान को बचाने के लिए नहीं आता है, तो चीन को दो बड़े फायदे होंगे। एक ही झटके में चीन पूरे ताइवान पर कब्जा तो कर ही सकता है, वो पूरे विश्व में अमेरिका के सहयोगियों को सीधे तौर पर संदेश दे सकता है कि, अमेरिका असल में अब एक शक्ति नहीं रहा और उसके ऊपर अब विश्वास नहीं करना चाहिए।












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