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रूसी सेना में जिस हथियार ने मचाया कोहराम, अब उस Carl Gustaf का होगा भारत में निर्माण, हुई घोषणा

यह पहली बार ही है, जब किसी foreign Original Equipment Manufacturer (ओईएम) ने वैश्विक ग्राहकों के लिए भारत में पूर्ण स्वामित्व वाली उत्पादन सुविधा खोलने की अपनी योजना की घोषणा की है।

नई दिल्ली, सितंबर 28: मोदी सरकार की बड़ी प्राथमिकताओं में से एक बड़ी प्राथमिकता मेक इन इंडिया रही है और अब दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनियां भारत में आकर अपनी कंपनी स्थापित करने और भारत में ही प्रोडक्शन शपुरू करने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। वहीं, अब भारत में ही टैंकों के लिए काफी ज्यादा खतरनाक माने जाने वाले हथियार Carl Gustaf का निर्माण भारत में होगा और स्वीडन की कंपनी ने इसकी घोषणा कर दी है।

स्वीडन की कंपनी, भारत में निर्माण

स्वीडन की कंपनी, भारत में निर्माण

स्वीडन की प्रमुख हथियार कंपनी Saab ने मंगलवार को घोषणा की है, कि उसने भारत में अपना हथियार फैक्ट्री खोलने का फैसला किया है, जहां सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए घातक कार्ल गुस्ताफ हथियार का निर्माण करेगी और इस हथियार की बिक्री भी भारत से ही की जाएगी। स्वीडिश कंपनी ने कहा है कि, कंपनी पर पूरा स्वामित्व Saab कंपनी का ही होगा और सिर्फ इंडियन आर्मी के लिए ही नहीं, बल्कि मित्र देश भी हमारी कंपनी से घातक कार्ल गुस्ताफ खरीद सकते हैं। आपको बता दें कि, कार्ल गुस्ताफ कंधे से दागे जाने वाले टैंक रोधी हथियार है, जो टैंकों के लिए काफी ज्यादा खतरनाक होता है और इसका संचालन काफी आसानी से किया जाता है। Saab हथियार कंपनी कई और घातक हथियार निर्माण के लिए जानी जाती है और उसने पहली बार स्वीडन से बाहर किसी देश में अपना प्रोडक्शन शुरू करने का फैसला लिया है और कंपनी ने कहा है कि, भारत अब वैश्विक सेनाओं का प्रमुख आधार बन रहा है, इसीलिए कंपनी ने भारत में प्रोडक्शन शुरू करने का फैसला किया है।

पहली पूर्ण स्वामित्व वाली विदेशी फैक्ट्री

पहली पूर्ण स्वामित्व वाली विदेशी फैक्ट्री

यह भी पहली बार ही है, जब किसी foreign Original Equipment Manufacturer (ओईएम) ने वैश्विक ग्राहकों के लिए भारत में पूर्ण स्वामित्व वाली उत्पादन सुविधा खोलने की अपनी योजना की घोषणा की है। मौजूदा नीति के अनुसार, कोई भी विदेशी ओईएम स्वचालित मार्ग से 74 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ उत्पादन सुविधा स्थापित कर सकता है। इसे भारत सरकार द्वारा 100 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि विदेशी ओईएम किस तकनीक को लाएगा। यानि, इसका सबसे बड़ा फायदा ये होगा, कि ये कंपनी अपनी तकनीक भारत लाएगी, जिससे आने वाले सालों में भारत को जबरस्त फायदा होगा, क्योंकि कंपनी में काम करने वाले भारतीय हथियार बनाने की नई-नई टेक्नोलॉजी को सीखेंगे।

Carl Gustaf का होगा निर्माण

Carl Gustaf का होगा निर्माण

द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी Saab भारत में कार्ल गुस्ताफ के लेटेस्ट वेरिएंट का निर्माण करने की योजना बना रहा है, और इंडियन आर्मी पहले ही कंपनी को ऑर्डर दे चुकी है। वहीं, अब ये कंपनी अपनी नई कंपनी, साब एफएफवी इंडिया का रजिस्ट्रेशन करवाने की प्रक्रिया में है। वहीं, रजिस्ट्रेशन के बाद कंपनी विदेशी निवेश बोर्ड और रक्षा मंत्रालय द्वारा अनुमोदन की प्रक्रिया से गुजरेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, एंटी टैंक हथियार प्रणाली, कार्ल गुस्ताफ का इस्तेमाल साल 2016 के सर्जिकल स्ट्राइक में किया गया था और चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारी तैनाती के अलावा कश्मीर में भी इसका इस्तेमाल किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, कार्ल गुस्ताफ प्रणाली 1976 में अपनी शुरुआत के बाद से भारतीय सेना में अपनी सर्विस दे रहा है। विभिन्न प्रकार के गोला-बारूद के साथ, कार्ल गुस्ताफ ने खुद को भारतीय सशस्त्र बलों में कंधे से लॉन्च किए गए हथियार के रूप में खुद को स्थापित किया है।

कितना घातक होता है Carl Gustaf?

कितना घातक होता है Carl Gustaf?

एंटी टैंक हथियार कार्ल गुस्ताफ की सबसे बड़ी खासियत ये होती है, कि इसे कंधे पर रखकर काफी आसानी के साथ फायर किया जा सकता है और डेढ़ किलोमीटर के रेंज में इससे निशाना लगाया जा सकता है। इस हथियार का इस्तेमाल बख्तरबंद वाहनों, बंकरों और यहां तक ​​कि पैदल सेना के भी खिलाफ किया जा सकता है। कार्ल गुस्ताफ, गोला-बारूद रेंज एंटी-आर्मर, एंटी-टैंक और एंटी-स्ट्रक्चर मूनिशन के साथ दुश्मनों के ठिकाने और उनकी गाड़ियों को भी नष्ट कर सकती है, और एंटी-कार्मिक रेंज के साथ खुले में पैदल सेना को बेअसर कर सकती है, क्योंकि यह हवा में फट जाती है और इसके छर्रों में भी विस्फोट होता है। इसके साथ ही युद्ध के मैदान में कार्ल गुस्ताफ से कई तरह की और मदद मिलती है। जैसे इसके गोले को विस्फोट से उड़ाकर दुश्मन की आंखों को कुछ देर के लिए धुंधला किया जा सकता है, जिससे छिपने में मदद मिल सकती है। वहीं, इसके लिए काले धुंएं का गुबार भी उत्पन्न किया जा सकता है, जिससे भी दुश्मन को बर्गलाने में मदद मिलती है। कनाडा ने 100 कार्स गुस्ताफ यूक्रेन को सौंफे थे, जिसने सैकड़ों रूसी टैंक को ध्वस्त कर दिया और इससे यूक्रेन की सेना ने कई रूसी हेलीकॉप्टर का भी शिकार किया।

15 देशों में होगी सप्लाई

15 देशों में होगी सप्लाई

कंपनी की तरफ से कहा गया है कि, फिलहाल जो उत्पादन किया जाएगा, उसकी डिलीवरी इंडियन आर्मी के साथ साथ 15 देशों की आर्मी को की जाएगी। कंपनी ने कहा कि, "यह भारत में कार्ल-गुस्ताफ एम-4 के लिए एक उत्पादन सुविधा स्थापित करने के लिए एक स्वाभाविक कदम है, क्योंकि हमारा भारतीय सेना के साथ सिस्टम के अग्रणी उपयोगकर्ताओं में से एक के रूप में लंबे और घनिष्ठ संबंध हैं। कंपनी के बिजनेस एरिया डायनेमिक्स के प्रमुख गोर्गन जोहानसन ने नई दिल्ली में कहा कि, "हमें विश्व स्तर के रक्षा उद्योग के विकास के भारत सरकार के लक्ष्यों में योगदान करने में सक्षम होने और भारतीय सशस्त्र बलों को भारत में निर्मित हमारे कार्ल-गुस्ताफ एम4 की पेशकश करने पर गर्व है।" हालांकि, फिलहाल ये फैसला नहीं किया गया है, कि कंपनी का पहला प्लांट भारत में कहां खोला जाएगा, लेकिन कंपनी ने कहा है कि, उसका लक्ष्य साल 2024 तक एम-4 वेरिएंट तैयार करने की है।

हथियारों की कैसे होगी बिक्री?

हथियारों की कैसे होगी बिक्री?

जोहानसन ने कहा कि भारतीय इकाई द्वारा निर्मित कार्ल गुस्ताफ को पहले स्वीडन में निर्यात किया जाएगा और फिर ग्राहकों को भेजा जाएगा। Saab कंपनी ने साल 1976 से erstwhile Ordnance Factory Board के साथ साझेदारी पहली बार की थी और फिर कंपनी ने भारतीय कंपनियों के साथ भी साझेदारी की और वैश्विक बाजार के लिए पुर्जे और कलपुर्जे बनाए। SAAB के अधिकारी ने कहा कि, स्वीडिश कंपनी, Munitions India Limited (MIL) और एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL) के साथ अपनी साझेदारी जारी रखेगी, दोनों संस्थाएं कार्ल गुस्ताफ हथियार और उसके गोला-बारूद के निर्माण के लिए OFB के निगमीकरण से पैदा हुई हैं। जहां MIL मौजूदा कार्ल गुस्ताफ गोला-बारूद के लिए एक सरणी बनाती है, वहीं AWEIL हथियार प्रणाली के मार्क 3 संस्करण का निर्माण करती है। जोहानसन ने कहा कि, नई फैसिलिटी केवल M4 संस्करण का निर्माण करेगी और पिछली पीढ़ी का निर्माण AWEIL द्वारा किया जाएगा।

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